
पराक्रम दिवस पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के कम्प्यूटर साइंस ऑडिटोरियम में पराक्रम फाउंडेशन ने पराक्रम सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया। नेताजी सुभाषचन्द्र बोस जी के आदर्शों और उनके विचारों को सम्पूर्ण विश्व में फैलाने का कार्य पराक्रम फाउंडेशन कर रहा है।
इस पराक्रम सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्री प्रियंक कानूनगो (सदस्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग), विशिष्ट अतिथि डॉ पवन तिवारी (क्षेत्र संगठन मंत्री, विद्याभारती पूर्वोत्तर), श्री जगदीन्द्र राय चौधुरी (सचिव, विद्याभारती पूर्वोत्तर क्षेत्र), श्री ताई तागाक (पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार, मुख्यमंत्री अरुणाचल प्रदेश), सुश्री चन्द्रिका बोस (नेताजी की वंशज), श्री कुलदीप वेदवान (राष्ट्रीय आर्चरी कोच) डॉ योगेन्द्र भारद्वाज (असिस्टेंट प्रोफेसर, केंद्रीय संस्कृत विवि, दिल्ली), डॉ अंकित पांडेय, श्री वासु शुक्ला आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीकान्त नामदेव (अध्यक्ष, पराक्रम फाउंडेशन) ने की। इस पराक्रम सम्मान समारोह का प्रारम्भ विधिविधान पूर्वक वैदिक मंगलाचरण और नेताजी सुभाषचन्द्र बोस जी के चित्र पर श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया।

कार्यक्रम के आरंभ में स्वागत वक्तव्य और अतिथि परिचय सुश्री भावना ने कराया। पराक्रम फाउंडेशन के विषय में चर्चा, उद्देश्य और गतिविधियों के विषय में श्रीकान्त नामदेव जी ने चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष के पराक्रम सम्मान की उद्घोषणा की। पराक्रम फाउंडेशन ने इस कार्यक्रम के दौरान भारत की पहली पैरा तीरंदाज (जिनके दोनों हाथ और पैर नहीं हैं) सुश्री पायल नाग को पराक्रम सम्मान-2025 प्रदान किया, जिन्होंने खेलो इंडिया गेम्स में अपना पराक्रम दिखाते हुए रजत पदक प्राप्त किया था। साथ ही उनके कोच श्री कुलदीप वेदवान जी को गेस्ट ऑफ ऑनर से सम्मानित किया, जिनकी दिन रात की हुई मेहनत और मार्गदर्शन के कारण भारत को शीतल देवी, विकास कुमार और पायल नाग जैसे आर्चर मिले हैं। डॉ पवन तिवारी जी ने दोनों अतिथियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उन्हें फाउंडेशन की ओर से अग्रिम जीवन में सफलता प्राप्त करने की शुभकामनाएं दीं और पराक्रम फाउंडेशन के सदस्यों को प्रेरक वचनों से उद्बोधित किया।
इस सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि श्री प्रियंक कानूनगो ने कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी के जीवन से हमें तीन बातें ग्रहण करनी चाहिए और वे हैं – नेतृत्व, त्याग और शौर्य। नेताजी जनता के बीच विचार बनकर रहे, देश का नेतृत्व किया और कांग्रेस के अध्यक्ष पद का त्याग स्वतंत्रता से पूर्व किया, जबकि स्वतंत्रता के बाद उन्होंने अपने यश को भी त्याग दिया। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी को हमें अपना आदर्श मानना चाहिए।
अरुणाचल प्रदेश से पधारे विशिष्ट अतिथि श्री ताई तागाक जी ने नेताजी को प्रणाम करते हुए आजाद हिंद सेना में शहीद हुए अरूणाचल प्रदेश के अनकहे योद्धाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री जगदीन्द्र राय चौधुरी जी ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी के पराक्रम और शौर्य की गाथा को सबके सामने रखा। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत मे नेताजी के आगमन और आजाद हिंद सरकार की गठन की चर्चा की। इस सम्मान समारोह में पराक्रम फाउण्डेशन द्वारा निर्मित पराक्रम संदेश नामक पत्रिका के 2025 (अंक) का विमोचन किया गया। इस पत्रिका के मुख्य सम्पादक डॉ योगेन्द्र भारद्वाज हैं, जोकि पराक्रम फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक भी हैं। उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि इस अंक की थीम (वीरभोग्या वसुंधरा) महिला केंद्रित है, जिसमें लोकमाता अहिल्याबाई होलकर, रानी दुर्गावती, महारानी लक्ष्मीबाई से लेकर ऑपरेशन सिंदूर में शामिल रहीं विंग कमांडर व्योमिक सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी तक को शामिल किया गया है। पराक्रम फाउण्डेशन नेताजी सुभाषचन्द्र बोस जी के विचार (नारी सशक्तिकरण) को भी आगे कर रहा है।
इस पराक्रम सम्मान समारोह में धन्यवाद ज्ञापन सुश्री चन्द्रिका बोस ने ज्ञापित किया और जेएनयू के कम्प्यूटर साइंस के आचार्य डॉ सौरभ शर्मा और उनकी टीम को विशेष धन्यवाद दिया। जिनके सहयोग के कारण यह कार्यक्रम संभव हो सका। इस कार्यक्रम में कम्प्यूटर साइंस की टीम अनुपमा, सौरभ, गोल्डी, शालिनी, श्रीवाणी, संस्कृत संस्थान से तेनजिन, मधुसूदन, अभिषेक और पारसी भाषा केंद्र के अभिषेक व रितिक का विशेष सहयोग रहा।

