
चार नए ट्रस्टीयों के बारे मुख्यमंत्री या मंत्री बताएं:-
नई दिल्ली : सिख पंथ के 3 विरासती स्कूलों का संचालन करने वाली एस.एस. मोता सिंह (निला) चैरिटेबल ट्रस्ट पर सियासी संरक्षण में अवैध क़ब्ज़े होने का अंदेशा शिरोमणी अकाली दल ने जताया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष तथा अकाली दल के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने इस बारे में आज पार्टी दफ्तर में मीडिया को संबोधित करते हुए उक्त स्कूल ट्रस्ट पर कब्जा करने के पीछे दिल्ली की मुख्यमंत्री से मंत्रियों तक के नामों की चल रहीं चर्चाओं का हवाला दिया। जीके ने 27 अप्रैल 2026 को ट्रस्टी बोर्ड की हुई मीटिंग का एजेंडा दिखाते हुए दावा किया कि इस मीटिंग में 2/3 बहुमत से बोर्ड आफ ट्रस्टी के मौजूद नहीं रहने के कारण सोसाइटी के नियमों में संशोधन का कोशिश कामयाब नहीं हो पाई थी। पर बाद में सोसाइटी की महासचिव एच.के. आनंद के द्वारा एक चिठ्ठी जारी करके चार नए सदस्यों को ट्रस्टी बनाया जाता है। सोशल मीडिया पर चल रही इस चिठ्ठी के अनुसार प्रो. विजेंद्र कुमार अग्रवाल, स्वाती गर्ग, अमरजीत सिंह तथा मनीष गुप्ता को ट्रस्टी बनाया गया है। जबकि ट्रस्ट के तीनों संस्थापक सदस्य तथा अन्य महत्वपूर्ण सदस्य इस मीटिंग में मौजूद नहीं थे। नए सदस्यों को किन लोगों से संबंध होने की काबिलियत पर सदस्य बनवाया गया है, यह बेहतर मुख्यमंत्री या मंत्री बता सकते है? क्योंकि इन सदस्यों की कार्रवाई छुपाने के लिए सोसाइटी की फाइल ही अब एस.डी.एम. कापसहेड़ा दफ्तर से गायब होने की खबर है।

जीके ने बीते दिनों इस ट्रस्ट के जनकपुरी स्थित स्कूल में 3 वर्ष की सिख बच्ची से दुष्कर्म होने का हवाला देते हुए कहा कि किसी कीमत पर इस घटना में शामिल आरोपी को बचाने नहीं देंगे। इन दोनों मामलों पर दिल्ली कमेटी प्रबंधकों की रहस्यमई चुप्पी पर हैरानी जताते हुए जीके ने ऐलान किया कि किसी भी कीमत पर इन स्कूलों पर रसूखदार भूमाफिया का कब्जा नहीं होने देंगे। अपने खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा समन जारी करने पर प्रतिक्रिया देते हुए जीके ने कहा कि अभी तक इन एफ.आई.आर. के मामले में पिछले 7-8 साल से उनके खिलाफ एकतरफा पुलिस व अदालती कार्यवाही चल रहीं थीं। अब यह अच्छा हुआ है कि मुझे भी अब इस मामले में सफाई रखने का कोर्ट के सामने मौका मिला है। दिल्ली कमेटी अध्यक्ष व महासचिव द्वारा पर इस समन को लेकर प्रेस कांफ्रेंस करने कर बोलते हुए जीके ने कहा कि मुझे खुशी होती, यदि यह जगदीश टाइटलर को जमानत मिलने, सज्जन कुमार से क़त्ल की धारा 302 हटने, बीघड़ स्कूल, 2 आई.टी.आई. तथा 2 इंस्टीट्यूट बंद करने पर इस प्रकार की प्रैस कांफ्रेंस करते। इन्होंने मेरे ऊपर 703 करोड़ रुपए गबन करने के आरोप लगाएं थे, पर इसमें से 702 करोड़ रुपए के आरोप अब मिल नहीं रहे, रही बात 1 करोड़ रुपए के आरोपों कि तो उस पर अब यह झूठे कागज़ बनाने के मामले में खुद जेल जाएंगे। जीके ने कहा कि दिल्ली कमेटी प्रबंधकों को “जीके फोबिया” हो गया है। इसलिए अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए सारा समय जीके-जीके जपते रहते हैं। मैंने कुछ ग़लत नहीं किया है, सारे खर्चों को कमेटी की 15 सदस्यों की कार्यकारिणी ने विधान अनुसार पारित किया है। इस मौके तमाम अकाली नेताओं के साथ एडवोकेट नगिंदर बैनिपाल तथा अन्य वकील मौजूद थे।

