
दिल्ली के गृह मंत्री श्री आशीष सूद का 18 मार्च 2026 को दिल्ली के पालम इलाके में एक मकान में लगी आग की दुर्घटना के संबंध में आज दिल्ली विधानसभा में दिया गया वक्तव्य।
अध्यक्ष जी आपने दिल्ली के एक बहुत ही ज्वलंत, बहुत ही महत्वपूर्ण और दुखदायी विषय पर मुझे अपना बात कहने का और माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी के नेतृत्व में जो दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर के हर सेगमेंट में हो रहे विकास और जिस प्रकार से दृढ़ प्रशासनिक कदमों से मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार आगे बढ़ रही है, वो विषय यहां सदन में रखने का अवसर दिया।

मैं आग की घटना पर गहरा दुख व्यक्त करता हूँ। इस घटना में जिन लोगों की जान गई है, उनकी सद्गति की प्रार्थना करता हूँ और जिन लोगों ने अपने नियर एंड डियर को, अपने परिजनों को खोया है, उनके साथ मैं इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा हूँ, मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में पूरी सरकार उनके साथ खड़ी है।
इससे पहले कि मैं इस घटनाक्रम पर क्रमबद्ध तरीके से अपनी बात कहूँ, मैं यहाँ सदन के पटल पर इस बात को बहुत जिम्मेदारी के साथ रखना चाहता हूँ कि जिस दिन वो घटना घटी, पूरी सरकार पूरी जिम्मेदारी के साथ उस घटना के पीड़ितों के साथ रही।

घटना की रिपोर्ट आते ही 2 घंटे से भी कम समय में माननीय मुख्यमंत्री जी ने मजिस्ट्रियल इन्क्वायरी की बात कही, मृतकों के लिए, घायलों के लिए एक्स-ग्रेशिया की घोषणा की गई। पोस्टमार्टम समय पर हो, उनके परिजनों को उनके शव मिल जाएँ, इन सबके लिए मुख्यमंत्री जी स्वयं और उन्होंने मुझे और बाकी लोगों को निर्देश दिया। हम सब उस विषय में जागरूकता के साथ काम कर रहे थे, परिवार के दुख की घड़ी में उनके साथ थे।
मैं स्वयं लगभग डेढ़-पौने दो घंटे तक मंगलापुरी श्मशान में मृतक परिवार के साथ उनका दुख साझा करने के लिए मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर वहाँ था।
सबसे ज्यादा पीड़ा आदरणीय अध्यक्ष जी तब होती है, जब जान जाने पर लाशों के ऊपर राजनीति करने का प्रयास किया जाए। गिद्ध राजनीति की जाती है, वल्चर पॉलिटिक्स की जाती है, सबसे ज्यादा दुखदायी वो क्षण होता है।
आदरणीय अध्यक्ष जी, इस संदर्भ में पुलिस की जाँच चल रही है, फायर की जाँच चल रही है और उस पूरे घटनाक्रम में मैं आपके सामने कुछ तथ्य भी पढ़ूँगा। मगर उससे पहले, जैसा आपने कहा, इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होने वाली है और विपक्ष बाहर है। ये उनके एटीट्यूड को दिखाता है। उन्हें मालूम था कि यहाँ पर जब चर्चा होगी तो विपक्ष के पिछले 11 साल का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार भी उघड़कर सामने आएगा। इसलिए उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार न करते हुए सदन से बाहर रहना ही उपयुक्त समझा।

जनवरी 2018 में बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में बहुत बड़ी आग लगी, 17 लोगों की जान गई। उस समय की सरकार ने इसकी जिम्मेदारी एमसीडी के लाइसेंसिंग विभाग पर डाल दी, ये कहा कि ये आग लाइसेंसिंग विभाग के कारण लगी है। उस समय एमसीडी में भाजपा थी।
उसके बाद फरवरी 2019 में, लगभग शायद 12 फरवरी 2019 को अर्पित होटल करोल बाग में आग लगी । फिर 17 लोगों की मौत हुई और एनओसी प्रक्रिया में व्याप्त भ्रष्टाचार है, ऐसा कहकर एमसीडी पर आरोप लगाकर उस जिम्मेदारी से उस समय की सरकार ने बचने का प्रयास किया।
अनाज मंडी में 2019 में आग लगी, 43 लोगों की जान गई। कहा गया ‘स्पेशल एरिया रीडेवलपमेंट प्लान’ नहीं बनाया गया था इसलिए आग लग गई। मई 2022 में मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया में आग लगी। 27 लोगों की जान गई। यहाँ सामने अगर नेता प्रतिपक्ष बैठी होतीं तो मैं उन्हें याद दिलाता। नेता प्रतिपक्ष जी ने और आम आदमी पार्टी के विधायक और नेता दुर्गेश पाठक ने ये कहा कि ये बिल्डिंग बीजेपी के नेता की है, आग लग गई, बीजेपी जिम्मेदार है। इस आग की 27 लोगों की मौत का ज़िम्मा लेने से दिल्ली की सरकार ने पॉलिटिक्स खेलने की तरफ देखा।
अध्यक्ष जी, हम वल्चर पॉलिटिक्स नहीं खेलते हैं। हम में से किसी ने ये नहीं कहा की वो बिल्डिंग आम आदमी पार्टी के नेता की है।
फायर ने जो अपनी पहली रिपोर्ट दी, अध्यक्ष जी, मैं पढ़ता हूँ आपके सामने: ‘Only one single staircase from the ground to terrace floor, which was not accessible from outside due to the intense heat, smoke and flames. As well, the material involved such as’—मैं माननीय सदस्यों का ध्यान चाहता हूँ और आपके माध्यम से दिल्ली की जनता को बताना चाहता हूँ—’smokes and flames as well as the material involved such as garments, cosmetic, thinner, nail polish, perfume which was highly inflammable.’
उस बिल्डिंग की बेसमेंट में हाईली इन्फ्लेमेबल मटेरियल सेव्ड था। मकान के अंदर से सीढ़ी ऊपर गई हुई थी, कोई बाहर से सीढ़ी नहीं थी। इलेक्ट्रॉनिक शटर था, आग लगने के बाद इलेक्ट्रॉनिक शटर उठा नहीं।
अध्यक्ष जी दिल्ली सरकार में किसी ने ये ब्लेम पॉलिटिक्स करने की कोशिश नहीं की। मुख्यमंत्री जी ने तुरंत पहले दो घंटे के अंदर मजिस्ट्रियल इंक्वायरी की घोषणा की। एक्स-ग्रेशिया की घोषणा की। हमने नहीं कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता की बेसमेंट में इन्फ्लेमेबल मटेरियल था। ये पासिंग द बक करने का तरीका है, ये एटीट्यूड आम आदमी पार्टी की सरकार में चलता होगा। श्रीमती रेखा गुप्ता जी की सरकार में आगे से जिम्मेदारी लेकर हम अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हैं।
‘Mundka fire: AAP blames illegal construction’। अलीपुर की पेंट फैक्ट्री में आग लगी। नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन को टिप्पणी करनी पड़ी। मगर इस बार बड़ी अजीब घटना हुई। दिल्ली की सरकार ने नगर निगम को दोषी नहीं बताया साहब। उन्होंने अभी कंपनसेशन भी नहीं दिया। क्योंकि नगर निगम में आम आदमी पार्टी की मेयर थीं। इसलिए उसके संदर्भ में आम आदमी पार्टी ने, उस सरकार ने कोई टिप्पणी नहीं की। और ईस्ट दिल्ली के चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में आग लगी, बच्चे जलकर मर गए। बच्चे जलकर मर गए।
अध्यक्ष जी, आपके सामने ये सब बातें मैंने इसलिए बताई हैं कि ये पिछली सरकार का और आज जो इससे नजर चुराकर भाग रहे हैं, उनके दृष्टिकोण को दिखलाता है और उनके कृत्यों को दिखलाता है।
सारी दिल्ली जानती है, सारा देश जानता है, शहर आगे बढ़ रहा है। शहर में आबादी बढ़ रही है। मिक्स लैंड यूज एरिया है, फायर के नियम उस रेजिडेंशियल एरिया में लागू नहीं होते हैं। 11 साल लग गए, किसी ने उन नियमों के बारे में परिवर्तन करने का, फायर ब्रिगेड के काम को, फायर फाइटिंग के काम को, प्रिकॉशनरी कामों के लिए कोई चर्चा दिल्ली के सदन में नहीं हुई, कुछ भी कार्यवाही इसमें नहीं हुई।
और तो और अध्यक्ष जी, आपको ये जानकर हैरानी होगी, सबको पता है आबादी का घनत्व बढ़ रहा है अनऑथोराइज्ड कॉलोनियाँ बनी हुई हैं, उनका रेगुलराइजेशन पिछली सरकारों ने किया नहीं। उनके अंदर जाने के लिए फायर ब्रिगेड्स की कमी है, फायर टेंडर उसमें जा नहीं सकता है। कोई ऐसी व्यवस्था पिछले 11 सालों में खड़ी करने का प्रयास नहीं किया गया जिससे उनको सुदृढ़ किया जाना था।
अध्यक्ष जी मैं वआपको बताना चाहता हूँ। 15-16 में, जब आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में बनी, तो केवल 4 करोड़ 72 लाख रुपये दिल्ली की फायर ब्रिगेड के कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी कोई इक्विपमेंट खरीदने के लिए, कोई फायर टेंडर खरीदने के लिए, पाइप खरीदने के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए दिए गए थे। 16-17 में केवल 8 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 21-22 में केवल 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 18-19 में 5 करोड़ रुपये। इतने कम कैपिटल एक्सपेंडिचर के साथ दिल्ली की फायर व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा था।
और जो आज पासिंग द बक और पासिंग द ब्लेम करने का काम कर रहे हैं, उसके विपरीत, इस वर्ष हमारी सरकार ने, मुख्यमंत्री जी ने दिल्ली फायर सर्विस के मॉडर्नाइजेशन के लिए 180 करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रावधान किया है और 180 करोड़ में से काफी सारा पैसा अभी तक खर्च भी किया जा चुका है। नए फायर टेंडर लेने के लिए, नई मशीनें लेने के लिए, फायर को बढ़िया इक्विपमेंट दिलाने के लिए, इन सब चीजों के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर में लगातार सरकार निवेश कर रही है, आगे बढ़ाने का काम कर रही है।
अध्यक्ष जी, सबसे बड़ी बात मैं आपके समक्ष ये रखना चाहता हूँ। ये जितनी फायर की घटना मैंने आपके सामने पढ़ी है 16 में नरेला में, 17 में आनंद पर्वत पे, 18 में बवाना में, 19 में अर्पित होटल करोल बाग, फिर 19 में अनाज मंडी सदर बाजार, 20 में उद्योग विहार, 22 में मुंडका और 24 में बेबी केयर हॉस्पिटल विवेक विहार इसमें से केवल 19 में अर्पित होटल पर और 22 में मुंडका पर मजिस्ट्रियल इंक्वायरी ऑर्डर हुई और 22 की मजिस्ट्रियल इंक्वायरी कहाँ है, फायर के पास उसकी क्या फाइंडिंग है, आज तक उस सरकार ने उपलब्ध नहीं कराया।
आदरणीय अध्यक्ष जी आपको मैं दो बातें और बताना चाहता हूँ। कैपिटल एक्सपेंडिचर और सरकार की जिम्मेदारी फायर ब्रिगेड को मजबूत करने की मैंने आपके समक्ष रखी है।
अध्यक्ष जी, आपको जानकर हैरानी होगी की 1969 में दिल्ली फायर सर्विस को एक वायरलेस सेवा दी गई थी आपस में कम्युनिकेशन के लिए। आज उसकी स्थिति क्या है? आज एक वायरलेस पर आग लगने के बाद वायरलेस पर फायर इंजन को निकाल दिया जाता है। उसके बाद फायर इंजन वहाँ से निकला और फायर के स्थान तक जा रहा है, कोई वायरलेस कम्युनिकेशन नहीं है। फायर के स्थान पर पहुँच गया, वहाँ उसको कुछ और चाहिए तो वापस जाने के लिए कोई वायरलेस कम्युनिकेशन नहीं है। अपने फोन से कम्युनिकेशन की कोशिश करते हैं। आग बुझाते समय फोन गीले हो जाते हैं, संपर्क नहीं होता।
11 साल लग गए इस सरकार को आग बुझाने के लिए फायर को एक वायरलेस का इंटरनल कम्युनिकेशन नेटवर्क नहीं दे पाए। ये मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी की सरकार है, जिसने पिछले 6 महीने में आगे बढ़कर प्रयासपूर्वक उसको नए फायर ब्रिगेड को नया कमांड सेंटर और नया कम्युनिकेशन नेटवर्क देने का काम किया।
अध्यक्ष जी, सबसे बड़ा दुर्भाग्य इस बात का है आप सबने सुना है।ब्रोंटो स्काई लिफ्ट नहीं चली। अध्यक्ष जी, आपके मार्फत से मैं दिल्ली की जनता को बताना चाहता हूँ। 2019 में जब फरवरी में करोल बाग में फायर हुआ, तो एक इंटरनल कमेटी बनी। उस इंटरनल कमेटी ने जाँच करके ये जानकारी देनी थी, ये सुझाव देने थे कि कैसे फायर ब्रिगेड को मॉडर्नाइज किया जाए।
अध्यक्ष जी 2019 की फायर के बाद 18.2.2020 को उसकी रिकमेंडेशन आई। रिकमेंडेशन में तीन फेज में पहले फेज में 252 करोड़, दूसरे फेज में 165 करोड़ और तीसरे फेज में 208 करोड़ रुपये की मशीनें खरीदी जाएँ, मॉडर्नाइजेशन किया जाए। पहले फेज के 252 करोड़ रुपये के लिए मेट्रो के साथ संपर्क साधा गया। ये ब्रोंटो मशीन खरीदने के लिए बात की गई। ब्रोंटो कंपनी का नाम है स्काई लिफ्ट है, ब्रोंटो एक विदेशी कंपनी है। ब्रोंटो कंपनी की लिफ्ट खरीदने की रिकमेंडेशन हुई और डीएमआरसी को उसके लिए नियुक्त किया गया।
और अध्यक्ष जी उस कागज पर तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन के साइन हैं। तीन साल बाद मंत्री ने 197 करोड़ दिए। बात यहीं नहीं रुकी अध्यक्ष जी, 197 करोड़ देने के बाद यूरो और भारत के रुपये में करेंसी का चेंज आ गया, करेंसी के एक्सचेंज रेट में डिफरेंस आ गया। 2025 फरवरी में सरकार चली गई, मगर ब्रोंटो मशीन के लिए सरकार उस एक्सचेंज रेट के डिफरेंस को भी पूरा नहीं कर पाई, इसलिए ब्रोंटो मशीन नहीं आई।
बाद में सरकार को आने के बाद मॉडर्नाइजेशन करने के लिए सरकार को उसी एनजीटी से हमें परमिशन हुई। उसको चेसिस बदलकर ब्रोंटो मशीन नई चेसिस पर लगाई और चल रहा है उसका समाधान।
अध्यक्ष जी कहा जा रहा ही की आज ब्रोंटो मशीन नहीं चल रही, अरे भाई! बेरोजगार नेताओं, तुम्हारे कारण ब्रोंटो मशीन 5 साल 2019 से 2025 फरवरी—6 साल में ब्रोंटो मशीन नहीं खरीदी गई। सरकार की रिपोर्ट तीन हिस्सों में पैसा खर्चने की, ब्रोंटो मशीन नहीं खरीदी गई।
फायर विभाग ऐसा विभाग है जिसमें रोज बहुत सारे कदम उठाने पड़ते हैं मॉडर्नाइजेशन के लिए। पहले साल में हमारे आते ही बजट बना। हमने तुरंत कैपिटल एक्सपेंडिचर उसमें बढ़ाया। बहुत सारी मशीनरी का टेस्ट की गई और उसकी खरीद का काम अभी आगे चल रहा है।
मैं अध्यक्ष जी, अंत में ये बताना चाहता हूँ। ये तो हुआ पिछले सालों में, मगर इस एक साल के अल्पकाल में, फायर को मॉडर्नाइज करने के लिए और दिल्ली को आग जैसी दुर्घटना से बचाने के लिए श्रीमती रेखा गुप्ता जी की सरकार ने कई काम किये हैं।
अध्यक्ष जी हम किसी पर दोष नहीं दे रहे हैं। हम मृतक परिवार के साथ हैं। हम में से कोई ये नहीं कहने जा रहा है, जैसा मुंडका के फायर में कह दिया कि बीजेपी के नेता की बिल्डिंग थी, जो कभी साबित नहीं हुआ। ये डिक्लेयर्ड आम आदमी पार्टी का नेता है, जिसकी बेसमेंट में ज्वलनशील मटेरियल था। हम ये पासिंग द बक नहीं कर रहे हैं। हम नहीं कह रहे हैं। हम मृतक परिवार के साथ हैं। हम तो केवल उस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े हैं।
अध्यक्ष जी एक ओर ये ब्रोंटो मशीन जिसके ऊपर ये 6 साल तक बैठे रहे मॉडर्नाइजेशन के लिए। मैंने बताया एक वर्ष में 5 करोड़ का कैपेक्स, एक वर्ष में 3 करोड़ का कैपेक्स, एक वर्ष में 18 करोड़ का कैपेक्स, 2 करोड़ से ऊपर की फायर की आबादी, जो पुराने सेंसस के आधार पर है। अनऑथोराइज्ड कॉलोनी में रात को कोई दुर्घटना घट जाए तो फायर इंजन नहीं घुस सकता।
अध्यक्ष जी मैं आपको बताता हूँ हमारी सरकार ने फायर डिपार्टमेंट में क्या-क्या किया। मगर उससे पहले अध्यक्ष जी, ये जो दुष्प्रचार है उसके बारे में… पिछले पाँच-सात दिन में किस प्रकार से रिपोर्ट किया गया है। ‘Short circuit, stockpiles and a fatal trap upstairs’, ‘How fire turned Delhi building into a death trap’, ‘Garments, cosmetics fueled blaze’—यह मेरी या सरकार की रिपोर्ट नहीं है बल्कि यह अग्रणी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया की हेडलाइन है। टाइम्स ऑफ इंडिया: ‘The blaze broke out around 7 AM at a four-storeyed building at WZ block of Ram Chowk market and quickly engulfed the structure, fed by large stockpiles of garments, cosmetic items stored in the lower floor, the basement, ground and the first floor housed a cloth and a cosmetic showroom while the family lived on the second floor.’
फिर से मैं अखबार को उद्धृत कर रहा हूँ—’Initial probe suggested a short circuit, possibly linked to the electrical fault such as running water motor may have sparked the fire.’ पुलिस… पुलिस को आग लगने का सटीक कारण मिल सकता है, जो जाँच के अधीन है।
अध्यक्ष जी हिंदी मीडिया ने बताया की 30 दमकल गाड़ियाँ तैनात की गईं। उन्होंने डिप्टी फायर ऑफिसर के उस बयान को प्रमुखता दी जिसमें कहा गया साद नगर की संकरी गलियों के बावजूद विभाग भीषण गर्मी और धुएँ के बीच ऊपरी मंजिल से नौ लोगों को बाहर निकालने में सफल रहा।
अध्यक्ष जी एक सक्रिय प्रो-एक्टिव रूप के रूप में अनुग्रह राशि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा तत्काल वित्तीय घोषणाओं, वयस्कों के लिए 10 लाख और नाबालिगों के लिए 5 लाख की गई। ये सब चीजें इंडिपेंडेंटली दिल्ली के मीडिया ने रिपोर्ट की हैं।
माननीय अध्यक्ष जी ये पिछले 11 साल जो कुशासन के 11 साल हैं, जिसमें हर घटना पर दूसरे पर जिम्मेदारी डालने का काम किया, मृतकों की जान को नजरअंदाज करते हुए यहाँ तक कह दिया गया कि ये बिल्डिंग बीजेपी वाले की है, आग लग गई तो हम क्या करें! 27 लोगों की, 43 लोगों की जान जाने के कहा की हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
अध्यक्ष जी एक साल के अल्पकाल में हम 20 फरवरी को सरकार में आए थे, मार्च में हमने बजट प्रस्तुत कर दिया था। चीजों में सुधार बड़ी-बड़ी घोषणाओं से, अखबारों में विज्ञापन से नहीं, दीर्घकालिक प्रशासनिक उपायों से आता है। और जो मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में लिए गए।
अध्यक्ष जी मैं आपको ये बताना चाहता हूँ दिल्ली फायर सर्विस ने मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस के साथ परामर्श कर फायर सर्विस के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को शुरू किया है।
दूसरा, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के रिन्यूअल को पूरी तरह ऑनलाइन किया गया है जिससे ट्रांसपेरेंसी बढ़े, भ्रष्टाचार खत्म हो और एफिशिएंसी बढ़े।
इंस्पेक्शन सिस्टम को ट्रांसपेरेंसी लाने के लिए थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन की प्रक्रिया को शुरू किया जा रहा है। डी-रेगुलेशन के अंतर्गत ऐसे सब बंधक प्रावधानों को मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में दिल्ली की सरकार कम करती जा रही है ताकि दिल्ली की जनता को हम ज्यादा से ज्यादा राहत दे सकें।
50 क्विक रिस्पांस व्हीकल्स तैनात किए जा चुके हैं और 50 बहुत जल्दी तैनात हो जाएँगे। सरकार बनते ही पहले फायर सर्विस के रिव्यू में हमारी सरकार ने मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में इस बात की गंभीरता को समझा कि छोटी गलियों में फायर इंजन जाने में कठिनाई आती है। तो छोटी गाड़ियाँ हायर करके उन गली-मोहल्लों में चिह्नित स्थानों पर खड़ा किया जाए जहाँ से किसी दुर्घटना की संभावना में तुरंत वो वहाँ जा सकें। वो ओपन एरिया में उन कॉलोनियों के बाहर खड़ी होंगी। आने वाले समय में हमने हमारे विभाग ने मुख्यमंत्री जी के समक्ष आने वाली रिक्वायरमेंट बजट के लिए प्रस्तुत की है। और सरकार अपने सीमित साधनों में भी दिल्ली की जनता की सुरक्षा के लिए सरकार आने वाले समय में भी बजट में भी बड़े कदम उठाने वाली है।
अध्यक्ष जी पिछली सरकार ने वायरलेस नेटवर्क खत्म कर दिया था। वायरलेस नेटवर्क खत्म करने के बाद आज हमारी सरकार ने उस वायरलेस नेटवर्क की रीवैम्पिंग के लिए पूरा प्रोसेस शुरू कर दिया है। यूएचएफ से वीएचएफ पे ट्रांसफर करते हुए जो नेटवर्क 1969 की टेक्नोलॉजी पर चल रहा था उसको यूएचएफ से वीएचएफ पर लाते हुए नए आधुनिक तरीके से फायर की जो इंटरनल कम्युनिकेशन को बढ़ाया जा रहा है।
अध्यक्ष जी साथ ही अत्याधुनिक कमांड और कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया को भी बढ़ाया जा रहा है। मॉडर्नाइज इक्विपमेंट के साथ एक नए कमांड सेंटर को सरकार बहुत जल्दी स्थापित करने जा रही है।
अध्यक्ष जी पिछली सरकार ने आग के मामले में केवल एक 2019 की कमेटी बनाई थी। मुख्यमंत्री जी ने तुरंत अभी एक मजिस्ट्रियल इंक्वायरी की है और हमने इस बात की गंभीरता को समझते हुए दिल्ली के फायर सेफ्टी रूल्स रेजिडेंशियल इलाकों में लागू नहीं हैं। हमने उसके संदर्भ में भी एक थर्ड पार्टी ऑडिट दिल्ली की हर एस्टेब्लिशमेंट का हमने उसका आरएफपी फ्लोट कर दिया है तुरंत प्रभाव से। दिल्ली सरकार के फायर विभाग के पास अपने सीमित साधन हैं, एक थर्ड पार्टी के साथ रेजिडेंशियल काम में होने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठानों को कम से कम जब तक कानूनों में परिवर्तन नहीं होगा, उनको हम एडवाइजरी और सुरक्षा के बारे में पूरी जानकारी दे सकते हैं। एक बड़ा प्रयास, भगीरथी प्रयास मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में फायर ब्रिगेड करने जा रही है।
अध्यक्ष महोदय, मैं अत्यंत जिम्मेदारी के साथ यह कहना चाहता हूँ कि आपने जिस अपेक्षा के साथ सामने की बेंच पर बैठे सदस्यों को यहाँ उपस्थित होकर दिल्ली की सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर सार्थक चर्चा करने का अवसर दिया, दुर्भाग्यवश उन्होंने उस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया। इसके विपरीत, सदन के बाहर रहकर अपनी पुरानी आदत के अनुरूप ‘बिलो द बेल्ट’ और तुच्छ स्तर की हरकतों में संलग्न रहे। अपनी बातों का जवाब देने से बचने के लिए वे सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर माननीय मुख्यमंत्री जी के विरुद्ध व्यक्तिगत और अशोभनीय टिप्पणियाँ करते हैं—जो अत्यंत निंदनीय है।
अध्यक्ष महोदय, सच्चाई यह है कि आज उनकी जमीन खिसक चुकी है। किसी गंभीर मुद्दे पर वे हजार लोगों को भी एकत्र नहीं कर पाते, इसलिए गाली-गलौज और अटेंशन सीकिंग के माध्यम से सोशल मीडिया पर ट्रैक्शन पाने की कोशिश करते हैं। वे यह दिखाने का प्रयास करते हैं कि मानो उन्होंने ‘सर पर कफन बाँध लिया है’, जबकि वास्तविकता यह है कि यदि उन्हें मिले 11 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने ईमानदारी से जनता की सेवा की होती, तो आज इस प्रकार के नाटक करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
अध्यक्ष महोदय, मैं इस सदन के माध्यम से, एक जिम्मेदार सरकार के प्रतिनिधि के रूप में, दिल्ली की जनता को यह आश्वस्त करना चाहता हूँ कि माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने इस दुखद घटना में पीड़ित परिवार के साथ पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ खड़े होकर कार्य किया है। हमने इस विषय पर किसी भी प्रकार की राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास नहीं किया और न ही जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया।
अध्यक्ष महोदय, मैं दिल्ली की जनता को यह विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में हमारी सरकार केवल आग लगने पर उसे बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि फायर सेफ्टी के क्षेत्र में व्यापक सुधार और निवारक उपायों (Preventive Measures) को सुदृढ़ करने की दिशा में तीव्र गति से कार्य कर रही है। फायर सर्विस के आधुनिकीकरण के साथ-साथ, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाए जा रहे हैं।
अध्यक्ष जी प्रशासनिक सुधारों में समय अवश्य लगता है, लेकिन मैं इस पवित्र सदन में खड़े होकर पूर्ण जिम्मेदारी के साथ यह विश्वास दिलाता हूँ कि आगामी एक से डेढ़ वर्ष में दिल्ली की फायर सेफ्टी व्यवस्था में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा।

