
नई दिल्ली: बजट समग्र रूप से देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला और विकासोन्मुख प्रतीत होता है, किंतु छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग की प्रत्यक्ष अपेक्षाएँ इससे केवल आंशिक रूप से ही पूरी हो पाई हैं। विशेष रूप से मध्य एवं छोटे व्यापारियों को जिस ठोस समर्थन की आशा थी, उस पर यह बजट पूरी तरह खरा नहीं उतरता।
इस बजट की सबसे बड़ी कमी यह है कि छोटे व्यापारियों, दुकानदारों एवं लघु उद्योगों (MSMEs) के लिए किसी विशेष राहत पैकेज या ठोस प्रोत्साहन की घोषणा नहीं की गई। व्यापार विस्तार के लिए आसान ऋण व्यवस्था, कर प्रणाली में राहत अथवा परिचालन लागत कम करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है।
आज का मध्यम वर्गीय दुकानदार—जो भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक रीढ़ है—लगातार बढ़ती लागत, सीमित मार्जिन और प्रतिस्पर्धा के दबाव से जूझ रहा है। ऐसे समय में उनसे उम्मीद थी कि बजट उनके लिए व्यावहारिक और प्रत्यक्ष सहायता लेकर आएगा।
संक्षेप में, यह बजट दीर्घकालिक विकास की दिशा में एक कदम अवश्य है, परंतु छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए यह अभी भी आशा से कम और राहत में सीमित सिद्ध हुआ है।

