
दिल्ली, 26 मई, 2026 : रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारत में रियल एस्टेट सेक्टर की लंबी अवधि की विकास संभावनाएं अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे बड़े राज्य मिलकर भारत की जीडीपी में लगभग 25% योगदान देते हैं। तमिलनाडु करीब 9% हिस्सेदारी के साथ देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य है, जबकि कर्नाटक की हिस्सेदारी लगभग 8% है। कर्नाटक की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से आईटी और आईटीईएस सेक्टर पर आधारित है, जबकि तमिलनाडु की आर्थिक संरचना अधिक विविधतापूर्ण है। यहां रियल एस्टेट, आईटी, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई बड़े उद्योग मौजूद हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अब रियल एस्टेट सेक्टर अधिक संगठित और पारदर्शी होता जा रहा है, जिसके चलते पेशेवर रूप से प्रबंधित निवेश प्लेटफॉर्म्स, एआईएफ और आरईआईटी में निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है। निवेशक अब अल्पकालिक लाभ के बजाय लंबे समय की संभावनाओं और मजबूत आर्थिक आधार वाले बाजारों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
शरद मित्तल, फाउंडर एवं सीईओ, अरण्या रियल एस्टेट फंड एडवायजर्स ने कहा , “रियल एस्टेट निवेश सीधे तौर पर शहरीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रोजगार सृजन और घरों की मांग जैसे लंबे समय के आर्थिक संकेतकों से जुड़ा होता है। जिन बाजारों में मजबूत औद्योगिक ढांचा और आर्थिक गतिविधियां होती हैं, वे निवेशकों के लिए लंबे समय तक आकर्षक बने रहते हैं।”
तमिलनाडु आज भी भारत के सबसे बड़े औद्योगिक और ऑटोमोबाइल निर्माण केंद्रों में शामिल है। राज्य की मजबूत और विविध अर्थव्यवस्था, तेजी से विकसित हो रहे शहर और लगातार बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश आने वाले समय में हाउसिंग और रियल एस्टेट की मांग को मजबूती देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक बदलावों का इस दीर्घकालिक विकास पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, शहरीकरण और रोजगार के बढ़ते अवसर दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों में आवासीय और व्यावसायिक रियल एस्टेट की मांग को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं।
रियल एस्टेट बाजार पर टिप्पणी करते हुए शरद मित्तल ने आगे कहा, “दक्षिण भारत ने हर तरह के बाजार उतार-चढ़ाव के दौरान अपनी मजबूती लगातार साबित की है। मैन्युफैक्चरिंग आधारित विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और लगातार बनी हुई हाउसिंग डिमांड इस क्षेत्र में निवेशकों के लंबे समय के भरोसे को मजबूत कर रही है।”
दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों में लगातार बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और शहरी विकास के चलते आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र रियल एस्टेट निवेश और पूंजी निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बना रहेगा।

