नीरजा मोदी स्कूल प्रकरण : अमायरा मामले की चार्जशीट में गंभीर जांचगत कमियों पर उठे सवाल, पीड़ित पिता एवं संयुक्त अभिभावक संघ ने निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की

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जयपुर। मानसरोवर स्थित नीरजा मोदी स्कूल में 9 वर्षीय छात्रा अमायरा की मृत्यु से जुड़े प्रकरण में पुलिस द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत चार्जशीट को लेकर पीड़ित पिता विजय मीणा एवं संयुक्त अभिभावक संघ ने कई गंभीर जांच संबंधी प्रश्न उठाए हैं। उनका कहना है कि चार्जशीट में अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त स्पष्टता दिखाई नहीं देती, जिनका उत्तर जांच एजेंसी द्वारा दिया जाना आवश्यक है।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 से जुड़ा है। उनका कहना है कि यदि इस धारा के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार अपराध गैर-जमानती श्रेणी में आता है, तो क्लास टीचर को पुलिस स्तर पर जमानत किस कानूनी प्रावधान, किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश तथा किन कारणों के आधार पर प्रदान की गई। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि धारा 75 के तीसरे प्रावधान की संभावित लागू होने की स्थिति की जांच क्यों नहीं की गई।

अमायरा के पिता विजय मीणा ने कहा कि घटना के समय कक्षा में लगभग 18 से 20 विद्यार्थी उपस्थित थे, जबकि चार्जशीट में केवल चार विद्यार्थियों के विस्तृत बयान ही दर्ज दिखाई देते हैं। ऐसे में शेष संभावित प्रत्यक्षदर्शी विद्यार्थियों के बयान क्यों नहीं लिए गए तथा उनकी स्वतंत्र गवाही को जांच का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि क्लास टीचर से घटना के संबंध में की गई विस्तृत पूछताछ, अंतिम कक्षा संवाद, अमायरा के बार-बार उनके पास आने के कारण, काउंसलर अथवा अभिभावकों को तत्काल सूचना नहीं देने तथा घटना की जानकारी मिलने के बाद भी उनके कक्षा में बने रहने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत रिकॉर्ड चार्जशीट में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है।

इसके अतिरिक्त विद्यालय की प्राचार्य, चेयरमैन एवं स्कूल प्रबंधन से संस्थागत जिम्मेदारियों—जैसे छात्र सुरक्षा व्यवस्था, काउंसलिंग प्रणाली, स्टाफ प्रशिक्षण, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, फ्लोर सुपरविजन तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था—को लेकर की गई विस्तृत पूछताछ भी चार्जशीट में स्पष्ट रूप से परिलक्षित नहीं होती। साथ ही घटना के दौरान कक्षा में मौजूद दूसरी शिक्षिका का विस्तृत बयान भी उपलब्ध नहीं दिखाई देता।

पीड़ित पक्ष ने डिजिटल स्लेट्स से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि यदि ये जांच के महत्वपूर्ण साक्ष्य थे, तो उनका विधिवत जब्ती मेमो, फोरेंसिक परीक्षण, एफएसएल को भेजे जाने संबंधी अभिलेख तथा तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट चार्जशीट में स्पष्ट रूप से उपलब्ध क्यों नहीं हैं।

संयुक्त अभिभावक संघ के राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि इस प्रकरण में प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य, साक्ष्य और संभावित गवाह की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक जांच होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न्याय प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने तथा पीड़ित परिवार का विश्वास कायम रखने के लिए जांच एजेंसी को उठाए गए सभी प्रश्नों पर स्पष्ट और तथ्यपरक उत्तर देना चाहिए। साथ ही यदि जांच में किसी प्रकार की कमी रह गई है तो उसका विधिसम्मत निराकरण किया जाना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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