श्यामा प्रशाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय ने ICSSR &IQAC के सरक्षण मे विकसित भारत @2047 सम्मेलन :

श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सहयोग और आईक्यूएसी (IQAC) के संरक्षण के अंतर्गत “विकसित भारत @2047 : बहु विषयी राष्ट्रीय सम्मेलन ” विषय पर द्विदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में विभिन्न विद्वानों एवं शिक्षाविदों ने विकसित भारत @2047 पर अपने विचार व्यक्त किए।

उद्घाटन सत्र में प्राचार्या प्रो. नीलम गोयल ने अतिथियों का स्वागत कर बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि प्रो. सुभाष आनंद ने विकसित भारत के पाँच उद्देश्यों—आर्थिक समृद्धि, सामाजिक समानता, तकनीकी उन्नति, पर्यावरणीय स्थिरता तथा सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर बल दिया। उन्होंने भारत को पुनः “सोने की चिड़िया” बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि प्रो. अरविंद कुमार ने लैंगिक समानता एवं समावेशी विकास को विकसित भारत की आधारशिला बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. अनिल कुमार ने भारत की विकास यात्रा तथा जनधन योजना जैसे बैंकिंग सुधारों को वित्तीय समावेशन का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. सुधा सिंह ने महिला शिक्षा एवं महिलाओं की सहभागिता को राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक बताया। उद्घाटन सत्र का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गगन बाकोलिया द्वारा प्रस्तुत किया गया।

प्रथम, तकनीकी सत्र में “वाणिज्य, वित्त, प्रबंधन एवं तकनीकी नवाचार” विषयक पैनल चर्चा में डॉ. राकेश कुमार ने डिजिटल परिवर्तन, यूपीआई, स्टार्टअप एवं उद्यमिता पर विचार रखे। डॉ. साक्षी शर्मा ने सतत विकास, जलवायु परिवर्तन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व पर चर्चा की। वहीं प्रो. आर. के. गुप्ता ने विकास को सामाजिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

द्वितीय तकनीकी सत्र में “महिला सशक्तिकरण, समाज एवं समवेशी विकास : हिन्दी भाषा एवं साहित्य के परिप्रेक्ष्य में” डॉ. अर्चना ने पितृसत्ता एवं पर्यावरणीय संकट को विकसित भारत की राह में चुनौती बताया। प्रो. सारिका कालरा ने हिन्दी भाषा, साहित्य एवं अर्थव्यवस्था के संबंध पर प्रकाश डाला। वहीं प्रो. आशा ने समावेशिता एवं राष्ट्रीय चेतना को विकास के लिए आवश्यक बताया।


दूसरे दिन तृतीय तकनीकी सत्र में “अर्थव्यवस्था, नीति एवं सुशासन” विषय पर सत्र आयोजित किया गया। सत्र में भारत की विकास यात्रा एवं विकसित भारत @2047 की परिकल्पना पर चर्चा की गई। डॉ. सुचेता सरदार ने भारत की आर्थिक प्रगति, एसडीजी, अमृतकाल एवं पंचामृत लक्ष्यों पर प्रकाश डाला। डॉ. आकांशा कौशिक ने “डेटा, लोकतंत्र और दुष्प्रचार” विषय पर एआई, डीपफेक एवं भ्रामक सूचनाओं की चुनौतियों पर चर्चा की। डॉ. देवेश ने विकसित भारत 2047, डिजिटल इंडिया, नवीकरणीय ऊर्जा एवं भारत की वैश्विक भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

चतुर्थ तकनीकी सत्र में “भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं मानविकी” विषयक पैनल चर्चा आयोजित की गई। डॉ. कमाल कुमार ने सांस्कृतिक एवं सामाजिक विकास की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. उमेश खूटे ने भाषा, संज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर विचार व्यक्त किए। प्रो. प्रमोद कुमार मेहरा ने भाषायी विविधता एवं व्युत्पत्ति के महत्व को रेखांकित किया।

समापन सत्र में प्रो. नीलम गोयल ने सतत विकास, समावेशी विकास एवं महिलाओं की सहभागिता पर बल दिया। प्रो. सत्यकेतु संकृत ने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। प्रो. कविता शर्मा ने भाषा एवं प्रकृति से जुड़ाव को आवश्यक बताया। प्रो. रेखा सक्सेना ने सामाजिक समरसता पर बल दिया तथा प्रो. सुदेशना मजूमदार ने युवाओं की भूमिका को विकसित भारत @2047 के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
समग्र रूप से यह संगोष्ठी ज्ञानवर्धक एवं विचारोत्तेजक रही। इसने शिक्षा, नवाचार, सतत विकास, तकनीकी उन्नति एवं सामाजिक समावेशन के माध्यम से विकसित भारत @2047 की संकल्पना को साकार करने की आवश्यकता पर बल दिया।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top