डेयरी सहकारिता और रक्षा क्षेत्र की साझेदारी से रक्षा प्रतिष्ठानों को भरोसेमंद आपूर्ति और किसानों को नियमित आय सुनिश्चितः डॉ. मीनेश शाह, अध्यक्ष, NCDFI

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नई दिल्ली :   भारताय सना न डयरा सहकारा नटवक के माध्यम से स्थानाय स्तर पर दूध का खराद, प्रसस्करण (प्रासासग) आर कोल्ड-चेन प्रबंधन को मजबूत करने के लिए अपने सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

NCDFI के चेयरमैन और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कहा, “यह अनोखी चार दशक पुरानी ‘डेयरी सहकारिता-रक्षा साझेदारी सभी हितधारकों को लाभ पहुँचाती है रक्षा प्रतिष्ठानों को भरोसेमंद आपूर्ति और मजबूत स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाएं मिलती हैं, सहकारिता को सुनिश्चित संस्थागत बाजार और बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग मिलता है, और डेयरी किसानों की व्यापक बाजारों तक पहुंच के साथ नियमित आय सुनिश्चित होती है।”

सीमावर्ती और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में दूध की खरीद, प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई चेन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए सहकारी समितियों की सराहना करते हुए डॉ. शाह ने कहा कि आपूर्ति किया जाने वाला हर अतिरिक्त लीटर दूध, डेयरी किसानों और देश की सेवा करने वाले जवानों को एक-दूसरे के करीब लाता है। वे आनंद (गुजरात) में आयोजित “डेयरी-रक्षा साझेदारी पर सहकारी सम्मेलन” (Cooperative Conclave on Dairy-Defence Partnership) में बोल रहे थे। इस सम्मेलन में विशेष रूप से दूरदराज, सीमावर्ती और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रक्षा प्रतिष्ठानों को गुणवत्तापूर्ण दूध और डेयरी उत्पादों की आपूर्ति करने वाली डेयरी सहकारी समितियों के योगदान को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए, भारतीय सेना के महानिदेशक आपूर्ति एवं परिवहन (Director General Supplies and Transport — DGST) लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश चड्डा ने कठिन इलाकों में तैनात सैनिकों को विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए NCDFI और उसकी सदस्म सहकारी समितियों की सराहना की। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में डेयरी सहकारिता को संगठित, बढ़ावा देने और मजबूत करने के NDDB के केंद्रित प्रयासों की भी प्रशंसा की, जिससे स्थानीय दूध उत्पादन को समर्थन मिला है।

लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश चड्डा ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में डेयरी सहकारिता की मजबूत मौजूदगी से टिकाऊ बाजार तैयार हो सकते हैं, स्थानीय रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा हो सकते हैं और रिवर्स माइग्रेशन (वापस गाँव लौटने) में योगदान मिल सकता है। उन्होंने ताजे दूध की आपूर्ति बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया और आवश्यकताओं का आकलन करने एवं उपयुक्त स्थानीय क्षमताएं बनाने के लिए सेना और NCDFI के बीच अधिक तालमेल का आह्वान किया। उन्होंने परिचालन आवश्यकताओं (operational needs) के अनुसार पर्याप्त लॉन्ग-लाइफ (अधिक समय तक सुरक्षित रहने वाले) दूध की क्षमता बनाए रखने के महत्व पर भी बल दिया।

इस सम्मेलन ने भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और असम राइफल्स को सहकारी समितियों द्वारा की जाने वाली आपूर्ति के भविष्य, उभरती आवश्यकताओं और परिचालन अनुभवों पर संवाद की सुविधा

प्रदान की। मेजर जनरल एस. सूरज (अतिरिक्त महानिदेशक, आपूर्ति एवं परिवहन), सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और सीमावर्ती व उत्तर-पूर्वी राज्यों के डेयरी सहकारिता प्रबंध निदेशकों ने भी इसमें भाग लिया।

कॉन्क्लेव में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि जहां भी स्थानीय खरीद, प्रसंस्करण, कोल्ड-चेन और लॉजिस्टिक्स की स्थितियां अनुमति देती हैं, वहां ताजे दूध की आपूर्ति का विस्तार किया जा रहा है। इससे यूएचटी (UHT) दूध पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, जबकि ऐसे स्थानों के लिए UHT जैसे लॉन्ग-लाइफ उत्पादों (जो वर्तमान में 4.11 करोड़ लीटर हैं) को बनाए रखना जारी रहेगा जहां वे परिचालन के दृष्टिकोण से आवश्यक हैं।

सम्मेलन का समापन मांग की स्पष्टता में सुधार, उत्पाद-वार क्षमताओं के मानचित्रण, वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था, गुणवत्ता और कोल्ड-चेन प्रणालियों को मजबूत करने, डिजिटल समन्ध्रय को सक्षम करने, उत्पाद टोकरी में विविधता लाने और टिकाऊ लॉजिस्टिक्स विकसित करने की नवीनीकृत प्रतिबद्धता के साथ हुआ। इसमें र संस्थानों और डेयरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में सरकार और NDDB के योगदान को भी स्वीकार गया।

रक्षा मंत्रालय के साथ NCDFI का जुड़ाव 1984 में शुरू हुआ था और चार दशकों में यह 117 डेयरी सहकार समितियों को शामिल करते हुए एक मजबूत संस्थागत साझेदारी में बदल गया है, जिसका 2025-26 में अनुबंध मूल्म ₹1,627 करोड़ रहा। 2025-26 में ताजे दूध की आपूर्ति बढ़कर 18.48 करोड़ लीटर हो गई, जबकि ताजे और UHT दूध की कुल आपूर्ति बढ़कर 22.60 करोड़ लीटर हो गई। 2025-26 में दस सीमावर्ती और उत्तर-पूर्वी डेयरी सहकारी समितियों ने 196 सैन्य इकाइयों को 6.44 करोड़ लीटर ताजे दूध की आपूर्ति की।

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