
नई दिल्ली :1जून विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल ने एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में तथ्यों और आंकड़ों सहित तंबाकू सेवन के विनाशकारी प्रभावों को एक भावनात्मक और मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर हेड एंड नेक कैंसर से उबर चुके मरीजों ने अपने कैंसर से लड़ने के व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, जिसमें उपचार के दौरान झेली गई शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों का वर्णन किया गया। उनकी दृढ़ता और जीवटता की कहानियों ने उपस्थित लोगों पर गहरा प्रभाव डाला और कई लोगों को अपने विकल्पों पर पुनर्विचार करने तथा तंबाकू छोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। तंबाकू सेवन लगभग 17 प्रकार के कैंसर का कारण बनता है। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ‘पेशेंट जर्नी’ सत्र रहा, जिसमें सर्वाइवर्स ने कैंसर से अपनी लड़ाई, उपचार की पीड़ा और स्वस्थ होने की खुशी को ईमानदारी से साझा किया। इस अवसर पर में विशेषज्ञ पैनल चर्चाओं का नेतृत्व अतुल श्रीवास्तव और कनिका सूद शर्मा ने किया, जिसमें तंबाकू-निरोध के लिए शुरुआती हस्तक्षेप, समय पर परामर्श और पेशेवर सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में अस्पताल स्टाफ और एक मरीज द्वारा दी गई संगीत प्रस्तुतियों ने माहौल को सकारात्मकता, प्रेरणा और आशा से भर दिया।चिकित्सकीय दृष्टिकोण साझा करते हुए डॉ. शुभम गर्ग, निदेशक सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, ने कहा कि तंबाकू से जुड़े कैंसर सबसे अधिक रोके जा सकने वाले कैंसरों में शामिल हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्षों तक तंबाकू सेवन के बाद भी इसे छोड़ने से कैंसर के खतरे में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और उपचार के परिणाम बेहतर हो सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने तंबाकू से जुड़े आम भ्रमों को दूर किया और यह स्पष्ट किया कि किसी भी चरण में तंबाकू छोड़ने से स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं। एक प्रतीकात्मक और प्रभावशाली क्षण में सभी उपस्थित लोगों ने तंबाकू छोड़ने और अपने समुदाय में दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की सामूहिक शपथ ली, जो तंबाकू-मुक्त भविष्य की दिशा में साझा संकल्प को दर्शाता है। धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से निवारक स्वास्थ्य देखभाल को लगातार बढ़ावा दे रहा है, ताकि तंबाकू-जनित बीमारियों के बोझ को कम किया जा सके।

