
“सीस दीआ पर सिररू न दीआ” साइकिल यात्रा दिल्ली से हुई रवाना
सिखों में धर्मांतरण, नशे और फैशन परस्ती ने अपनी जगह बनाई: जी.के.
नई दिल्ली (15 नवंबर, 2025) श्री गुरू तेग बहादर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में “सीस दीआ पर सिररू न दीआ” साइकिल यात्रा आज श्री अखंड पाठ साहिब के समापन के बाद दिल्ली के गुरुद्वारा सीसगंज साहिब से शुरू हुई। गुरुद्वारा सीसगंज साहिब में 1675 ई. में गुरू तेग बहादर साहिब जी और उनके प्रिय सिखों भाई मति दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी को धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के अपराध में तत्कालीन मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर शहीद किया गया था। यह साइकिल यात्रा 20 नवंबर को गुरू तेग बहादर साहिब जी की जन्म स्थली अमृतसर के गुरुद्वारा गुरू के महल में समाप्त होगी। इस अनूठी और ऐतिहासिक साइकिल यात्रा का आयोजन साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने किया है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गुरू तेग बहादर साहिब जी की शहादत, करुणा, निडरता और निडरता की विरासत का प्रचार-प्रसार करना है। साथ ही, वर्तमान समय में सिखों के सामने धार्मिक पहचान, धर्मांतरण, धार्मिक वेशभूषा, नशे और जातीय सफाए जैसे खड़े खतरों के बारे में जागरूकता पैदा करना और समाज में शारीरिक व्यायाम, स्वास्थ्य देखभाल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना है। इस अवसर पर शिरोमणी अकाली दल, दिल्ली इकाई के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना, वरिष्ठ वकील हरविंदर सिंह फुल्का, वरिष्ठ अकाली नेता कुलदीप सिंह भोगल, कश्मीरी पंडितों के संगठनों के प्रतिनिधियों सहित दिल्ली कमेटी के कई सदस्य और अन्य लोगों ने 500 किलोमीटर की इस यात्रा को चलें साइकिल चालकों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

इस यात्रा के मुख्य उद्देश्य की जानकारी देते हुए मनजीत सिंह जी.के. ने कहा कि गुरू तेग बहादर साहिब जी ने दूसरों के धर्म की रक्षा की थी। लेकिन आज सिखों में धर्मांतरण, नशे और फैशन परस्ती ने अपनी जगह बना ली है। गुरू साहिबानों ने हमें शारीरिक तंदुरुस्ती के लिए नशों से दूर करके मल्ल अखाड़ों और गतका अखाड़े से जोड़ा था। गुरूओं ने हमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था, लेकिन आज दिल्ली के मंत्री पंजाब के किसानों द्वारा जलाई जा रही पराली को दिल्ली के प्रदूषण का कारण बता रहे हैं। जबकि एक अध्ययन के अनुसार, दिल्ली के प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी केवल 1.5 प्रतिशत है। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पाकिस्तान के किसान भी पराली जला रहे हैं, लेकिन केवल पंजाब के किसानों को ही दोषी ठहराया जा रहा है। मनजीत सिंह जी.के. ने बैटरी चालित व्हीलचेयर के साथ इस यात्रा में एक विकलांग सिख युवक के द्वारा भागीदारी करने की सराहना की। मनजीत सिंह जी.के. ने कहा कि दिल्ली के प्रदूषण के मामले में भारत या पाकिस्तान के किसानों को खलनायक बनाने के बजाय, हमें उन्हें अन्नदाता के रूप में सम्मान देना चाहिए। अगर हिम्मत है, तो सरकार अंबानी-अडानी की प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों की ओर कदम बढ़ाए।
अकाली नेता परमजीत सिंह सरना ने जहां मनजीत सिंह जीके को इस साइकिल यात्रा के लिए बधाई दी वहीं उन्होंने यात्रा में पर्याप्त सहयोग न देने के लिए दिल्ली कमेटी के प्रबंधकों और मुख्य ग्रंथियों की भी खिंचाई की। परमजीत सिंह सरना ने कहा कि दिल्ली कमेटी के प्रबंधकों की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है। क्योंकि प्रबंधकों ने यहां आकर साइकिल चालकों को एक फूलों का हार देने की हिम्मत भी नहीं दिखाई और न ही मुख्य ग्रंथियों ने यहां आकर अरदास करने की हिम्मत दिखाई है। जो ग्रंथी अध्यक्ष और महासचिव के आदेश के बिना अरदास करने नहीं आ सकते, क्या वो ग्रंथी कहलवाने के हकदार हैं? हरविंदर सिंह फुल्का ने 67 साल की उम्र में 500 किलोमीटर की साइकिल यात्रा का नेतृत्व करने के मनजीत सिंह जीके के दृढ़ संकल्प और साहस के लिए उन्हें बधाई दी। दिल्ली कमेटी सदस्य परमजीत सिंह राणा और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. परमिंदर पाल सिंह ने इस अवसर पर मंच संचालन किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी, वर्तमान दिल्ली कमेटी सदस्य करतार सिंह विक्की चावला, सतनाम सिंह खालसा, महिंदर सिंह, जतिंदर सिंह सोनू सहित अनेक पूर्व कमेटी सदस्य तथा मनजीत सिंह जी.के. के परिवार के सदस्य तथा सैकड़ों शुभचिंतक उपस्थित थे।
