
नई दिल्ली/हरिद्वार, 27 मार्च। संस्था के सचिव राजीव जोली खोसला ने बताया राम नवमी के पावन अवसर पर 26 मार्च 2026 (गुरुवार) को योग योगेश्वर महाप्रभु श्री रामलाल जी भगवान का भव्य जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। इस अलौकिक आयोजन में देशभर से हजारों श्रद्धालुओं, साधकों एवं योग साधना में रुचि रखने वाले भक्तों ने भाग लेकर अपनी गहन आस्था एवं समर्पण भाव प्रकट किया।

प्रातःकालीन बेला में कार्यक्रम का शुभारंभ पावन अभिषेक, दिव्य आरती, वेदमय हवन एवं कलश पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। मंत्रोच्चारण एवं यज्ञ की पवित्र अग्नि से सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा। इसके पश्चात प्रातः 8:00 बजे श्री पूर्णानन्द आश्रम से हर की पौड़ी तक एक भव्य एवं आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, गुरुदेव की आरती एवं योग प्रदर्शन के माध्यम से अपनी भक्ति का भावपूर्ण प्रदर्शन किया। शोभायात्रा के दौरान सम्पूर्ण मार्ग भक्तिमय हो उठा और स्थान-स्थान पर श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा एवं स्वागत किया गया।
इस पावन अवसर पर योगेश्वर देवीदयाल महाराज जी के परम प्रिय शिष्य एवं विश्वविख्यात जादूगर सम्राट शंकर जी की गरिमामयी उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। अपने उद्बोधन में उन्होंने भावविभोर होकर बताया कि वर्ष 1971 में उन्हें योग योगेश्वर देवीदयाल जी महाराज से दीक्षा प्राप्त हुई थी, और उसी क्षण से उनके जीवन की दिशा ही बदल गई। उन्होंने कहा कि गुरुदेव की कृपा और आशीर्वाद से उनके जीवन में अद्भुत परिवर्तन आया, जिसने उन्हें सफलता, संतुलन और आध्यात्मिक समृद्धि से परिपूर्ण कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जो कुछ भी उन्हें जीवन में प्राप्त हुआ है, वह सब गुरुकृपा का ही प्रतिफल है।

स्वामी अमित देव के पावन सान्निध्य ने इस आयोजन को विशेष आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की। उनके सान्निध्य में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गहन शांति एवं दिव्यता का अनुभव किया। उनके साथ योगाचार्य नित्यानंद एवं योगाचार्य कार्तिकेय की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा को और अधिक बढ़ाया।
इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रद्धालुओं ने भी इस आयोजन को भक्ति और संगीत से सराबोर कर दिया। जगाधरी से श्री राजेंद्र बजाज, श्री राजेंद्र जी बत्रा तथा टोहाना से श्री सुरेश मेहता जी ने गुरुदेव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा को भजनों के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनके भावपूर्ण भजनों ने सम्पूर्ण वातावरण को और अधिक दिव्य, भावविभोर एवं आध्यात्मिक बना दिया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु गहरे भक्ति रस में डूब गए।
सिरसा से पधारे श्री आर. के. भारद्वाज एवं श्री सूरज भारद्वाज की गरिमामयी उपस्थिति ने भी आयोजन की शोभा को बढ़ाया। उनकी सहभागिता ने इस आध्यात्मिक महोत्सव को और अधिक व्यापक एवं प्रभावशाली स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान महाप्रभु श्री रामलाल जी भगवान के जीवन, उनकी दिव्य लीलाओं एवं उनकी शिक्षाओं पर आधारित प्रेरणादायक प्रवचनों का आयोजन किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को योग, भक्ति एवं आत्मसाक्षात्कार के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी। संत परंपरा में वर्णित महर्षि काकभुशुंडी की दिव्य भविष्यवाणी का स्मरण करते हुए वक्ताओं ने महाप्रभु के अवतरण को लोककल्याण एवं सनातन धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
इस भव्य आयोजन का सफल संचालन Shri Yog Abhyas Ashram Trust (SYAAT) द्वारा किया गया, जो वर्ष 1888 में प्रथम गुरु गद्दी योगेश्वर रामलाल भगवान द्वारा स्थापित एक पवित्र एवं प्रतिष्ठित संस्था है। अखंड गुरु परंपरा में स्थापित यह संस्थान योग के प्रामाणिक विज्ञान के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक प्रसार हेतु निरंतर समर्पित है।
कार्यक्रम के सफल संचालन एवं समापन में ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री महेश चंद गोयल एवं श्री रवि भूषण चावला की विशेष भूमिका रही। उन्होंने आयोजन के अंत में उपस्थित सभी संतों, अतिथियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उनके कुशल प्रबंधन एवं समर्पण से यह भव्य आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका।
समग्र रूप से यह भव्य जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक दिव्य आध्यात्मिक संगम के रूप में स्थापित हुआ, जिसने उपस्थित प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय में भक्ति, शांति, ऊर्जा एवं सकारात्मकता का संचार किया। यह आयोजन आने वाले समय में भी समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करने का एक प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

