जन प्रथम, गरीब-हितैषी बजट ‘विकसित भारत’ की दिशा में मील का पत्थर : विधानसभा अध्यक्ष: विजेंद्र गुप्ता।

बजट 2026–27 में विश्वास-आधारित शासन और भविष्य-तैयार भारत की झलक है: श्री गुप्ता।

नई दिल्ली, 1 फरवरी 2026:दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने आज वित्त वर्ष 2026–27 के लिए माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किए गए लगातार नौवें केंद्रीय बजट पर उन्हें बधाई देते हुए इसे ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने के साथ-साथ लघु एवं मध्यम उद्योगों को सुदृढ़ करने, मध्यम वर्ग को सशक्त बनाने तथा विश्वास-आधारित शासन के माध्यम से अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एक ठोस रोडमैप प्रस्तुत करता है। यह बजट उच्च विकास दर को समावेशी विकास के साथ संतुलित करते हुए समाज के सभी वर्गों तक विकास के लाभ पहुँचाने का प्रयास करता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने अवसंरचना क्षेत्र में ₹12.2 लाख करोड़ के रिकॉर्ड सार्वजनिक पूंजीगत व्यय का स्वागत करते हुए कहा कि यह विशाल निवेश आधुनिक एवं प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत भौतिक और डिजिटल आधार तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि अवसंरचना पर निरंतर बल से रोजगार सृजन को गति मिलेगी, उत्पादकता बढ़ेगी और विभिन्न क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा, जिससे देश की समग्र आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

श्री गुप्ता ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026–27 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के दूरदर्शी नेतृत्व और 2047 तक एक विकसित, आत्मनिर्भर और समावेशी भारत के संकल्प को साकार करने की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री का विकास दृष्टिकोण चार प्रमुख स्तंभों—गरीब, किसान, युवा और महिला—पर आधारित है और यह बजट अवसंरचना, विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, मानव पूंजी और सामाजिक सुरक्षा में निरंतर निवेश के माध्यम से इस दृष्टि को ठोस नीतियों में रूपांतरित करता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने डीप-टेक और उन्नत विनिर्माण पर रणनीतिक फोकस की सराहना करते हुए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 की शुरुआत तथा खनिज-समृद्ध राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर के विकास को देश की तकनीकी संप्रभुता को सुदृढ़ करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि ये पहलें भारत को उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर करेंगी। एमएसएमई, निर्यात और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कंटेनर विनिर्माण योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स योजना, बायोफार्मा को प्रोत्साहन तथा कूरियर निर्यात सीमा हटाने जैसे उपायों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे भारतीय उद्योग वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़ेगा और छोटे उद्यमियों व कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच मिलेगी।

बजट की जन-हितैषी और गरीब-हितैषी भावना को रेखांकित करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि गरीबों, किसानों, पशुपालकों और महिलाओं पर केंद्रित पहलें समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने प्रौद्योगिकी-सक्षम कृषि परामर्श सेवाओं के लिए भारत-विस्तार (भारत-VISTAAR) कार्यक्रम, मत्स्य क्षेत्र को प्रोत्साहन देने हेतु जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास, पशुपालन में उद्यमिता समर्थन, नारियल मिशन तथा काजू, कोको और चंदन जैसी फसलों को वैश्विक प्रीमियम मूल्य श्रृंखलाओं के रूप में विकसित करने के प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने उभरते क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु उच्च शिक्षा के एसटीईएम संस्थानों में छात्रावासों की स्थापना सहित ‘नारी शक्ति’ पर विशेष बल की भी सराहना की।

सामाजिक अवसंरचना और शहरी विकास के संदर्भ में विधानसभा अध्यक्ष ने जिला अस्पतालों में डे-केयर कैंसर केंद्रों की स्थापना, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन तथा आवश्यक कैंसर दवाओं पर सीमा शुल्क छूट जैसे निर्णयों को परिवारों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने माध्यमिक विद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स की स्थापना, औद्योगिक कॉरिडोरों के समीप विश्वविद्यालय टाउनशिप का विकास, सिटी इकोनॉमिक रीजन, टियर-II और टियर-III शहरों के लिए अर्बन ग्रोथ फंड, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, मंदिर-नगर विकास तथा यात्रा, शिक्षा और चिकित्सा प्रयोजनों के लिए टीसीएस के युक्तिकरण जैसे प्रावधानों को मानव पूंजी और शहरी विकास को नई गति देने वाला बताया।

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