कुलवंत कौर की रिपोर्ट :-सवाददाता.

नई दिल्लीः फोर्टिस एस्कॉर्ट हॉस्पिटल मे नवजात बच्चें को गर्भ मे ही दिल की गंभीर बीमारी हो गई जिस उसके माता-पिता दोनों डॉक्टर होने के कारण इसका सही उपचार के लिए कई जगह तलाश की, इंटरनेट पर फोर्टिस एस्कर्ट के डॉक्टर अय्यर की जानकारी मिली सम्पर्क किया और सही समय पर सही ईलाज हुआ यह कहना था नवजात के माता-पिता का। डॉक्टर अय्यर के बताया कि ,जन्म के समय नवजात का हृदय अखरोट जितना और हृदय को खून पहुंचाने वाली नसें लिवर से जुड़ी थीं। ऐसे में जन्म के तुरंत बाद उसके हृदय को रक्त न मिलने, लिवर सहित शरीर के अन्य हिस्सों में रक्त भरने की आशंका के कारण जान का संकट बना हुआ था। हमारी टीम ने मिलकर जन्म के महज 15 मिनट के अंदर नवजात के हृदय की ओपन हार्ट जटिल सर्जरी करनी शुरू की और सात घंटे बाद उसकी जान बचा ली।

चिकित्सकों का दावा है कि नवजात स्वस्थ है और उसे कोई परेशानी नहीं है। भारत में प्रत्येक दस हजार में से एक बच्चा ऐसे विकार के साथ जन्म लेता है, जिसका समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है।
फोर्टिस अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि नवजात गर्भ में ही हृदय को रक्त पहुंचाने वाली नसों के ‘इन्फ्राडायफ्रामैटिक टोटल एनामलस पल्मोनरी वेनस कनेक्शन,टीएपीवीसी सर्जरी हुए नवजात के माता-पिता डा. पंखुड़ी व डा. चेतन मिश्रा के साथ फोर्टिस एस्कार्टस अस्पताल की टीम डा. विक्रम अग्रवाल, डा. आशुतोष मारवाह, डा. केएस अय्यर व डा. पार्वती अय्यर (टीएपीवीसी)’ जैसी दुर्लभ हृदय विकार से पीड़ित था। इसमें फेफड़ों से आने वाला आक्सीजन युक्त रक्त दिल तक सही रास्ते से पहुंचने के बजाय लिवर से जुड़ी नसों के माध्यम से शरीर में बह रहा था। अस्पताल के पीडियाट्रिक और कंजेनिटल हार्ट सर्जरी के चेयरमैन डा. केएस अय्यर
ने बताया कि बच्चे के पटना निवासी माता-पिता दोनों ही चिकित्सक हैं, उनकी जागरूकता से नवजात में इस दुर्लभ बीमारी की पहचान गर्भावस्था में ही हो गई थी। इसलिए उपचार की पूरी योजना जन्म से पहले तैयार हो गई थी। नवजात के माता-पिता के निर्णय पर बच्चे के जन्म की व्यवस्था अस्पताल के पास ही कराई गई, क्योंकि गर्भ में वह मां से आक्सीजन प्राप्त कर रहा था पर, जन्म के बाद सभी प्रक्रिया उसके शरीर को करनी थी। इसलिए जन्म के महज 15 मिनट के भीतर ही नवजात को आपरेशन थिएटर में पहुंचाकर तत्काल सर्जरी प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
पीडियाट्रिक कार्डियोलाजी के निदेशक डा.आशुतोष मारवाह ने बताया कि नवजात की सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी। निदेशक पिडियाट्रिक कार्डियाक इंटेसिविस्ट डा. पार्वती अय्यर ने बताया कि जन्म से पहले गर्भ में शिशु की स्थिति कई बार बनती-बीगड़ती रही पर,उसे संभाला गया। सर्जरी के बाद नवजात की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और करीब 11 दिनों में उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

