
बेंगलुरु, 12 दिसंबर 2025: डिजी यात्रा—भारत का सेल्फ-सॉवरेन आइडेंटिटी (एसएसआई) आधारित और प्राइवेसी-बाय-डिज़ाइन सिद्धांतों पर निर्मित प्लेटफ़ॉर्म—हवाई यात्रा को तेज़, संपर्करहित और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है। अब तक 1.9 करोड़ से अधिक लोगों ने डिजी यात्रा डाउनलोड किया है और देश के 24 हवाई अड्डों पर लगभग 30% यात्री इसका उपयोग कर रहे हैं। प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से अब तक 7.7 करोड़ यात्राएँ सुगमता से पूरी हो चुकी हैं।
इन उपलब्धियों के साथ, डिजी यात्रा अब 2026 से वैश्विक स्तर पर इंटरऑपरेबिलिटी सक्षम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लक्ष्य है कि 2028 तक 80% हवाई यात्री डिजी यात्रा का उपयोग करें।
डिजिटल पहुंच और उपयोग में तेजी लाने के उद्देश्य से प्लेटफ़ॉर्म ने छह भारतीय भाषाओं में अपना बीटा संस्करण लॉन्च किया है। भाषिणी के सहयोग से शुरू की गई यह सुविधा जल्द ही भारत की सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में उपलब्ध होगी। यह पहल नागरिक उड्डयन मंत्रालय के उस विज़न को समर्थन देती है जिसमें भाषा-बाधाओं को दूर कर डिजिटल यात्रा को मेट्रो शहरों से आगे देशभर में अपनाने को बढ़ावा दिया जा रहा है।
डिजी यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के लिए भी पायलट चरण में प्रवेश कर चुका है। प्लेटफ़ॉर्म ने पहला वैश्विक उपयोगकर्ता पंजीकरण पूरा किया है और पासपोर्ट-आधारित डिजिटल प्रमाणीकरण पर परीक्षण शुरू कर दिया है। इससे भविष्य में प्रवासी भारतीय, एनआरआई और विदेशी यात्री मैनुअल जांच के बजाय डिजिटल पहचान सत्यापन का उपयोग कर सकेंगे।
इस उद्देश्य को सक्षम करने के लिए डिजी यात्रा विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, इमिग्रेशन ब्यूरो, आईसीएओ और आईएटीए के साथ वन आईडी प्रोग्राम के अंतर्गत मिलकर कार्य कर रहा है। इन प्रयासों से पासपोर्ट और वीज़ा आधारित डिजिटल क्रेडेंशियल साझा करने, स्वचालित सीमा नियंत्रण प्रणाली और अगले वित्त वर्ष से शुरू होने वाले अंतरराष्ट्रीय पायलट ट्रायल का ढांचा तैयार किया जा रहा है।
यात्रा पहचान प्रबंधन के परे, डिजी यात्रा अपने सेवा इकोसिस्टम का विस्तार कर रहा है, ताकि दैनिक यात्रियों के संपूर्ण अनुभव को और सुविधाजनक बनाया जा सके। अब यह प्लेटफ़ॉर्म इंडिगो, एयर इंडिया और मेकमायट्रिप जैसी प्रमुख एयरलाइनों और ट्रैवल एप्स से सीधे बोर्डिंग पास साझा करने की सुविधा उपलब्ध कराता है, जिससे हवाई अड्डों पर प्रक्रिया अधिक सुगम और बिना बाधा वाली बन जाती है।
डिजी यात्रा फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुरेश खड़कभवि ने कहा, “आज हम जिस गति और पैमाने को प्राप्त कर रहे हैं, वह भारत की डिजिटल यात्रा प्रणाली में एक नए अध्याय की शुरुआत है। बहुभाषी विस्तार और अंतरराष्ट्रीय पायलट कार्यक्रम हमारे उस संकल्प को दर्शाते हैं जिसके अंतर्गत यात्रा को सरल, समावेशी और वैश्विक स्तर पर इंटरऑपरेबल बनाया जा रहा है। हमें यह देखकर उत्साह है कि अंतरराष्ट्रीय विमानन निकाय और कई देश डिजी यात्रा को निर्बाध यात्रा के मॉडल के रूप में देख रहे हैं। मंत्रालयों और सहयोगी एजेंसियों के समर्थन के साथ हमें विश्वास है कि आने वाले वर्षों में प्रगति अपेक्षा से अधिक तीव्र होगी—और भारत उस भविष्य के करीब पहुँचेगा जहां पहचान सत्यापन तत्काल, सुरक्षित और पूर्णतः यात्री-नियंत्रित होगा।”
डिजी यात्रा अब हवाई अड्डों से आगे अपनी सेवाओं के विस्तार पर विचार कर रहा है (आवश्यक नियामक स्वीकृतियों के साथ), जिसमें एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रमाण-पत्र और बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से सुरक्षित होटल चेक-इन और स्वचालित प्रवेश प्रक्रिया शामिल होगी। इससे यात्री मैन्युअल पहचान जांच के बजाय फेस-ऑथेंटिकेशन के माध्यम से सहज और तेज़ चेक-इन अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
इसके साथ ही, प्लेटफ़ॉर्म संग्रहालयों, स्मारकों और पर्यटन स्थलों पर भी डिजी यात्रा व्यवस्था को अपनाने की संभावना तलाश रहा है, ताकि टिकटिंग प्रक्रियाएँ सुचारू हों और विशेष रूप से सीमित कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आगंतुक अनुभव बेहतर हो सके।
आगे चलकर, इस मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करना भारतीय यात्रियों के लिए वैश्विक यात्रा अनुभव को सरल बनाएगा और भारत की पर्यटन उपस्थिति को मजबूत करेगा। इससे डिजी यात्रा गोपनीयता-सुरक्षित डिजिटल यात्रा और हॉस्पिटैलिटी नवाचार का प्रमुख सक्षम तंत्र बनकर उभरेगा।
इन सभी पहलों का संचालन डिजी यात्रा के प्राइवेसी-बाय-डिज़ाइन ढांचे पर आधारित है, जिसे एक विकेंद्रीकृत सिस्टम का समर्थन प्राप्त है जो उपयोगकर्ता डेटा सुरक्षा तथा वैश्विक डिजिटल पहचान मानकों के अनुपालन को सुदृढ़ करता है।
