पुरुषोत्तम मास के शुभ अवसर पर दिल्ली भक्तिमय हो उठी। सिद्ध पीठ योगी सतगुरु बाबा श्री रतन नाथ जी महाराज जी को कोटि-कोटि नमन।

दिल्ली राममय: 1400 वर्ष प्राचीन सिद्ध पीठ के मंदिर श्री हर श्री नाथ जी से निकली ऐतिहासिक 17वीं श्री राम नाम महायज्ञ महाशोभायात्रा, सांसद सुश्री
बांसुरी स्वराज जी समेत हजारों श्रद्धालु नंगे पाँव हुए शामिल
ॐ नमः श्री हरि | श्री हर श्री नाथ जी

नाथ संप्रदाय की 1400 वर्ष प्राचीन सिद्ध पीठ के मंदिर , दिल्ली झंडेवालान से महा राम-नाम महायज्ञ से सुशोभित ऐतिहासिक 17वीं रथयात्रा निकाली गई। यह यात्रा अनुशासन, सेवा और श्रद्धा की अद्भुत मिसाल बनकर सम्पूर्ण दिल्ली में गूंजी।

सिद्ध पीठ का गौरवशाली इतिहास:
सिद्ध पीठ योगी बाबा श्री रतन नाथ जी सतगुरु महाराज का इतिहास 1400 वर्ष पुरानी परंपरा से जुड़ा है। शास्त्रों, वेदों, पुराणों और इतिहास के अनुसार सतगुरु महाराज श्री रतन नाथ जी की आयु 700 वर्षों से भी अधिक रही थी। जन कल्याण, नारी उत्थान, भाईचारा और ऊंच-नीच के भाव को समाप्त करने हेतु सतगुरु श्री रतन नाथ महाराज जी ने कुरुतियों को समाप्त करते हुए अनेकों कल्याणकारी कार्य संपन्न किए।

नाथ संप्रदाय के योगेश्वर गुरु गोरखनाथ जी के प्रमुख शिष्य बाबा श्री रतन नाथ जी सतगुरु महाराज के स्थान काबुल, जलालाबाद, चारबाग और गजनी, जोकि अफगानिस्तान में हैं तथा पेशावर, जोकि आजादी के बाद पाकिस्तान के हिस्से में जो आज भी सुशोभित हैं। देश के कई भागों में उनके मंदिर स्थापित हैं। वर्तमान में पूज्य *बाबा श्री लक्ष्मण दास जी महाराज के नेतृत्व में सभी दैनिक कार्य लोक कल्याण हेतु संपन्न किए जा रहे हैं। उत्तरकाशी माँ गंगा के तट में भी बाबा श्री परिपूर्ण दास जी महाराज द्वारा निर्मित स्थान जनमानस के कल्याण हेतु अलौकिक रूप से स्थापित है।

ब्रह्म मुहूर्त से शुभारंभ -:
पुरुषोत्तम मास में सोमवार के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी के नाम पर 17वीं श्री राम नाम महायज्ञ एवं रथयात्रा निकाली गई। यात्रा का शुभारंभ ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः 4:30 बजे हुआ जब हजारों की संख्या में देश-विदेश से आए भक्तजन मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। पूज्य बाबा श्री लक्ष्मण दास जी महाराज के आशीर्वाद से रथयात्रा को राम नाम रूपी ध्वजा दिखाई गई। यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु जन नंगे पाँव शामिल हुए।

अनुशासन की मिसाल बनी यात्रा – प्रशासन का पूर्ण सहयोग:
पूरी यात्रा बड़े ही अनुशासित तरीके से संपन्न हुई। सेवदारों ने सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। इस सफलता के साथ-साथ यहाँ दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों, पुलिस बल, CRPF बल और प्रशासन का पूर्ण सहयोग रहा, जिसके कारण यातायात और सुरक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही। किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की दिक्कत या परेशानी नहीं हुई। सभी श्री रामसेवक मर्यादा पूर्वक, सिर ढककर, बिना काले वस्त्र धारण किए “जय श्री राम” के जयकारों के साथ आगे बढ़ते रहे। न धक्का-मुक्की, न शोर – केवल राम नाम की गूंज। पूर्ण अनुशासन के साथ नंगे पाँव लगभग 9 किलोमीटर तक यात्रा संपूर्ण हुई।

यात्रा मार्ग:
रथयात्रा मंदिर श्री हर श्री नाथ जी से प्रारंभ होकर रानी झांसी रोड मंदिर मार्ग से बिड़ला मंदिर के सामने से होती हुई कालीबाड़ी रोड, बंगला साहेब रोड, हनुमान मंदिर रोड, शिवाजी स्टेडियम के सामने से लेडी हार्डिंग रोड, पंचकुइयां रोड, आर के आश्रम, आराम बाग, रानी झांसी रोड, झंडेवाला मंदिर होते हुए पुनः मंदिर श्री हर श्री नाथ जी पर प्रातः 10:10 बजे संपन्न हुई।

वीआईपी उपस्थिति और सराहना:
इस अलौकिक यात्रा में नई दिल्ली की सांसद सुश्री बांसुरी स्वराज जी ने भी मार्ग में रथ को प्रणाम कर शुभकामनाएं दीं। यात्रा जब प्राचीन हनुमान मंदिर, कनॉट प्लेस पहुंची तो वहाँ के पुजारी जी ने भावविभोर होकर कहा – “सचमुच ऐसी अनुशासित और भव्य यात्रा पहले कभी देखने को नहीं मिली”।

स्थान की महिमा और अलौकिक शक्ति – दिव्य वचन:
“नमोस्तु रामाय सलक्ष्मणाय, देव्या: सहैव प्रभवे नमो नमः।”
अर्थ: लक्ष्मण और देवी सीता सहित प्रभु श्री राम जी को नमस्कार। यह धाम उसी रामतत्व का प्रकाश फैलाता है।

“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरु: साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।”
अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु, शिव हैं। गुरु साक्षात परब्रह्म हैं। ऐसे गुरु को नमन।

“सेवा परमो धर्मः, गौ रक्षा परम कर्तव्यम्।”
अर्थ: सेवा सबसे बड़ा धर्म है, गौ रक्षा परम कर्तव्य है। यही इस सिद्ध पीठ का संकल्प है।

“यह स्थान केवल ईंट-पत्थर का मंदिर नहीं, यह तो भक्तों के अंतरमन को प्रकाशित करने वाली दिव्य ऊर्जा का स्रोत है। यहाँ आते ही मन का बोझ उतर जाता है और आत्मा को असीम शांति मिलती है।” – श्रद्धालुओं के शब्द

“मंदिर श्री हर श्री नाथ जी की अलौकिक शक्ति यहाँ आने वाली प्रत्येक श्रद्धालु को ऊर्जा से भर देती है। यहाँ का वातावरण स्वयं कहता है – आओ, प्रभु के नाम में डूब जाओ, कल्याण निश्चित है।” – सेवादार

सेवा ही साधना – सिद्ध पीठ की पहचान:
1400 वर्ष पुरानी इस सिद्ध पीठ की परंपरा सेवा से ही जुड़ी है। यहाँ प्रतिदिन प्रातः चाय प्रसाद, मध्याह्न एवं रात्रि लंगर प्रसाद, सायंकाल चाय प्रसाद निशुल्क वितरित होता है। गौ सेवा और जन मानस की सेवा निरंतर होती है। गौ माता की चिकित्सा, चारा, पक्षियों को दाना, गरीबों को कंबल-कपड़े वितरण, जरूरतमंदों की सहायता – यह कार्य झंडेवाला मंदिर श्री हर श्री नाथ जी द्वारा सुचारू रूप से चल रहा है।

मर्यादा, दर्शन और उत्सव:
यह धाम मर्यादा का धाम कहलाता है। यहाँ काले वस्त्र वर्जित हैं, सिर ढकना अनिवार्य है। सभी भक्त दर्शन कर सकते हैं। निरंतर रोज बाबा श्री लक्ष्मण दास जी महाराज द्वारा अत्यंत अनुशासित और नियमित शिव अभिषेक, आरती, कीर्तन, रामायण और श्रीमद् भागवत पाठ होता है। सकारात्मक ऊर्जा, प्रभु नाम का गुणगान और सत्संग यहाँ की सबसे बड़ी पहचान है। महाशिवरात्रि और पित्र पक्ष की चौदस तिथि पर यहाँ 7 दिन तक भव्य मेला हर साल लगता है। हिंदू-सिख एकता का प्रतीक यह स्थान “एक भाव, एक रूप, अमीर-गरीब एक समान, जन सेवा और सब जन मानस का कल्याण” के सिद्धांत पर चलता है।

गुरु वचन और संदेश:
सिद्ध पीठ के अनुसार – “अंतरमन की सफाई और पवित्रता बहुत जरूरी है। अंतरमन निर्मल व पवित्र भाव हो तो ही प्रभु का वास जरूर होगा। कल्याण भी होगा। राम से बड़ा है राम का उत्तम नाम, कल्याणकारी”।

“कलयुग केवल नाम अधारा। सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।”

श्रद्धालुओं ने यात्रा पूर्ण कर अपने आप को अत्यंत भाग्यशाली महसूस किया। सभी ने कहा कि मंदिर श्री हर श्री नाथ जी स्थान बहुत पवित्र है और यहाँ दर्शन करना स्वयं में सौभाग्य की बात है।

| जय श्री राम | जय बाबा श्री रतन नाथ जी 🚩

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