दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा गर्मियों की छुट्टियों में विद्यार्थियों के लिए व्यापक स्तर पर पाँचवें गुरमत शिविर लगाने की तैयारी पूरी।

कुलवंत कौर की रिपोर्ट :

शिविरों का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुरसिखी जीवन शैली, गुरमुखी भाषा, अपने समृद्ध विरसे, इतिहास और गुरमत के अनुसार जीवन जीना सिखाना है।

नई दिल्ली, 26 मई: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पाँच वर्ष पहले शुरू की गई अपनी मुहिम के अंतर्गत इस बार स्कूलों की गर्मियों की छुट्टियों में पाँचवें गुरमत शिविर लगाने की व्यापक स्तर पर तैयारी पूरी कर ली है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए कमेटी के प्रधान सरदार हरमीत सिंह कालका, महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों और धर्म प्रचार कमेटी के अध्यक्ष सरदार जसप्रीत सिंह करमसर ने बताया कि इस बार गुरमत शिविरों में 25 हजार से अधिक विद्यार्थियों के शामिल होने की संभावना है। ये शिविर 1 जून से शुरू होंगे, जिनका समापन 20 और 21 जून को भाई लखी शाह वंजारा हॉल, गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब परिसर में होगा।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में पहली बार गुरमत शिविर लगाए गए थे और उस समय 4 हजार बच्चों ने भाग लिया था। वर्ष 2023 में 9 हजार, वर्ष 2024 में 12 हजार, वर्ष 2025 में 16 हजार तथा सभी स्थानों के शिविरों को मिलाकर कुल 20 हजार विद्यार्थियों ने भाग लिया था। इस बार वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 25 हजार होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि गुरु साहिबानों के समय देवनागरी, अरबी और फारसी भाषाएँ प्रचलित थीं, लेकिन गुरु साहिबानों ने 35 अक्षरी गुरमुखी लिपि की शुरुआत की और गुरबाणी की रचना की। उन्होंने कहा कि इन शिविरों का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुरसिखी जीवन शैली, गुरमुखी भाषा, अपने समृद्ध विरसे, इतिहास और गुरमत के अनुसार जीवन जीना सिखाना है।

उन्होंने बताया कि इस बार 1 हजार गरीब स्वयंसेवकों ने शिविरों में सेवा देने के लिए पंजीकरण करवाया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और अरुणाचल प्रदेश से भी मांग आई है, जहाँ ये शिविर लगाए जाएंगे। कुल 125 शिविर लगाए जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पंजाब से भी ऐसे शिविर आयोजित करने की मांग आई है।

उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है और इस बार युद्धों का इतिहास पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि सहजधारी परिवारों ने भी पूछा है कि क्या वे अपने बच्चों को भेज सकते हैं, तो उन्हें कहा गया है कि वे अवश्य अपने बच्चों को भेजें।

उन्होंने कहा कि शिविरों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र और ट्रॉफियाँ दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि एक बच्चे को पहले 14 बाणियाँ कंठ होने पर कमेटी की ओर से 51 हजार रुपये का इनाम दिया गया था। अब उस बच्चे को 21 बाणियाँ कंठ हो चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य धर्म का प्रचार और प्रसार करना है और इस दिशा में बहुत बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उनका लक्ष्य विद्यार्थियों को गुरमुखी जीवन मर्यादा, गुरबाणी और गुरमुखी भाषा से जोड़ना तथा सिखों के गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाना है।

उन्होंने बताया कि हर वर्ष अभिभावकों में इन शिविरों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और अब माता पिता तथा विद्यार्थी इन शिविरों की तिथियों का इंतजार करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इस मुहिम को केवल राष्ट्रीय राजधानी या देश के राज्यों तक ही नहीं बल्कि विदेशों तक ले जाने के लिए भी वे प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे ऐसे प्रयासों का अधिक से अधिक लाभ उठाएँ।

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