
1923 से परंपरा की मिठास, अब वैश्विक पहचान की ओर
उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान केवल उसके इतिहास और कला में ही नहीं, बल्कि उसके पारंपरिक स्वाद में भी बसती है। कलावती गट्टे कन्नौज की उस मिट्टी की देन है, जहाँ सुगंध केवल इत्र में ही नहीं, बल्कि हर पारंपरिक व्यंजन में भी बसती है।कन्नौज के कलावती गट्टों ने एक शताब्दी से अधिक समय तक अपनी विशिष्ट मिठास, शुद्धता और पारंपरिक निर्माण शैली के बल पर लोगों के दिलों में स्थान बनाया है। आज यह केवल कन्नौज की प्रसिद्ध मिठाई नहीं, बल्कि एक जनपद एक व्यंजन(ODOC) और उत्तर प्रदेश इन्टरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2026 के माध्यम से उत्तर प्रदेश की खाद्य विरासत का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रेरक सफलता की कहानी बन चुकी है।

वर्ष 1923 में स्थापित कलावती गट्टा भंडार ने उस समय एक ऐसी परंपरा की नींव रखी, जो आज चार पीढ़ियों के बाद भी उसी आत्मीयता और गुणवत्ता के साथ आगे बढ़ रही है। बदलते दौर में जहाँ अनेक पारंपरिक व्यंजन समय के साथ विलुप्त हो गए, वहीं कलावती गट्टे ने अपनी मौलिक पहचान और पारंपरिक विधि को सहेजकर रखा।यही निरंतरता इसे केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि कन्नौज की जीवित सांस्कृतिक धरोहर बनाती है।

कलावती गट्टे की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उत्कृष्ट गुणवत्ता और वर्षों पुरानी पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया है। प्रत्येक गट्टा उसी सावधानी और कौशल से तैयार किया जाता है, जिसने इसे स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशभर से आने वाले यात्रियों की पहली पसंद बनाया है।
त्योहारों की मिठास हो, पारिवारिक समारोह, अतिथियों का स्वागत या किसी शुभ अवसर का प्रसाद—कलावती गट्टे हर उत्सव का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। यही कारण है कि यह मिठाई केवल स्वाद नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपराओं का भी प्रतीक है।

“कलावती गट्टा हमारे परिवार के लिए केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि हमारी परदादी स्वर्गीय पूजनीय माता कलावती जी की दूरदर्शिता और साहस की विरासत है। वर्ष 1923 में, जब देश स्वतंत्र नहीं था और महिलाओं का व्यापार में आगे आना समाज में सहज स्वीकार्य नहीं माना जाता था, तब उन्होंने एक ऐसा पारंपरिक मिष्ठान बनाने का विचार दिया जो स्वादिष्ट होने के साथ लंबे समय तक सुरक्षित भी रहे। उस समय लड्डू और बर्फी जैसी मिठाइयाँ कुछ ही दिनों में खराब हो जाती थीं, जबकि कन्नौज की यात्रा और तीर्थ परंपरा को देखते हुए चीनी और पानी से बनने वाला गट्टा यात्रियों के लिए एक आदर्श मिठाई बन गया।आज हम इस विरासत की चौथी पीढ़ी हैं। हमारे परबाबा, बाबा, पिताजी और अब हम सभी ने हर पीढ़ी में इसकी गुणवत्ता, स्वाद और निर्माण प्रक्रिया को और बेहतर बनाया है। हमें गर्व है कि उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद–एक व्यंजन (ODOC) पहल ने कलावती गट्टे जैसे पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान और व्यापक बाजार प्रदान किया है। अब हमारा प्रयास है कि कन्नौज की यह शताब्दी पुरानी मिठास उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे वैश्विक मंचों के माध्यम से देश और दुनिया तक पहुँचे। यही हमारी परंपरा, हमारी पहचान और उत्तर प्रदेश की समृद्ध खाद्य विरासत का सम्मान है।”
सक्षम गुप्ता,
चौथी पीढ़ी,
कलावती गट्टा भंडार,
कन्नौज, उ. प्र.
ODOC से मिली नई उड़ान
उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) पहल ने ऐसे पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान देने का कार्य किया है। कलावती गट्टे जैसे स्थानीय ब्रांड आज आधुनिक पैकेजिंग, बेहतर ब्रांडिंग और व्यापक बाजार तक पहुँच बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे न केवल कारीगरों और पारिवारिक उद्यमों को प्रोत्साहन मिला है, बल्कि कन्नौज की खाद्य विरासत भी नई पीढ़ी तक पहुँच रही है।
UPITS 2026: जब कन्नौज की मिठास पहुँचेगी विश्व बाज़ार तक
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 उत्तर प्रदेश के उत्कृष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रस्तुत करने का सबसे बड़ा मंच है। इस मंच पर कलावती गट्टे केवल एक मिठाई के रूप में नहीं, बल्कि 100 वर्ष पुरानी भारतीय परंपरा, गुणवत्ता और स्थानीय उद्यमिता के प्रतीक के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेंगे।
यह अवसर कन्नौज के पारंपरिक स्वाद को वैश्विक बाजार, निर्यातकों, होटल उद्योग और खाद्य व्यापार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कलावती गट्टा भंडार की सफलता इस बात का प्रमाण है कि विरासत तब जीवित रहती है जब परंपरा और गुणवत्ता दोनों को समान सम्मान मिले। 1923 से परंपरा, स्वाद और भरोसे की पहचान आज ODOC की शक्ति और UPITS 2026 के अवसर के साथ उत्तर प्रदेश की सफलता गाथा का गौरवपूर्ण अध्याय बन चुकी है।

