
सतगुरु ट्रेवल एंड टूर्स सर्विस पर लगाये आरोप बेबुनियाद:लीगल हेड।
नई दिल्ली, भारत: सतगुरु ट्रैवल एंड टूर्स सर्विसेज पर लगाये गए हमारे पूर्व कर्मचारी धीरज जैन द्वारा सभी आरोप बेबुनियाद है, एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी, की जा रही है उनका मकसद केवल कम्पनी को बदनाम करना है एक प्रेस वार्ता में, कम्पनी के लीगल हेड अरिंदम चक्रवर्ती ने आरोप लगाया है, आकरण वीडिओ सोशल मिडिया, अन्य प्लेटफार्म में अनैतिक बातें की जा रही है वहीं बंधक बनाये जाने के आरोप केमरून में गलत साबित हुये है।तथा यह दावे कैमरून गणराज्य में संबंधित विधि प्राधिकरणों के समक्ष चल रही सत्यापित आपराधिक कार्यवाहियों हैं।
लीगल हेड ने बताया कि सोशल मीडिया, टेलीविजन प्लेटफॉर्म्स और भारत में चुनिंदा मीडिया इंटरैक्शन के माध्यम से प्रसारित दावों के विपरीत, यह मामला किसी भी प्रकार की कैद, दबाव या अवैध हिरासत से संबंधित नहीं है। यह पंजीकृत आपराधिक मामलों से जुड़ा है, जिनमें एक कथित मनगढ़ंत लूट की घटना तथा ग्राहकों की धनराशि को अवैध रूप से रोकने और गबन करने से संबंधित कई प्रकरण शामिल हैं। ये सभी मामले वर्तमान में कैमरून गणराज्य की सक्षम जांच और न्यायिक एजेंसियों के समक्ष विचाराधीन हैं क्योंकि,
संबंधित घटनाएँ कैमरून में घटित हुईं, और इसी कारण सतगुरु ट्रैवल ने कैमरून के कानून के अंतर्गत पूर्ण रूप से विधिक प्रक्रिया का पालन किया। डुआला टेरिटोरियल जेंडरमेरी ग्रुप, राष्ट्रीय जेंडरमेरी, रक्षा मंत्रालय, कैमरून गणराज्य के समक्ष औपचारिक शिकायतें दर्ज की गईं। प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित न्यायिक पुलिस अधिकारी द्वारा आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज की गई। दस्तावेज़ी साक्ष्य, ग्राहकों के बयान और वित्तीय अभिलेखों के आधार पर आरोपी धीरज जैन के विरुद्ध कई आपराधिक शिकायतें दर्ज की गईं। इन तीन मामलों में कुल वित्तीय राशि लगभग 99,107 अमेरिकी डॉलर है।
चक्रवर्ती ने बताया कि जांच और प्रारंभिक साक्ष्यों की समीक्षा के पश्चात, सक्षम कैमरूनियन न्यायालय ने आगे की जांच और सुनवाई लंबित रहने तक धीरज जैन को न्यायिक हिरासत में रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय स्वतंत्र रूप से न्यायिक प्राधिकरणों द्वारा कानून के अनुसार लिया गया था, जिसमें सतगुरु ट्रैवल की कोई भूमिका या हस्तक्षेप नहीं था। इस वैधानिक प्रक्रिया को “कैद” के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद धीरज जैन और उनसे जुड़े कुछ व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के माध्यम से स्वयं को पीड़ित दर्शाने का प्रयास किया गया है, इस पूरे प्रकरण के दौरान कैमरून में भारत के उच्चायोग को निरंतर सूचित रखा गया है और उसकी भूमिका पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।
दिसंबर 2025 में स्वयं को धीरज जैन के परिवार का प्रतिनिधि बताने वाले एक व्यक्ति ने सौहार्दपूर्ण समझौते हेतु संपर्क किया।उस पर भी खरा नहीं उतरा हमने मानवीय आधार पर उनके परिवार को भारत आने के लिए पूरी मदद भी की थी।

