
शनिधाम में शनि अमावस्या पर उमड़े श्रद्धालु, रात में हुई महाआरती
मशहूर क्रिकेटर राहुल तेवतीया के साथ हजारो की तादाद में शनि भक्त महारती में शामिल हुए
नई दिल्ली। असोला-फतेहपुर बेरी स्थित श्री सिद्ध शक्ति पीठ शनिधाम में शनि अमावस्या श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी परमहंस निजस्वरूपानंद पुरी जी महाराज की अगुवाई में रात को महाआरती की गई। इसके बाद दिनभर शनिदेव के दर्शन, विशेष पूजा-अर्चना और तैलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी रहा। शनि अमावस्या और सर्वपितृ अमावस्या का संयोग होने से श्रद्धालुओं ने शनिदेव की आराधना के साथ अपने पूर्वजों के निमित्त भी धार्मिक अनुष्ठान किए।

शनिधाम में श्रद्धालुओं ने शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर में दीप प्रज्ज्वलन और शनि मंत्रों के जाप के साथ पूजा-अर्चना की गई। मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दर्शन और तैलाभिषेक की व्यवस्था की गई थी।
इस अवसर पर पीठाधीश्वर स्वामी परमहंस निजस्वरूपानंद पुरी जी महाराज ने कहा कि शनिदेव को भय और संकट का प्रतीक मानने के बजाय न्याय के देवता के रूप में देखना चाहिए। वे मनुष्य को उसके कर्मों के अनुरूप फल प्रदान करते हैं। शनि अमावस्या आत्ममंथन करने और अपने आचरण में सुधार लाने का अवसर है।
महाराज जी ने कहा, “शनि शत्रु नहीं, मित्र हैं। जो व्यक्ति ईमानदारी और परिश्रम से जीवन जीता है, माता-पिता की सेवा करता है और जरूरतमंदों की सहायता करता है, उसे शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।” उन्होंने श्रद्धालुओं से आडंबर से दूर रहकर श्रद्धा, संयम और सेवा भावना के साथ पूजा-अर्चना करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सर्वपितृ अमावस्या पर पूर्वजों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता और सेवा कार्यों को भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानना चाहिए।

