मीडिया से संवाद के दौरान शहरी विकास मंत्री श्री आशीष सूद ने मास्टर प्लान फॉर दिल्ली 2047 (MPD-2047) के प्रमुख प्रावधानों को विस्तार से बताया।

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नई दिल्ली: दिल्ली के शहरी विकास मंत्री श्री आशीष सूद ने आज मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि दिल्ली में जमीन सीमित है, लेकिन हमारी सोच और विजन सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान फॉर दिल्ली 2047 (MPD-2047) दिल्ली के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने, पुरानी कॉलोनियों के पुनर्विकास, हरित क्षेत्र बढ़ाने तथा आधुनिक नियोजन समाधानों के माध्यम से यातायात की समस्या का समाधान करने का एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करता है।

श्री आशीष सूद ने कहा, की यह दूरदर्शी मास्टर प्लान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के निरंतर मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी की मजबूत प्रतिबद्धता के तहत आकार ले रहा है। पहले विभिन्न प्राधिकरणों के बीच समन्वय की कमी के कारण कार्यों में देरी होती थी, लेकिन आज सभी स्तरों पर बेहतर तालमेल और साझा उद्देश्य के साथ हम दिल्ली की जनता के लिए इन परिवर्तनकारी सुधारों को सुचारु रूप से लागू कर सकते हैं।

मीडिया से बातचीत करते हुए शहरी विकास मंत्री श्री आशीष सूद ने आगे कहा की दिल्ली की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा सीमित लैंड रही है, लेकिन हमारा विजन सीमित नहीं है। MPD-2047 के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि समाज के हर वर्ग को किफायती आवास, आधुनिक बुनियादी ढांचा और बेहतर सुविधाएं मिलें। ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट और लैंड पूलिंग को एकीकृत करके हम भावी पीढ़ियों के लिए एक सुव्यवस्थित और टिकाऊ राजधानी के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

MPD-2047 के प्रमुख प्रावधान
30 मीटर चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति:
स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और नागरिकों की सुविधा को बढ़ावा देने के लिए 30 मीटर चौड़ी सड़कों के किनारे स्थित कॉलोनियों में संपत्तियों के ग्राउंड फ्लोर पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी।

नियोजित क्षेत्रों में पुनर्विकास (3,000 वर्गमीटर):
DDA के नियोजित क्षेत्रों में यदि 75 प्रतिशत से अधिक निवासी पुनर्विकास के लिए सहमति देते हैं, तो 3,000 वर्गमीटर क्षेत्र में 1.5 FAR के साथ पुनर्विकास किया जा सकेगा। इससे पुराने और जर्जर फ्लैटों के स्थान पर परिवारों को बड़े, बेहतर और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

अनधिकृत कॉलोनियों में पुनर्विकास (2,000 वर्गमीटर):
अनधिकृत कॉलोनियों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए न्यूनतम 2,000 वर्गमीटर क्षेत्र में पॉकेट आधारित पुनर्विकास की अनुमति होगी, जिसमें 1.5 FAR लागू होगा। इससे मजबूत संरचनाओं, चौड़ी सड़कों और बेहतर सामुदायिक सुविधाओं के विकास का रास्ता खुलेगा।

ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD):
मेट्रो स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे में आने वाले 2,000 वर्गमीटर के भूखंडों पर TOD नीति लागू की जाएगी। इससे नागरिकों को मेट्रो स्टेशनों तक पैदल पहुंच की सुविधा मिलेगी, निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और यातायात जाम की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

समग्र मोबिलिटी प्लान और भूमि उपयोग:
रेट्रोफिटिंग और एकीकृत नियोजन के माध्यम से भूमि उपयोग और परिवहन व्यवस्था में समन्वय स्थापित किया जा रहा है। TOD परियोजनाओं के आसपास डेवलपर्स द्वारा 18 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए स्थान छोड़ा जाएगा, जिससे सुचारु यातायात और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सके।

झुग्गी-झोपड़ी समूहों का इन-सीटू पुनर्वास:
शहरी विकास मंत्री ने स्पष्ट किया कि नीति का मुख्य उद्देश्य इन-सीटू पुनर्वास है—अर्थात जहां झुग्गियां, वहीं मकान। इससे लोगों को विस्थापित किए बिना सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया जा सकेगा।

हरित क्षेत्र और ‘लंग स्पेस’ का विस्तार:
यमुना के फ्लडप्लेन में किसी भी नए निर्माण की अनुमति नहीं होगी। दिल्ली के हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए MPD-2047 में अरावली क्षेत्र में ‘लंग स्पेस’, DDA द्वारा विकसित 52 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक, 200 किलोमीटर से अधिक पार्क कनेक्टर्स तथा साहिबी/नजफगढ़ ड्रेन जैसे नालों के किनारे रिवर कनेक्टर पैच विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

लैंड पूलिंग, शिक्षा और उद्योग:
सरल लैंड पूलिंग नीति से ग्रामीण क्षेत्रों और गांवों को लाभ मिलेगा। वर्टिकल एजुकेशनल कैंपस के लिए भूमि उपलब्ध कराने तथा दिल्ली से बाहर स्थानांतरित हो चुके उद्योगों और औद्योगिक हब को फिर से दिल्ली में लाने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।

जीरो वेस्ट और संसाधन प्रबंधन:
नई निर्माण परियोजनाओं और TOD क्षेत्रों को जीरो-वेस्ट कैंपस के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें स्रोत पर कचरा पृथक्करण और आधुनिक कचरा प्रसंस्करण तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे लैंडफिल पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके।

जल और बिजली की क्षमता में वृद्धि:
भविष्य की जल आवश्यकता को पूरा करने के लिए रेणुका, लखवार और किशाऊ बांधों से संबंधित अंतरराज्यीय समझौतों तथा उन्नत जल पुनर्चक्रण प्रणालियों सहित दीर्घकालिक उपाय किए जाएंगे। बिजली के बुनियादी ढांचे को भी दीर्घकालिक समझौतों और विस्तार योजनाओं के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है, ताकि दिल्ली में बिजली कटौती की समस्या को समाप्त किया जा सके।

श्री सूद ने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच बेहतर समन्वय एवं सहयोग के साथ MPD-2047 दिल्ली को एक सुव्यवस्थित, आधुनिक और टिकाऊ राजधानी के रूप में विकसित करेगा, जो युवाओं सहित दिल्ली के प्रत्येक नागरिक की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होगी।

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