दिव्यांग को नहीं चाहिए दया उन्हें चाहिए सहयोगऔऱ प्यार :सैनिक संस्था।

दिव्यांग दया नहीं प्रतिनिधित्व चाहते हैं – राष्ट्रिय सैनिक संस्था का दिव्यांग विंग

16 नवम्बर 2025 , 133 बी मोडल टाउन ईस्ट , गाज़ियाबाद , मुख्यालय राष्ट्रिय सैनिक संस्था – आज यहाँ राष्ट्रिय सैनिक संस्था के दिव्यांग विंग की एक ऑनलाइन जूम बैठक आयोजित की गई | बैठक की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रिय सैनिक संस्था के राष्ट्रिय अध्यक्ष वीर चक्र प्राप्त कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने कहा की दिव्यांगो के सम्बन्ध में संयुक्त राष्ट्र के निर्देशों के अनुसार पुराना दिव्यांग एक्ट बदला गया था और 2016 में RPWD एक्ट बनाया गया था | ( Rights of Persons with Disability ) इस एक्ट में देख भाल और दया की भावना को हटाकर दिव्यांगो को अधिकार देने की बात कही गई है | भारतीय संविधान के Preamble में प्रारम्भ में ही लिखा गया है Fraternity with Dignity of Individual | संविधान की धारा 21 में सबको जीने का अधिकार दिया गया है | लिहाजा अब दिव्यंगो को दया नहीं बल्कि Dignity के साथ प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है |
वर्ल्ड योग चैम्पियन , सुप्रीम कोर्ट के अभिवक्ता और राष्ट्रिय सैनिक संस्था के दिव्यांग विंग के राष्ट्रिय संयोजक तेजस्वी कुमार शर्मा ने कहा की संसद में जिन सांसदों को मनोनीत किया जाता है उनमे से कम से कम एक तो दिव्यांग होना चाहिए क्योंकि दिव्यांगो की संख्या 2011 के सेंसर के अनुसार करीब ढाई करोड़ है जबकि वर्ल्ड बैंक के अनुसार यह संख्या वर्तमान में 5 करोड़ से भी ज्यादा है |

राष्ट्रिय सैनिक संस्था के दिव्यांग विंग के राष्ट्रिय सह संयोजक रिशांक छिब्बर ने मांग की कि नीतियाँ एक जैसी होनी चाहिए | असंतोष और विद्रोह दुभांत यानी नीतियों के दोगुलेपन से पनपता है | कही विकलांगो को 500 रूपये पेंशन है और कही 5 हजार | इन्हें एक समान किया जाना चाहिए |

दिव्यांग विंग की गाज़ियाबाद इकाई की जिला अध्यक्षा श्रीमती नमिता भल्ला ने कहा की बेशक मेरी टाँगे कटी हुई है लेकिन में बोल सकती हूँ , लिख सकती हूँ और नए विचार भी दे सकती हूँ | मेरी मांग है की प्रत्येक नगर निगम से लेकर प्रत्येक विधान परिषद् में कम से कम एक दिव्यांग को मनोनीत किया जाये |

राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्र के संयोजक श्री राजीव जोली खोसला और दिल्ली प्रदेश की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्षा श्रीमती उर्वशी वालिया ने कहा की किसी देश की पहचान उसके संसाधनो से अधिक इस बात से होती है की वहां के लोग अपने दिव्यांगो और शहीदों के परिवारों का कितना ख्याल रखते है |

इस सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित अधिकारियों को पत्र लिखा जायेगा |

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