प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” और “ईज़ ऑफ लिविंग” के विज़न का उल्लेख करते हुए कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया ट्रेडर्स ( कैट) ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि दिल्ली में लंबे समय से चल रहे सीलिंग और ध्वस्तीकरण (डेमोलिशन) के संकट का स्थायी समाधान मास्टर प्लान 2041 के माध्यम से किया जाए। कैट ने केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर से इस विषय में त्वरित और निर्णायक हस्तक्षेप की मांग की है।इस संबंध में कैट ने श्री खट्टर को भेजे पत्र की एक प्रति दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता को भी भेजी है
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने आज श्री खट्टर को भेजे गए पत्र में कहा कि पिछले दो दशकों से दिल्ली के व्यापारी लगातार सीलिंग और ध्वस्तीकरण के भय के साए में जी रहे हैं, जिससे उनके व्यापार और आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ा है तथा शासन के प्रति विश्वास भी कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा, “वर्षों से कठोर कार्रवाई के बावजूद सीलिंग किसी भी सार्थक शहरी नियोजन लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई है। इसके विपरीत, इसने ईमानदार व्यापारियों को दंडित किया है, जबकि प्रणालीगत खामियां अब भी अनसुलझी हैं।”
मूल कारणों की ओर ध्यान दिलाते हुए खंडेलवाल ने कहा कि 1961, 1981 और 2007 के मास्टर प्लान दिल्ली की बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप पर्याप्त व्यावसायिक अवसंरचना विकसित करने में विफल रहे। “व्यापारियों ने इस कमी को पूरा किया और नागरिकों को आवश्यक वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराईं। यदि कहीं प्रक्रियागत त्रुटियां हुईं, तो वे नीति और नियोजन की कमियों का परिणाम थीं, न कि जानबूझकर किए गए उल्लंघन,” उन्होंने कहा।
उन्होंने वर्ष 2008 में सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक हलफनामे का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकारी एजेंसियां पिछले चार दशकों में केवल लगभग 16 प्रतिशत आवश्यक व्यावसायिक स्थान ही विकसित कर पाईं। “यह स्थिति स्वयं स्पष्ट करती है कि व्यापारियों ने शहर की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बावजूद उन्हें दंडित किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं की गई—यह घोर अन्याय है,” खंडेलवाल ने कहा।
कैट ने आग्रह किया है की है कि मास्टर प्लान 2041 में निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जाएं:
- सीलिंग के निरंतर खतरे को समाप्त कर व्यापारियों को स्थायी राहत और नीतिगत स्पष्टता प्रदान की जाए
- “जैसा है, जहां है” के आधार पर एकमुश्त आम माफी योजना (एमनेस्टी स्कीम) लागू की जाए, जिसमें कट-ऑफ तिथि निर्धारित हो, तथा एमसीडी अधिनियम, 1957 के तहत समायोजन (कम्पाउंडिंग) का प्रावधान हो
- 351 अधिसूचित सड़कों को व्यावसायिक एवं मिश्रित भूमि उपयोग में शामिल किया जाए, ताकि जमीनी वास्तविकताओं को मान्यता मिले
- भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त और सुव्यवस्थित व्यावसायिक अवसंरचना विकसित की जाए
- नियोजन एवं क्रियान्वयन एजेंसियों की स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित की जाए
खंडेलवाल ने कहा, “दिल्ली के व्यापारी कोई रियायत नहीं मांग रहे हैं, बल्कि न्याय, सम्मान और नीतिगत स्पष्टता चाहते हैं। मूल कारणों को संबोधित किए बिना सीलिंग जारी रखना आर्थिक संकट और जन असंतोष को और बढ़ाएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि मास्टर प्लान 2041 को प्रधानमंत्री के विज़न के अनुरूप बनाना एक ऐतिहासिक अवसर है, जिससे दिल्ली को एक सुव्यवस्थित, व्यापार-अनुकूल और आर्थिक रूप से सशक्त राजधानी में परिवर्तित किया जा सकता है।
कैट ने सरकार से अपील की है कि वह इस मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई करे और सभी हितधारकों को साथ लेकर एक व्यावहारिक, न्यायसंगत और विकासोन्मुख समाधान सुनिश्चित करे।

