श्री राम सेंटर मे ‘आल माय सन्स’ लेखक अर्थार मिलर के मशहूर नाटक का मंचन

नाटक “ऑल माई सन्स” — संवेदना, नैतिकता और पारिवारिक संघर्ष का गहन मंचन

नई दिल्ली, 19 नवम्बर 2025:
आर्थर मिलर के प्रसिद्ध नाटक ऑल माई सन्स का मंचन श्रीराम सेंटर, मंडी हाउस में हुआ। यह प्रस्तुति अपने भावनात्मक गहराई, सशक्त अभिनय और संतुलित निर्देशन से दर्शकों को लंबे समय तक विचार में डूबो गई। नाटक का हिंदी अनुवाद प्रतिभा अग्रवाल द्वारा किया गया था और निर्देशन हिमांशु हिमानिया ने संभाला।यह नाटक युद्ध, नैतिकता, पारिवारिक संबंधों और मानवीय कमजोरियों जैसे विषयों को बड़ी संवेदनशीलता से उकेरता है।

कहानी जमुना और उसके परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है—एक ऐसा परिवार जो युद्ध के बाद भी अपने भीतर के युद्ध से जूझ रहा है। जमुना का अतीत, एक गलत निर्णय और उसके परिणाम, उस परिवार की नींव को हिला देते हैं। यह कथा उस टकराव को सामने लाती है जहाँ निजी हित और सामाजिक उत्तरदायित्व आमने-सामने खड़े होते हैं।

प्रतिभा अग्रवाल के अनुवाद ने भाषा को सहज, प्रभावपूर्ण और स्थितियों के अनुरूप बनाए रखा, जिससे संवाद दर्शकों के मन तक बिना किसी बनावट के पहुँचे। संवादों की गति और उनके भावनात्मक स्तर ने नाटक के मूल संवेदनशीलता को पूरी तरह जीवित रखा। निर्देशक हिमांशु हिमानिया ने अमेरिकी पृष्ठभूमि वाले इस नाटक को भारतीय संदर्भ में प्रस्तुत करते हुए उसकी आत्मा को बरकरार रखा।

दृश्य संरचना, अभिनेताओं के बीच संवाद की गति, और मौन के प्रभावी प्रयोग ने मंच पर संवेदना की एक जीवंत परत रची। चरम दृश्यों में भावनात्मक उफान को संयमित रखते हुए निर्देशक ने कहानी को अतिनाटकीय बनने से बचाया। यह परिपक्व निर्देशन दर्शकों को कथा के साथ गहराई से जोड़ता है।

अभिनय की दृष्टि से पूरी टीम ने इस प्रस्तुति को ऊँचाई दी। जमुना की भूमिका में नरेंद्र कुमार ने अपराध बोध और आंतरिक द्वंद्व को ऐसे जीया कि दर्शक उसके दर्द में भागीदार बन गए। संपा मण्डल ने मां के रूप में असुरक्षा, प्रेम और अपने बेटे के लौटने की आस को अत्यंत संवेदनशीलता से अभिव्यक्त किया। प्रदीप की भूमिका निभाने वाले अविनाश तोमर ने नैतिक संघर्षों और पिता से टूटते विश्वास को बेहतरीन सच्चाई के साथ प्रस्तुत किया।

अनु (पूजा ध्यानी), कल्याण (मनीष शर्मा) और डॉक्टर (बिलाल) जैसे पात्रों ने कहानी के प्रवाह में गहराई और गति जोड़ी।मंच सज्जा, प्रकाश और संगीत ने नाटक की भावनात्मक पृष्ठभूमि को और सशक्त बनाया। घर के बाहरी आँगन का दृश्यात्मक रूप इतना सजीव था कि दर्शक स्वयं उस वातावरण का हिस्सा महसूस करते हैं। प्रकाश व्यवस्था ने दृश्यों के भावनात्मक बदलावों को बखूबी उभारा और संगीत ने माहौल में आवश्यक गहराई जोड़ी।

समग्र रूप से, ऑल माई सन्स का यह मंचन संवेदना और विचार के स्तर पर एक प्रभावशाली प्रस्तुति थी। यह नाटक दर्शकों को न केवल एक परिवार की कहानी दिखाता है, बल्कि उन्हें आत्ममंथन की ओर ले जाता है—जहाँ सवाल उठते हैं कि नैतिकता, जिम्मेदारी और प्रेम की परिभाषा आखिर क्या है।

हिमांशु हिमानिया और उनकी टीम ने एक ऐसी प्रस्तुति दी जो कला, विचार और संवेदना की दृष्टि से उत्कृष्ट कही जा सकती है। यह मंचन न केवल रंगमंच प्रेमियों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए यादगार अनुभव है जो समाज और व्यक्ति के जटिल संबंधों को गहराई से समझना चाहते हैं।

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