योग,ज्योतिष और आयुर्वेद का महाकुंभ हुआ तालकटोरा स्टेडियम रचा गया इतिहास: खोसला

नई दिल्ली,: श्री योग अभ्यास आश्रम ट्रस्ट (स्यात) द्वारा तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित स्यात योग सम्मेलन आज उत्साह, ऊर्जा और आध्यात्मिकता के अद्भुत संगम के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्वामी अमित देव जी के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 3000 से अधिक लोगों की प्रभावशाली उपस्थिति रही, जिसने इसे एक बड़े जनआंदोलन का रूप दे दिया।
एमआरवी समूह के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में ‘अलमाइटी अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन’ की भी सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम का मुख्य विषय “अपनी ऊर्जा को संतुलित करें, अपने जीवन को रूपांतरित करें” रहा, जिसने योग के व्यापक स्वरूप को सामने रखा।


सम्मेलन में योग और ध्यान सत्र, आध्यात्मिक प्रवचन तथा ज्योतिष, अंक विद्या और समग्र उपचार पर आधारित इंटरैक्टिव सत्रों का आयोजन किया गया। डॉ मेघा शर्मा जी की पहल ‘अलमाइटी अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन’ के सहयोग से कार्यक्रम में जोइटस वास्तु और स्कैनिंग जैसी विधाओं के दिग्गज भी मौजूद रहे जिसमे पंडित सतीश शर्मा, डॉ वाय राखी, इला गोस्वामी सहित अनेकों हस्तियों ने अपने विचार साझा किये। यह आयोजन पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक वेलनेस अप्रोच के बीच एक प्रभावी सेतु बनकर उभरा, जिसने आध्यात्मिक संवाद और ज्ञान-विनिमय के लिए एक व्यापक मंच प्रदान किया।


कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि से हुई, जिसके बाद विभिन्न सत्रों ने उपस्थित जनसमूह को न केवल प्रेरित किया, बल्कि उन्हें जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन के लिए जागरूक भी किया।
सम्मेलन के प्रमुख आकर्षणों में विश्व प्रसिद्ध जादूगर सम्राट शंकर की प्रस्तुति रही, जिन्होंने अपनी अनोखी जादुई कला और दर्शकों के साथ संवाद के माध्यम से पूरे सभागार को रोमांचित कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मनोरंजन का एक अलग आयाम जोड़ दिया।
इसके साथ ही स्यात द्वारा प्रस्तुत योग प्रदर्शन ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया, जिसमें षटकर्म क्रिया के पांच अंगों का जीवंत प्रदर्शन किया गया। इस प्रस्तुति ने प्राचीन योग परंपरा की गहराई और वैज्ञानिकता को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। मौजूद रहे डॉ राजेश्वर दास प्रसाद जी महाराज!
एमआर विवेकानंद स्कूल के बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी सभी का मन मोह लिया। बच्चों की ऊर्जा, अनुशासन और प्रस्तुति ने कार्यक्रम के वातावरण को और अधिक जीवंत बना दिया।


इस अवसर पर स्वामी अमित देव जी ने अपने संबोधन में कहा,
“योग मतलब जोड़ना है, और यही इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है—योग, आयुर्वेद, वास्तु और ज्योतिष का संगम।”
उनके इस संदेश ने सम्मेलन की मूल भावना को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम में ओ. पी. बब्बर, प्रो. ए. बी. शुक्ला सहित कई गणमान्य व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और वक्ताओं ने योग को एक समग्र जीवन पद्धति के रूप में अपनाने पर बल दिया। संस्था के सचिव राजीव जोली खोसला ने
कहां, यह सम्मेलन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि शरीर, मन और चेतना के संतुलन की एक संपूर्ण प्रक्रिया है। स्यात द्वारा किए जा रहे प्रयास यह दर्शाते हैं कि प्राचीन ज्ञान आज भी आधुनिक जीवन में उतना ही प्रासंगिक है।

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