
कालका ने ‘डीप स्टेट’ के करिंदे की भूमिका निभाई: जीके
कालका ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को बदनीयत से प्रपंच करने के लिए इस्तेमाल किया
नई दिल्ली (25 अक्टूबर 2025) दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की आम बैठक में आज तीन पूर्व अध्यक्षों की प्राथमिक सदस्यता कथित रूप से समाप्त करने के फैसले पर राजनीति गर्मा गई है। पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका की नीयत, नीति और कानूनी अज्ञानता पर तीखा जुबानी हमला बोला है। जीके ने कहा कि कालका जानते थे कि दिल्ली कमेटी अधिनियम में किसी निर्वाचित सदस्य की सदस्यता समाप्त करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए उन्होंने आज मीडिया के सामने स्वीकार किया कि इस कृत्य के लिए उन पर दिल्ली सरकार का दबाव था। इस अवैध और अनैतिक कार्य को अंजाम देने और अपनी कुर्सी को सुरक्षित रखने के लिए, कालका ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार द्वारा आम बैठक पर लगाए गए प्रतिबंध की अनदेखी करते हुए, ‘डीप स्टेट’ के करिंदे की भूमिका निभाना अपने राजनीतिक करियर के लिए फायदे का सौदा समझा है। जीके ने कालका को चुनौती दी कि वह सरना बंधुओं और मेरी सदस्यता समाप्त करने का सरकारी गजट नोटिफिकेशन दिखाए। जबकि, अपने आका को खुश करने के लिए कालका ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की उपस्थिति का इस्तेमाल बदनीयत से प्रपंच करने के लिए किया है। इतना ही नहीं, हरमीत सिंह कालका तो ‘डीप स्टेट’ के करिंदे के तौर पर अपने दादा जसवंत सिंह कालका से भी आगे बढ़ गए हैं। दादा ने तो अपने प्रधानीकाल के समय केवल श्री अकाल तख्त साहिब को चुनौती दी थी, लेकिन पोते ने तो श्री अकाल तख्त साहिब के साथ-साथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब की महत्ता और श्रद्धा के साथ भी खिलवाड़ किया है। क्योंकि मेरी सदस्यता की कथित समाप्ति के पीछे कौम के लिए गूंजती मेरी आवाज को दबाने की साजिश रची गई है।

जीके ने घोषणा की कि वह दिल्ली कमेटी द्वारा की गई इस धोखाधड़ी के आरोपियों के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने, मानहानि की कानूनी कार्रवाई और श्री अकाल तख्त साहिब पर धार्मिक अनादर की शिकायत दर्ज कराएंगे। कालका को बेवकूफ करार देते हुए जीके ने कहा कि संगतों द्वारा चुने गए पूर्व कमेटी अध्यक्षों व हमरुतबा साथी सदस्यों को कर्मचारियों को जारी होने वाले मेमोरेंडम जारी करके कालका ने अपनी नासमझी व प्रशासनिक क्षमता की कमी उजागर की है। जीके ने आरोप लगाया कि हमारे खिलाफ की गई यह कार्रवाई शहीदी शताब्दी के कार्यक्रमों को खराब करने और अन्य महत्वपूर्ण पंथक मुद्दों से संगत का ध्यान भटकाने की कवायद है। क्योंकि कालका ने एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी द्वारा आम सभा स्थगित करने और जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा आम सभा को रोकने के लिए भेजे गए अलग-अलग पत्रों को नजरंदाज करके सरकार की मजबूरी को पहल दी है। जीके ने कालका को चुनौती देते हुए कहा कि वह कल भी सदस्य थे, आज भी सदस्य हैं और कल भी सदस्य रहेंगे। क्योंकि मेरी सदस्यता केवल मेरे इस्तीफे, मृत्यु या चुनाव से ही समाप्त हो सकती है। इस अवसर पर एडवोकेट नगिंदर बेनीपाल ने दिल्ली कमेटी की पूरी कार्रवाई को कानूनी आधार पर गलत व मनगढ़ंत करार देते हुए इसे दिल्ली कमेटी एक्ट व नियमों की तौहीन बताया। क्योंकि दिल्ली गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय ने इस मामले में जारी अपने आदेश में कालका को पहले ही कहा था कि चूंकि जीके के खिलाफ सभी मामले अदालतों में लंबित हैं, इसलिए वह उनकी शिकायतों पर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। इस पत्र व्यवहार की प्रति निदेशालय के द्वारा जीके को भी भेजी गई है। इस अवसर पर दिल्ली कमेटी सदस्य परमजीत सिंह राणा, जतिंदर सिंह सोनू, सतनाम सिंह, महिंदर सिंह, सुरिंदर सिंह दारा और अकाली नेता डॉ. परमिंदर पाल सिंह, रमनदीप सिंह सोनू, गुनजीत सिंह बख्शी, सुखमन सिंह साहनी, बख्शीश सिंह, मनजीत सिंह और राजा सिंह चावला आदि मौजूद थे।
