
रावण दहन से परे: आज के समय में दशहरा हमें क्या सिखाता है?
दशहरा केवल रावण के पुतले को जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर झाँकने का अवसर है। रावण महान विद्वान और शक्तिशाली राजा था, लेकिन उसका अहंकार और दूसरों की गरिमा का अनादर उसके पतन का कारण बना। यह हमें याद दिलाता है कि ज्ञान और शक्ति तभी सार्थक हैं, जब उनके साथ विनम्रता, करुणा और सम्मान भी हो।
एक दास्तानगो के रूप में मेरा मानना है कि राम और रावण की कथा केवल अतीत का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी हमारे समाज से संवाद करती है। हर युग में इन कहानियों को नए संदर्भों में समझने की आवश्यकता है। आज रावण का पुतला जलाते हुए हमें यह भी सोचना चाहिए कि हमारे भीतर का अहंकार, नफ़रत, असहिष्णुता और भेदभाव कब समाप्त होगा।
मेरे लिए दशहरे की सच्ची विजय तब होगी, जब हम केवल रावण का पुतला नहीं जलाएँगे, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास भी करेंगे। आखिरकार, अच्छाई की असली जीत आतिशबाज़ी में नहीं, बल्कि हमारे विचारों, व्यवहार और दूसरों के प्रति हमारे सम्मान में दिखाई देती है।

