
नई दिल्ली, 09 फरवरी, 2026: भारत का पहला एआई-संचालित डिजिटल फूड लेबलिंग SaaS प्लेटफॉर्म, लेबलब्लाइंड® सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने भारत में खाद्य लेबलिंग दावों के सबसे व्यापक स्वतंत्र मूल्यांकनों में से एक के निष्कर्ष जारी किए हैं। “भारत के पैकेज्ड फूड उद्योग में लेबलिंग दावों पर लेबलब्लाइंड® अध्ययन 2025–26” से पता चलता है कि विश्लेषित 5,058 लेबलिंग दावों में से 33.6% दावे या तो गैर-अनुपालक (21.3%) थे या पर्याप्त प्रमाण के अभाव में ब्रांड सत्यापन की आवश्यकता वाले (12.3%) पाए गए। ये दावे FSSAI विनियमों, ASCI दिशानिर्देशों तथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रमुख प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाए गए।
अध्ययन में 18 व्यापक रूप से उपभोग की जाने वाली खाद्य श्रेणियों को शामिल किया गया, जिनमें खाद्य तेल, घी और शहद जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लेकर प्लांट-आधारित पेय, रेडी-टू-ईट भोजन और पैकेज्ड स्नैक्स जैसी नई श्रेणियाँ सम्मिलित थीं।
निष्कर्ष दर्शाते हैं कि घरेलू उपयोग की सामान्य खाद्य श्रेणियाँ सर्वाधिक प्रभावित हैं। अध्ययन में पाया गया कि शहद पर किए गए 80% स्वास्थ्य दावे, घी पर 65.5%, चाय और हर्बल इन्फ्यूजन पर 54.3% तथा खाद्य तेलों पर 52.9% दावे लेबलिंग अनुपालन जांच में असफल रहे। विश्लेषण से यह भी सामने आया कि नई और नवाचार-आधारित श्रेणियाँ भी गैर-अनुपालक हैं — प्लांट-आधारित पेयों के 29% दावे, रेडी-टू-ईट भोजन के 28.6% और पैकेज्ड स्नैक्स के 27.3% दावे गैर-अनुपालक पाए गए। यह संकेत देता है कि तीव्र उत्पाद नवाचार की गति अनुपालन की कठोरता से आगे निकल रही है।
इन निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए, लेबलब्लाइंड® की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डॉ. राशिदा वापीवाला ने कहा, “FAO खाद्य लेबलिंग को उपभोक्ता स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में मान्यता देता है, जो खाद्य सुरक्षा और पोषण संबंधी सूचित विकल्पों को सक्षम बनाता है। हालांकि, हमारा अध्ययन दर्शाता है कि भारत के पैकेज्ड फूड बाजार में एक-तिहाई से अधिक लेबलिंग दावे या तो अनुपालन जांच में विफल हो रहे हैं या पर्याप्त प्रमाण के अभाव में हैं। वैश्विक व्यापार के विस्तार और उपभोक्ताओं के सीधे उत्पादकों से दूर होने के साथ, खाद्य लेबल उपभोक्ता के साथ संवाद का सबसे महत्वपूर्ण और त्वरित माध्यम बन गए हैं। ऐसे में लेबल पर स्पष्टता, सटीकता और विश्वसनीयता केवल एक नियामकीय आवश्यकता नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की अनिवार्यता है।”
अध्ययन के निष्कर्ष व्यापक नियामकीय रुझानों की भी पुष्टि करते हैं। ASCI की अर्धवार्षिक शिकायत रिपोर्ट (अप्रैल–सितंबर 2025) में खाद्य एवं पेय क्षेत्र को शीर्ष पांच उल्लंघनकर्ताओं में शामिल किया गया, जिनमें अधिकांश मामले स्वास्थ्य और पोषण दावों से संबंधित थे। यह अधिक सख्त निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
लेबलब्लाइंड® ने पैकेज्ड फूड उद्योग से आग्रह किया है कि वह स्वास्थ्य और पोषण दावों के उपयोग में अधिक अनुशासन अपनाकर दावा शासन (क्लेम गवर्नेंस) को सुदृढ़ करे, विशेषकर दैनिक उपयोग की खाद्य वस्तुओं के संदर्भ में, तथा उत्पाद विकास के प्रारंभिक चरण में ही लेबलिंग अनुपालन को शामिल करे। कंपनी ने यह भी बल दिया कि नियामकीय निगरानी के सख्त होने और भ्रामक दावों के प्रति उपभोक्ता जागरूकता बढ़ने के मद्देनज़र, मजबूत आंतरिक जांच के लिए डिजिटलीकरण आवश्यक है।

