अटल तिरंगा सम्मान समारोह में विख्यात पेंटर महेश वैष्णव की क्लाकृतियों को देश विदेश में मिल रही पहचान।

अटल तिरंगा सम्मान समारोह, विख्यात पेंटर महेश वैष्णव की कला ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
नई दिल्ली:अटल सल्यूट तिरंगा राष्ट्रवादी संस्था का नई दिल्ली नगर पालिका केंद्र में आयोजित सम्मान समारोह के अवसर पर कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब सल्यूट तिरंगा के कला एवं संस्कृति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व-विख्यात चित्रकार महेश वैष्णव द्वारा निर्मित गोधन (गाय के गोबर) से बनी अनूठी कलाकृतियों की भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।


इस प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण पूरी तरह गोधन से निर्मित “हनुमान चालीसा” का विधिवत अनावरण रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से उस्थित परम पूज्य स्वामी चिदानंद जी महाराज ने महेश वैष्णव की संपूर्ण आर्ट गैलरी का गहनता एवं गंभीरता से अवलोकन किया। उन्होंने उनके द्वारा बनाई पेंटिंग की मुक्तकंठ से भूरी भूरी प्रशंशा करतें हुये कहा कि विशेष रूप से मान्य प्रधानमंत्री मोदी जी की पेंटिंग देख मन्त्रमुग्ध हो कर कहा, ” गोधन से बनी कला, दिव्य और आध्यात्मिक कलाकृतियाँ रचने वाले आप विश्व के एकमात्र कलाकार हैं। मैं चाहता हूँ कि ये पेंटिंग्स परमार्थ आश्रम के लिए भी बनाई जाएँ।”उन्होंने महेश वैष्णव को अपना आशीर्वाद देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ प्रदान कीं।


इस अवसर पर दिल्ली से सांसद एवं कलाकार मनोज तिवारी ने भी महेश वैष्णव की कला की प्रशंसा करते हुए उन्हें भारत की सांस्कृतिक का धरोहर बताया वहीं,सेल्यूट तिरंगा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश झा के तत्वाधान में आयोजित अटल तिरंगा सम्मान कार्यक्रम में भारी संख्या में जनसमूह उपस्थित रहा। आम जनता के लिए यह प्रदर्शनी एक शैक्षिक अनुभव बन गई, जहाँ लोगों ने यह प्रत्यक्ष देख गाय के गोबर जैसे प्राकृतिक तत्व से भी उच्च कोटि की, आध्यात्मिक और विश्वस्तरीय कला सृजित की जा सकती है।
इस अवसर पर महेश वैष्णव ने सल्यूट तिरंगा संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश झा जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा—
“मैं राजेश झा का हृदय से धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने मुझे यह मंच प्रदान किया, जिससे मेरी कला जन-जन तक पहुँच सकी।”
भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, शीघ्र ही
हनुमान चालीसा आरती, हनुमान जी की आरती, श्रीराम आरती तथा गोधन से निर्मित संपूर्ण रामायण के नवीन संस्करण पर कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त कई महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परियोजनाएँ भी शीघ्र प्रारंभ होंगी। आए हुये कला और सांस्कृतिक क्षेत्र में उत्कर्षठ कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया।
यह आयोजन न केवल कला की दृष्टि से, बल्कि गौ-संस्कृति, सनातन परंपरा और भारतीय अध्यात्म के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top