स्वस्थ भारत के निर्माण हेतु स्वास्थ्य, योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति एवं प्राकृतिक जीवन शैली पर हुआ राष्ट्रीय मंथन

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द्वितीय अखिल भारतीय आरोग्य सम्मेलन–2026 का भव्य आयोजन सम्पन्न

आरोग्य सृजन न्यास के तत्वावधान में द्वितीय अखिल भारतीय आरोग्य सम्मेलन–2026 का भव्य एवं गरिमामय आयोजन नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित चिकित्सकों, योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञों, पत्रकारों तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता करते हुए स्वास्थ्य, योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति तथा जनस्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नरेश चंद गोयल, भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) के भूतपूर्व वरिष्ठ अधिकारी, प्रेरक वक्ता एवं नेतृत्व प्रशिक्षक ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी राष्ट्र की समृद्धि, सुरक्षा और प्रगति उसके नागरिकों के स्वास्थ्य पर आधारित होती है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं। यदि देश का प्रत्येक व्यक्ति शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक रूप से स्वस्थ होगा, तभी भारत आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा वैज्ञानिक दृष्टि से निरंतर प्रगति करेगा। उन्होंने स्वास्थ्य को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग, अनुशासित जीवनशैली तथा समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण को प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बताया। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ नागरिक ही विकसित भारत के स्वप्न को साकार कर सकते हैं।”

विशिष्ट अतिथि डॉ. अजय कुमार शास्त्री, प्रोफेसर, योग विभाग, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने कहा कि योग भारत की अमूल्य धरोहर है, जो शरीर, मन और आत्मा के मध्य संतुलन स्थापित करता है। उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक पद्धति है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन योग, प्राणायाम एवं ध्यान के अभ्यास से तनाव, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा तथा अनेक जीवनशैली जनित रोगों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक योग को अपनी दिनचर्या में सम्मिलित करे तो स्वस्थ भारत का सपना शीघ्र साकार हो सकता है।

विशिष्ट अतिथि अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेदाचार्य श्री अखिलेश शर्मा ने अपने प्रेरक व्याख्यान में आयुर्वेद को भारतीय ऋषि परंपरा का अमूल्य विज्ञान बताते हुए कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की सम्पूर्ण जीवन-पद्धति है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार तन, मन और आत्मा का संतुलन ही वास्तविक स्वास्थ्य है। उन्होंने ऋतुचर्या, दिनचर्या, सात्विक एवं संतुलित आहार, पर्याप्त निद्रा, योग, ध्यान तथा प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने वाला व्यक्ति दीर्घायु, निरोग एवं प्रसन्न रहता है। उन्होंने आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न रोगों की रोकथाम के लिए आयुर्वेद को प्रभावी एवं सुरक्षित उपाय बताया।

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर (डॉ.) आनंद बर्धन, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एवं म्यूज़ियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की संस्कृति सदैव स्वास्थ्य, स्वच्छता, संयम और प्रकृति के सम्मान की प्रेरणा देती रही है। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ भारत ही सशक्त भारत का वास्तविक आधार है।” उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत, योग, आयुर्वेद, पारंपरिक ज्ञान और नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहता है, तब वह शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनता है। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली को भारत की सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग बताते हुए इसे जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि राय अमरेंद्र प्रसाद, बिहार योग विद्यालय के कर्म संन्यासी ने अपने उद्बोधन में योग को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का सर्वोत्तम माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ नहीं बनाता, बल्कि मन को शांत, विचारों को सकारात्मक तथा जीवन को अनुशासित बनाता है। उन्होंने कहा कि नियमित आसन, प्राणायाम, ध्यान तथा योगनिद्रा का अभ्यास व्यक्ति को तनाव, अवसाद, अनिद्रा तथा अनेक मानसिक एवं शारीरिक रोगों से दूर रखता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रतिदिन कम-से-कम 30 मिनट योग करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

विशिष्ट अतिथि श्री अखिलेश कुमार सिंह, प्रख्यात एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ ने स्वास्थ्य एवं प्राकृतिक जीवनशैली पर व्याख्यान देते हुए कहा कि मानव शरीर स्वयं रोगों से लड़ने की अद्भुत क्षमता रखता है। उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त जल सेवन, सकारात्मक सोच तथा प्रकृति के निकट जीवन जीने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति कृत्रिम एवं अनियमित जीवनशैली को छोड़कर प्राकृतिक जीवन अपनाए तो अनेक रोगों से स्वतः बचा जा सकता है। उन्होंने एक्यूप्रेशर को बिना दुष्प्रभाव वाली सहायक चिकित्सा पद्धति बताते हुए इसके नियमित अभ्यास के लाभों की जानकारी दी।

सम्मेलन के दौरान देशभर से आए चिकित्सकों, योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञों एवं समाजसेवियों को स्वास्थ्य जागरूकता एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मेलन में स्वास्थ्य, योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, जीवनशैली जनित रोगों की रोकथाम तथा स्वस्थ भारत के निर्माण जैसे विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्री उमेश प्रसाद सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, सभी वक्ताओं, चिकित्सकों, योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, शिक्षाविदों, पत्रकारों, समाजसेवियों, विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में व्यक्त विचार एवं सुझाव देश में स्वास्थ्य जागरूकता के व्यापक अभियान को नई दिशा प्रदान करेंगे तथा “स्वस्थ भारत–सशक्त भारत” के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

कार्यक्रम का समापन “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” के वैदिक मंत्रोच्चार तथा स्वस्थ, समृद्ध एवं सशक्त भारत के सामूहिक संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ।

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