बेहतर खानपान से कम हो सकता है आनुवंशिक जोखिम का प्रभाव, चेन्नई और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने किया अध्ययन

Uncategorized

खराब खानपान से बढ़ सकता है उच्च कोलेस्ट्रॉल का आनुवंशिक जोखिम: अध्ययन

नई दिल्ली 22 अक्टूबर 2026। खराब खानपान उन लोगों में उच्च कोलेस्ट्रॉल के जोखिम को बढ़ा सकता है, जिनमें इसकी आनुवंशिक प्रवृत्ति पहले से मौजूद है। चेन्नई के मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन, डॉ. मोहन डायबिटीज स्पेशियलिटीज सेंटर और ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के शोधकर्ताओं के अध्ययन में यह बात सामने आई है। शोध अध्ययन में चेन्नई के 25 से 80 वर्ष की आयु के 1,020 वयस्कों को शामिल किया गया। इनमें 452 पुरुष और 568 महिलाएं थीं। शोधकर्ताओं ने टीसीएफ7एल2 और एफटीओ जीन से जुड़े आनुवंशिक रूपों तथा प्रतिभागियों की खानपान संबंधी आदतों का विश्लेषण किया। अध्ययन के अनुसार, अधिक आनुवंशिक जोखिम और खराब गुणवत्ता वाला खानपान लेने वाले लोगों में कुल कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक पाया गया। हालांकि, मध्यम या बेहतर गुणवत्ता वाला खानपान लेने वालों में अधिक और कम आनुवंशिक जोखिम वाले समूहों के बीच कोलेस्ट्रॉल के स्तर में महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष और अध्ययन के सह-लेखक डॉ. वी. मोहन ने कहा कि जीन ही व्यक्ति के चयापचय संबंधी स्वास्थ्य का अंतिम निर्धारण नहीं करते। बेहतर खानपान आनुवंशिक जोखिम के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. के. एस. विमलेश्वरन ने कहा कि फल, सब्जियां और दालों जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाना तथा अतिरिक्त चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा को सीमित करना जरूरी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, भारत में मधुमेह और हृदय रोगों के बढ़ते जोखिम को देखते हुए संतुलित खानपान पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह अध्ययन खानपान और आनुवंशिक जोखिम के बीच संबंध दर्शाता है। इसकी पुष्टि के लिए आगे और शोध की आवश्यकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *