केंद्रीय बजट 2026: हमदर्द लेबोरेटरीज ने AYUSH की 43 बिलियन डॉलर की क्षमता को साकार करने के लिए बीमा कवरेज, रिसर्च फंडिंग और बजट बढ़ाने की मांग :मजीद।

केंद्रीय बजट 2026: हमदर्द लेबोरेटरीज ने AYUSH की 43 बिलियन डॉलर की क्षमता को साकार करने के लिए बीमा कवरेज, रिसर्च फंडिंग और बजट बढ़ाने की मांग की
भारत, 30 जनवरी 2026: केंद्रीय बजट 2026–27 से पहले, पारंपरिक और प्रमाण-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में 120 वर्षों से अधिक की विरासत रखने वाली और AYUSH क्षेत्र की प्रमुख हितधारक हमदर्द लेबोरेटरीज (इंडिया) ने सरकार के समक्ष अपनी प्रमुख बजट अपेक्षाएं और सुझाव रखे हैं। इनका उद्देश्य देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना, सतत आर्थिक विकास को गति देना और आम लोगों तक किफायती और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है।


आज AYUSH क्षेत्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा, निवारक कल्याण और वैश्विक स्वास्थ्य सेवा निर्यात का एक रणनीतिक स्तंभ बन चुका है। हमदर्द लेबोरेटरीज के चेयरमैन और मैनेजिंग ट्रस्टी श्री अब्दुल मजीद ने 2026–27 में आयुष मंत्रालय के बजट में और वृद्धि की सिफारिश की है, ताकि आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी में बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल पहलों, संस्थागत सशक्तिकरण और क्षमता निर्माण को समर्थन मिल सके।
विश्वसनीयता और दुनिया भर में स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए, क्लिनिकल रिसर्च, फार्माकोविजिलेंस, शास्त्रीय औषधि सूत्रों के सत्यापन और इंटीग्रेटिव मेडिसिन हेतु समर्पित फंड आवंटित किए जाने चाहिए। यह कार्य केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRUM), केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से किया जा सकता है। श्री अब्दुल मजीद ने सार्वजनिक–निजी अनुसंधान साझेदारियों को मजबूत करने की भी आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रमुख सिफारिशों में सरकारी और निजी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत AYUSH उपचारों को शामिल करना भी है, ताकि ओपीडी इलाज, बीमारी से बचाव, लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के उपचार और रिकवरी से जुड़ी सेवाओं को कवर किया जा सके। इससे आम लोगों का जेब से होने वाला खर्च कम होगा, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा और AYUSH को मुख्यधारा की स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।
अपनी अपेक्षाओं पर टिप्पणी करते हुए श्री अब्दुल मजीद ने कहा,
“AYUSH भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक प्रमाणिकता और आर्थिक अवसरों का अनूठा संगम है। केंद्रीय बजट 2026–27 में बीमा समावेशन, अनुसंधान निवेश और निर्यात प्रोत्साहन के लिए रणनीतिक समर्थन भारत को वैश्विक समग्र स्वास्थ्य सेवा में अग्रणी बना सकता है और ‘हील इन इंडिया, हील बाय इंडिया’ के सपने को साकार कर सकता है।”
टैक्स संरचना को सरल बनाने पर भी हमदर्द लेबोरेटरीज ने जोर दिया है। संस्था ने आवश्यक AYUSH जेनेरिक दवाओं पर जीएसटी छूट की सिफारिश की है, ताकि ये दवाएं आम लोगों के लिए और अधिक किफायती बन सकें। इसके साथ ही, खासतौर पर आकांक्षी जिलों में AYUSH निर्माण इकाइयों, वेलनेस सेंटर्स और अस्पतालों को वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाने की जरूरत बताई गई है।
भारतीय AYUSH उद्योग का मूल्यांकन 43 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का है, ऐसे में GMP और WHO-GMP मानकों को अपनाने के लिए पूंजी सब्सिडी और विशेष वित्तीय पैकेज उपलब्ध कराए जाने चाहिए। AYUSH फार्मा पार्क और साझा परीक्षण सुविधाओं की स्थापना से अनुपालन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।
वित्त वर्ष 2024–25 में AYUSH निर्यात 689 मिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर चुका है। ऐसे में हमदर्द लेबोरेटरीज ने वैश्विक नियामकीय अनुमोदनों, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, व्यापार प्रतिनिधिमंडलों और AYUSH प्रणालियों की द्विपक्षीय मान्यता के लिए बजटीय समर्थन की मांग की है, ताकि गैर-शुल्क बाधाओं को कम किया जा सके। भारत के तेजी से बढ़ते मेडिकल टूरिज्म क्षेत्र—जिसके 2026 तक 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है—के अनुरूप, ‘हील इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत अंतरराष्ट्रीय मरीजों को सेवाएं देने वाले मान्यता प्राप्त AYUSH वेलनेस सेंटरों और अस्पतालों को भी प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।


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