
दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर प्राचार्या प्रो. (डॉ.) नीलम गोयल, टीआईसी सुश्री स्टैनज़िन यांगडोल, आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. शुभा सिन्हा, संयोजक डॉ. अभिनंदन पांडे, सह-संयोजक सुश्री मोनिका शिवहरे व डॉ. जितेंद्र, विभाग के शिक्षकगण डॉ. रवींद्र सिंह, श्री विजय, सुश्री पूजा शर्मा, सुश्री काजल, सुश्री मंजू सरोज, सुश्री एकता और छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी में विभिन्न महाविद्यालयों से आए शिक्षकगण, जैसे डॉ. महीप, डॉ. धर्मेंद्र और डॉ. अजय जायसवाल भी उपस्थित हुए। कार्यक्रम का मंच संचालन जाह्नवी और वंशिका द्वारा किया गया।

मुख्य वक्ता प्रो. ऋषि कांत पांडे (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) ने भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख स्तंभों—ज्ञान मीमांसा, तत्व मीमांसा और मूल्य मीमांसा पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने ज्ञान और बुद्धिमत्ता के अंतर, कर्तव्य तथा मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर चर्चा की।

