रोहिणी में दशहरा समारोह के दौरान श्री विजेंद्र गुप्ता ने सार्वजनिक जीवन में न्याय, जवाबदेही और करुणा का किया आह्वान

Uncategorized

“बुराई पर अच्छाई की जीत हमारे शासन और आचरण में भी दिखाई देनी चाहिए”: दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता

“रावण के पुतले का दहन हमें समाज में आज भी बुराइयों का सामना करने की याद दिलाता है”: अध्यक्ष श्री गुप्ता

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026

“बुराई पर अच्छाई की जीत केवल दशहरे के उत्सव तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह हमारे शासन करने के तरीके, हमारे आचरण और एक-दूसरे के प्रति हमारे व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए,” यह बात दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने आज शाम रोहिणी के सेक्टर-24 स्थित रामलीला मैदान में श्री राम लखन लीला समिति द्वारा आयोजित दशहरा समारोह को संबोधित करते हुए कही। विजयादशमी की शुभकामनाएँ देते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि यह पर्व पीढ़ियों से आगे तक जाने वाला संदेश देता है कि धर्म और सत्य की विजय तभी संभव है, जब व्यक्ति और संस्थाएँ अन्याय, बेईमानी तथा सत्ता के दुरुपयोग के विरुद्ध खड़े होने का साहस दिखाएँ।

भगवान श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि रामराज्य की अवधारणा केवल प्राचीन राजव्यवस्था के आदर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय, जनकल्याण, जवाबदेही और अधिकार एवं दायित्व सौंपे गए व्यक्तियों की नैतिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रावण के पुतले का दहन समाज को अहंकार भ्रष्टाचार और भेदभाव जैसी समकालीन बुराइयों का सामना करने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए। श्री गुप्ता ने कहा, “रावण की पराजय हमें याद दिलाती है कि धर्म और नैतिकता से रहित सत्ता स्थायी सम्मान प्राप्त नहीं कर सकती। नेतृत्व की वास्तविक कसौटी केवल अधिकार में नहीं, बल्कि उस अधिकार के निष्पक्षता, संयम और ईमानदारी के साथ प्रयोग में निहित है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक संस्थानों का संचालन कर्तव्य और नागरिकों के कल्याण को सर्वोपरि रखते हुए किया जाना चाहिए।

श्री गुप्ता ने श्री राम लखन लीला समिति की सराहना करते हुए भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसकी नैतिक शिक्षाओं को युवा पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक महत्व से परे दशहरा उन मूल्यों पर सामूहिक चिंतन का अवसर प्रदान करता है, जो समाज और समुदायों को एकजुट रखते हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक परंपराएँ तब स्थायी महत्व प्राप्त करती हैं, जब वे आपसी सम्मान, सामाजिक सद्भाव और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करती हैं। नागरिकों से विजयदशमी के संदेश को उत्सव के बाद भी अपने जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि भगवान श्रीराम की विजय का सबसे सार्थक उत्सव ऐसा समाज बनाना होगा, जहाँ पूर्वाग्रह पर न्याय, स्वार्थ पर कर्तव्य और विभाजन पर करुणा की विजय हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *