भारत में तेज़ी से बढ़ रहे ओल्डर मिलेनियल्स और जैन एक्स के बीच क्रिप्टो अडॉप्शन का चलन: कॉयनस्विच की Q1 रिपोर्ट


देश भर में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र क्रिप्टो अडॉप्शन में सबसे आगे बने हुए हैं

नेशनल, 21 अप्रैल, 2026: भारत के सबसे बड़े क्रिप्टो निवेश एवं ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म कॉयनस्विच ने आज अपनी मुख्य रिपोर्ट ‘इंडियाज़ क्रिप्टो पोर्टफोलियोः हाओ इंडिया इन्वेस्ट्स’ का Q1 2026 संस्करण जारी किया। जिसमें देश भर के 2.5 करोड़ से अधिक निवेशकों की गतिविधियों के आधार पर महत्वपूर्ण रूझानों पर रोशनी डाली गई है। रिपोर्ट के परिणाम मार्केट की परिपक्वता का स्पष्ट संकेत देते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार 26-35 वर्ष के निवेशक 48 फीसदी की भागीदारी के साथ सबसे आगे बने हुए हैं, वहीं 35 से अधिक उम्र वाला सेगमेन्ट में तेज़ी से उभर कर आ रहा है, इसमें मार्केट में प्रवेश करने वाले जैन एक्स और अन्य मिलेनियल्स का बड़ा योगदान है।

जहां एक ओर युवा अक्सर शुरूआती प्रयोग के दौर में ही मार्केट में प्रवेश कर जाते हैं, इसके विपरीत जैन एक्स और बड़ी उम्र के मिले नियल्स विनियामक स्प्ष्टता और दीर्घकालिक मूल्य पर भरोसा होने के बाद ही नए फाइनैंशियल असेट्स को अपनाते हैं। इस बदलाव से साफ है कि भारत में क्रिप्टो अब शुरुआती अडॉप्शन से आगे बढ़कर अधिक परिपक्व भागीदारी के दौर में प्रवेश कर रहा है, जहाँ अधिक वित्तीय अनुभव और पूंजी वाले निवेशक बाज़ार में प्रवेश कर रहे हैं।

“इस तिमाही में एक बात जो सबसे ज़्यादा उभरकर सामने आई-वह सिर्फ़ यह नहीं है कि कौन निवेश कर रहा है, बल्कि यह भी है कि निवेश कैसे किया जा रहा है। 35 वर्ष से अधिक उम्र के निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, ’डिप बाइंग’ (कीमतों में गिरावट आने पर खरीदारी) में बढ़ोतरी और लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की प्रवृत्ति- ये सभी बदलाव पहले से अधिक परिपक्व मार्केट का संकेत हैं,“ कॉयनस्विच के सह-संस्थापक आशीष सिंघल ने कहा।

भौगोलिक रूप से देखा जाए तो उत्तर प्रदेश (लगभग12.9 फीसदी) और महाराष्ट्र (लगभग 12.3 फीसदी) क्रिप्टो अडॉप्शन में सबसे आगे बने हुए हैं। जिससे देश में क्रिप्टो अपनाने वाले मुख्य मार्केट्स के रूप में उनकी स्थिति और मज़बूत हुई है।

बिटकॉयन भारत के क्रिप्टो इकोसिस्टम की रीढ़ बना हुआ है; यह ट्रैक की गई सभी असेट्स में पोर्टफोलियो के कुल आवंटन का 9.2 फीसदी हिस्सा बनाता है, और साथ ही कुल ट्रेड्स में 17.4 फीसदी हिस्सेदारी के साथ ट्रेडिंग एक्टिविटी में भी सबसे आगे है। ये आंकड़े एक भरोसेमंद लॉन्ग-टर्म होल्डिंग असेट और एक पसंदीदा ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट के रूप में बिटकॉयन की स्थिति को और मज़बूत बनाते हैं। बिटकॉयन के साथ-साथ, डोजकॉयन (6.0 फीसदी) और शिबा इनु (4.4 फीसदी) जैसे मीम कॉइन्स भी भारतीय पोर्टफोलियो में अपनी महत्वपूर्ण स्थिति को बनाए हुए हैं।

अब आते हैं ट्रेडिंग के व्यवहार पर जो भारतीय निवेशकों के अनूठे रूझानों को दर्शाता है, जहां सबसे ज़्यादा ट्रेडिंग रात 10 से 11 बजे के बीच होती है। देर रात होने वाली यह ट्रेडिंग इस बात का संकेत है कि निवेशक अपने काम के शेड्यूल के अनुसार क्रिप्टो में निवेश करते है, बहुत से मार्केट आवर्स के बाद निवेश करते हैं।

डिजिटल असेट्स के 24/7 उपलब्ध होने के बावजूद, सप्ताहान्त की तुलना में सप्ताह के तीन दिन परफोर्मेन्स बेहतर रहता है; यह इस बात का संकेत है कि निवेशक नियमित तरीके से ट्रेडिंग करते हैं, ना कि मौका मिलने पर।

5 और 6 फरवरी को ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने चरम पर रहा, जबकि इसीदौरान मार्केट में गिरावट देखी गई; यह इस बात का संकेत है कि कीमतों में गिरावट के समय ज़्यादा निवेश किया गया।

निवेशक, लम्बे समय के लिए निवेश करना ज़्यादा पसंद करते हैं; 61.3 फीसदी निवेशक निवेश को एक साल से अधिक समय तक के लिए रखते हैं; जबकि 28.3 फीसदी निवेशक मोमेंटम ट्रेडिंग करते हैं और 20.4 फीसदी निवेशक ’डिप-बाइंग’ (कीमत गिरने पर निवेश) करते हैं। साफ है कि निवेशक अब सोच-समझ कर निवेश कर रहे हैं, अचानक निवेश के फैसले ले नहीं ले रहे।

विभिन्न क्षेत्रों में भी निवेश के अलग-अलग तरीके सामने आए हैंः
• कर्नाटक में ब्लू-चिप असेट्स में सबसे ज़्यादा भरोसा दिखाया गया है, पोर्टफोलियो का 32 फीसदी हिस्सा इसी में निवेश किया गया है।
• बिहार में स्मॉल-कैप एसेट्स में सबसे ज़्यादा भागीदारी देखी गई है।
• 59.1 फीसदी महिला भागीदारी के साथ आंध्र प्रदेश सबसे आगे है।
• हरियाणा में पुरुषों की भागीदारी सबसे ज़्यादा दर्ज की गई है।

देश भर में, पोर्टफ़ोलियो अब ब्लू-चिप, लार्ज-, मिड- और स्मॉल-कैप असेट्स के संतुलित मिश्रण को दर्शाते हैं, और निवेशक संरचित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के परिणाम सोच-समझकर और ज़िम्मेदारी से निवेश करने के महत्व को भी दर्शाते हैं, क्योंकि ज़्यादा से ज़्यादा निवेशक अब योजना के साथ और लम्बी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं।

नोटः ये जानकारी पूरी तरह से कॉयनस्विच के यूज़र डेटा पर आधारित है और इसमें किसी दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर होने वाली ट्रेडिंग या निवेश गतिविधियों की जानकारी शामिल नहीं है।

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