
ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (इंडिया) – जीटीटीसीआई द्वारा कोपा, लाजपत नगर, नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस का भव्य एवं सांस्कृतिक आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न देशों के राजदूतों, राजनयिकों एवं विशिष्ट अतिथियों ने भाग लेकर चाय के माध्यम से वैश्विक मित्रता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं सद्भाव का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत जीटीटीसीआई के फाउंडर प्रेसिडेंट डॉ. गौरव गुप्ता के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने चाय को शांति, संवाद और अंतर्राष्ट्रीय मित्रता का प्रतीक बताते हुए सांस्कृतिक कूटनीति के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. डी.आर. कार्तिकेयन ने भी सभा को संबोधित किया और साझा परंपराओं के माध्यम से वैश्विक सौहार्द एवं सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
जीटीटीसीआई की चेयरपर्सन डॉ. रश्मि सलूजा ने अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस पर विशेष संबोधन देते हुए चाय के सांस्कृतिक, आर्थिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चाय विश्वभर में लोगों और देशों को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

कार्यक्रम में क्यूबा एवं किर्गिस्तान के राजदूतों की विशेष उपस्थिति रही, जबकि क्यूबा, चेक गणराज्य, मिस्र, इराक, केन्या, किर्गिस्तान, मंगोलिया, फिलीपींस, श्रीलंका, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, यूएन एस्कैप तथा वियतनाम के प्रतिनिधियों एवं गणमान्य अतिथियों ने भी भाग लिया और अपने-अपने देशों में चाय की परंपरा एवं महत्व पर विचार साझा किए। नेपाल के चार्ज डी’अफेयर्स (CDA) ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर चाय कूटनीति एवं सांस्कृतिक सहयोग पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विभिन्न देशों की विशेष चायों का अंतर्राष्ट्रीय टी टेस्टिंग अनुभव रहा। अतिथियों ने भारत की 4 से अधिक, श्रीलंका की 7 से अधिक तथा नेपाल की 4-5 विशेष चाय किस्मों का स्वाद लिया। इसके अतिरिक्त मिस्र, इराक एवं वियतनाम की विशेष चायों ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। विशेष रूप से श्रीलंका की चाय प्रदर्शनी को सभी उपस्थित अतिथियों द्वारा अत्यधिक सराहना एवं प्रशंसा प्राप्त हुई।
कार्यक्रम के समापन पर राजदूतों एवं राजनयिकों को अंतर्राष्ट्रीय मित्रता, सांस्कृतिक समझ एवं वैश्विक सहयोग को सशक्त बनाने में उनके योगदान हेतु सम्मानित भी किया गया। जीटीटीसीआई का यह आयोजन वैश्विक सहभागिता, सांस्कृतिक कूटनीति एवं सार्थक अंतर्राष्ट्रीय संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

