हम कैसे होंगे कामयाब एक दिन टूट रहा विश्वास:पढ़ोगे लिखोगे कैसे बनोगे नवाब : खोसला


कहानी चरिथार्थ हैं कि बचपन में बुजुर्ग कहते थे पढोगे लिखोगे बनोगे नवाब, पर पेपर लीक?आजादी की कहानियो में हम होंगे कामयाब एक दिन, परन्तु कैसे, ज़ब लोकतंत्र का खुले आम लूट हो रही हैं।
नेशनल पैंथर्स पार्टी दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष राजीव जोली खोसला ने कहा पैंथर सुप्रीमो स्वर्गीय प्रो भीम सिंह हमेशा कहते थे इंशाल्लाह हम होंगे कामयाब एक दिन हमें पूरा है विश्वास, पढ़ लिख कर बुद्धिजीवि होना अब सपनो जैसा हो गया?!
क्या आज की परिस्थितिओं में हम मौजूदा सरकार के रहते हम अब सब सोच रहे हैं हम कैसे होंगे कामयाब एक दिन मौजूदा सरकार के रहते टूट रहा विश्वास मौजूदा सरकार से जनता की दूरियां बढ़ती जा रही है हर प्रकार से जनता के साथ अन्याय हो रहा है, सांसद, विधायक हो या पार्षद जीतने के बाद जनता से दूरियां बढ़ा लेते हैं। वह अपने व अपने सगे संबंधियों के लिए स्वार्थी बन जाते हैं और फिर चुनाव आते ही जनता को मीठे-मीठे लालच दे देते हैं,जनता फिर किसी पर तो विश्वास करतीं हैं !
करोड़ों लोगों की आस्था पर आघात लगा जब राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला जोरों पर उजागर हो रहा है सरकार जाँच की बात भी कर रही है मगर FIR बिना कार्रवाई का नतीजा क्या निकलता है ना आज पता लगेगा ना आज से पहले हुए घोटालों का पता लगा !पेट्रोल में मिलावट करने पर सख्त सजा का प्रवधान हैं लेकिन कानून अब गौण हो गया ज़ब सरकार खुद गन्ने के रस से बना पदार्थ पर्यावरण के नाम पर मिलाया जा रहा हैं, पहले 10-15,साल के वाहनों पर प्रतिबंध गरीबों पर चोट थीं लेकिन मंत्री साहब अपने बेटों के स्वार्थ में भारत की जनता के साथ धोखा कर रहे हैं। कहते कुछ है करते कुछ है जबकि पेट्रोलियम में किसी भी पदार्थ का बढ़ाना या घटना पेट्रोलियम मंत्री जी का काम है मगर लगता है कि यह कार्य भी सड़क मंत्री ही कर रहे हैं सड़क मंत्री की छवि जनता की नजर में बहुत साफ थी मगर अब धूमिल होती नजर आ रही है। जिस प्रकार विदेश मंत्री का कार्य आदरणीय प्रधानमंत्री जी करते हैं तो यह अलग-अलग विभागों के मंत्री बनाने की क्या जरूरत है सारा कार्यभार प्रधानमंत्री को ही संभाल लेना चाहिए करोड़ों रुपए बचेंगे !दिल्ली की मुख्यमंत्री साहिबा एक से चार बजे तक सभी को आराम करने की सलहा दें रही हैं, मगर हकीकत कुछ हो अगर 1 से 4 घंटे तक का आराम करेंगे तो मजदूर, मेहनतकश, ईमानदार को रोजाना की दिहाड़ी कैसे मिलेगी बोलने से पहले सोचना चाहिए सरकारी ऑफीस में तो हर वक्त आराम ही आराम होता है काम तो तभी होता है जब उनकी जेब गर्म होनी है, चाहे वह समय 10 बजे से पहले का हो या 6 बजे के बाद !मिलावटी खाद्य पदार्थ और दवाइयां सरकारी अधिकारियों के रहते खुलेआम बिक रही हैं ! नशीले पदार्थ की बिक्री भी हर राज्य में पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ चुकी है क्योंकि उसे बिकवाने वाला सरकारी तंत्र ही होता है मगर सरकारी तंत्र कहता है कि हम नहीं जानते। निजी अस्पतालों में लूटपाट बरकरार है सरकारी अस्पतालों में सुबह से ही लाइन लग जाती हैं मगर इलाज जिस प्रकार मिलता है वह हम और मंत्रिमंडल को भी मालूम है जगह-जगह आग लगने का कारण भी सरकारी तंत्र है क्योंकि उनकी देखरेख में अतिक्रमण इतना बढ़ जाता है की यातायात प्रभावित होता है पार्किंग के नाम पर भी पर भी जनता से लूटमार चल रही है जिस पर रोक लगाना नामुमकिन सा लग रहा है, क्योंकि इनके पीछे भी सरकारी अमला जुड़ा हुआ है।रेल मंत्रालय द्वारा जरूर से ज्यादा आधुनिक रेलगाड़िया चला दी गई मगर आरक्षण की प्रणाली जनता को आज तक समझ नहीं आई किसी भी ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं मिलती जबकि कई बार तो ट्रेन खाली होती हैं पीले नंबर की टैक्सियां जिन पर भारत सरकार या राज्य सरकार लिखा होता है सरेआम चल रही है कोई पूछताछ करने वाला नहीं हम मोदी सरकार से निवेदन करते हैं कि आप और आपका मंत्रिमंडल जनता के दुख दर्द को समझे अन्यथा सबको यह मानना पड़ेगा की जनता के विरोध होने के बाद भी आप किस प्रकार सत्ता हासिल करते हैं बहुत बड़ा सवालिया निशान हैनहीं हो सकते ऐसे कामयाब, न पढ़ने से बनेंगे नवाब।

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