लखनऊ में हुआ हज़बी का शुभारंभ, वैश्विक मुस्लिम समुदाय के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जीवनशैली मंच

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लखनऊ, 17 सितंबर 2026। नवाबों की नगरी लखनऊ में गुरुवार को हज़बी का शुभारंभ किया गया। हज़बी एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मुस्लिम जीवनशैली का डिजिटल मंच है, जिसमें इबादत, आध्यात्मिक मार्गदर्शन, नेक कार्यों का लेखा-जोखा तथा मुस्लिम समुदाय से जुड़े व्यापार और सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है। हज़बी कंपनी द्वारा विकसित इस मंच ने थ्रीईए ग्लोबल को रणनीतिक प्रबंधन परामर्शदाता एवं ज्ञान सहयोगी के रूप में अपने साथ जोड़ा है। थ्रीईए ग्लोबल ने परियोजना के रणनीतिक, ज्ञान आधारित तथा क्रियान्वयन संबंधी ढांचे को विकसित करने में सहयोग किया है।

हज़बी का अर्थ “ईश्वर का उपहार” बताया गया है। कंपनी के अनुसार, वर्तमान समय में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज, आध्यात्मिक प्रश्नों, इबादत और समुदाय से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के लिए अलग-अलग डिजिटल अनुप्रयोगों का उपयोग करते हैं। हज़बी का उद्देश्य इन सभी सुविधाओं को एक ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल व्यवस्था में उपलब्ध कराना है। मंच की प्रमुख सुविधा दुआ एआई है, जिसके साथ दैनिक इबादत के विभिन्न उपकरण, नेक कार्यों का व्यक्तिगत डिजिटल लेखा तथा मुस्लिम जीवनशैली से जुड़े उत्पादों एवं सेवाओं के लिए बाजार व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है।

हज़बी की प्रमुख विशेषता दुआ एआई है, जो चैटजीपीटी तकनीक पर आधारित है। कंपनी के अनुसार, इसे विशेष रूप से कुरआन, सहीह अल-बुखारी और सहीह मुस्लिम तक सीमित रखा गया है। इसका उद्देश्य इन्हीं निर्धारित प्रमाणित इस्लामी स्रोतों के आधार पर दुआ और आध्यात्मिक मार्गदर्शन से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना है।

हज़बी के रणनीतिक प्रबंधन परामर्शदाता एवं ज्ञान सहयोगी के रूप में थ्रीईए ग्लोबल ने परियोजना के रणनीतिक और ज्ञान संबंधी पहलुओं में सहयोग किया है। इसमें ज्ञान संरचना तथा उस रूपरेखा के विकास में सहयोग शामिल है, जिसके माध्यम से दुआ एआई को हज़बी द्वारा निर्धारित प्रमाणित इस्लामी स्रोतों से जोड़ा गया है। कंपनी के अनुसार, यह साझेदारी हज़बी की प्रारंभिक अवधारणा को एक व्यवस्थित और वास्तविक डिजिटल मंच में बदलने की लगभग नौ महीने लंबी यात्रा का हिस्सा रही है।

शुभारंभ के अवसर पर थ्रीईए ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. विभोर मिश्रा ने हज़बी की अवधारणा से लेकर इसके वास्तविक डिजिटल मंच बनने तक की यात्रा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हज़बी को एक कार्यशील डिजिटल मंच के रूप में तैयार करने में करीब नौ महीने का रणनीतिक नियोजन, ज्ञान विकास, तकनीकी समन्वय, क्रियान्वयन और निरंतर सुधार का कार्य हुआ।

डॉ. मिश्रा ने लखनऊ की टीम के योगदान को भी रेखांकित किया। परियोजना का पूरा कार्य लखनऊ की टीम द्वारा किया गया, जिसका नेतृत्व परियोजना परामर्शदाता कृतज्ञ सिंह ने किया तथा राष्ट्रीय व्यावसायिक सहयोगी प्रणव भास्कर के निर्देशन में टीम ने कार्य किया। टीम ने परियोजना के विभिन्न चरणों में काम करते हुए प्रारंभिक अवधारणा को एक ऐसे कार्यशील डिजिटल मंच में बदलने में सहयोग किया, जिसे आम लोगों के लिए शुरू किया जा सके।

थ्रीईए ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. विभोर मिश्रा ने कहा कि हज़बी इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार एक मजबूत अवधारणा को व्यवस्थित रणनीति, ज्ञान और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से वास्तविक डिजिटल मंच में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि लगभग नौ महीने की इस यात्रा में विभिन्न टीमों के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक रहा और उन्होंने कृतज्ञ सिंह के नेतृत्व तथा प्रणव भास्कर के निर्देशन में काम करने वाली लखनऊ टीम के प्रयासों की सराहना की।

हज़बी में दैनिक धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें अबजद नाम विश्लेषक, नमाज सहायक, किबला दिशा की जानकारी, डिजिटल तस्बीह, नमाज के समय की जानकारी, जुमा खुतबा के समय की जानकारी तथा इस्लामी अवसरों की सूचनाओं वाला हिजरी कैलेंडर शामिल है। मेरी मस्जिद सुविधा के माध्यम से उपयोगकर्ता अपनी पसंद की मस्जिद से संबंधित सूचनाओं और स्मरण संदेशों को व्यक्तिगत रूप से निर्धारित कर सकते हैं।

हज़बी में नेकी खाता नामक सुविधा भी उपलब्ध है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता इबादत, सदका और अन्य नेक कार्यों का निजी डिजिटल लेखा-जोखा रख सकते हैं। यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को अपने अच्छे कार्यों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने का माध्यम प्रदान करती है।

हज़बी ने डिजिटल व्यापार के क्षेत्र में भी प्रवेश किया है। हज़बी वाणिज्य के माध्यम से मुस्लिम जीवनशैली से जुड़े ब्रांडों, उत्पादों और सेवा प्रदाताओं के लिए एक समर्पित डिजिटल बाजार उपलब्ध कराया गया है। कंपनी के अनुसार, इसमें शामिल व्यवसाय अपने उत्पादों और सेवाओं को सीधे हज़बी के उपयोगकर्ताओं तक पहुंचा और बेच सकेंगे। इसके लिए शून्य-कमीशन व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इसका उद्देश्य व्यवसायों और सेवा प्रदाताओं को ग्राहकों तक सीधे पहुंचने का माध्यम उपलब्ध कराने के साथ-साथ मुस्लिम जीवनशैली एवं मूल्यों से जुड़े उत्पादों और सेवाओं के लिए एक समर्पित बाजार तैयार करना है।

हज़बी के शुभारंभ के लिए लखनऊ का चयन भी विशेष महत्व रखता है। लखनऊ का इस्लामी अध्ययन, इस्लामी कानून, उर्दू साहित्य और अवध संस्कृति से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। यह शहर ऐतिहासिक रूप से बौद्धिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। हज़बी के अनुसार, लखनऊ से इसका शुभारंभ पारंपरिक विरासत और आधुनिक तकनीक के मेल का प्रतीक है तथा यहीं से इसकी वैश्विक डिजिटल यात्रा की शुरुआत हो रही है।

हज़बी के शुभारंभ कार्यक्रम की मेजबानी हज़बी के संस्थापक शान जमशेद और थ्रीईए ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. विभोर मिश्रा ने की। कार्यक्रम में इस्लामी विद्वानों, सामुदायिक प्रतिनिधियों, कारोबारी नेताओं, तकनीकी नवाचार से जुड़े लोगों और मीडिया प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान दुआ एआई, नमाज सहायक, नेकी खाता, मेरी मस्जिद और हज़बी वाणिज्य सहित मंच की विभिन्न सुविधाओं का प्रदर्शन किया गया।

हज़बी के संस्थापक शान जमशेद ने कहा, “2.06 अरब मुसलमान ऐसे डिजिटल घर के हकदार हैं, जो उनके विश्वास, इबादत और दैनिक जीवन को ध्यान में रखकर बनाया गया हो और जहां उन्हें मिलने वाले उत्तरों पर भरोसा किया जा सके। हज़बी ऐसा ही घर है और आज इसकी शुरुआत लखनऊ से हो रही है।”

हज़बी को 17 सितंबर 2026 से आईओएस, एंड्रॉयड और वेब पर उपलब्ध कराया गया है। इसका वेब मंच एआई.हज़बी.कॉम पर उपलब्ध है। मुस्लिम जीवनशैली से जुड़े ब्रांड और सेवा प्रदाता हज़बी वाणिज्य पर अपने उत्पादों एवं सेवाओं को सूचीबद्ध कराने के लिए कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।

हज़बी कंपनी के अनुसार, यह एक मुस्लिम जीवनशैली एवं प्रौद्योगिकी उद्यम है, जिसका उद्देश्य इबादत, आध्यात्मिक मार्गदर्शन, नेक कार्यों और समुदाय से जुड़ी सुविधाओं को एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराना है। हज़बी ने थ्रीईए ग्लोबल के साथ रणनीतिक प्रबंधन परामर्शदाता एवं ज्ञान सहयोगी के रूप में साझेदारी की है। थ्रीईए ग्लोबल हज़बी मंच के रणनीतिक, ज्ञान आधारित और रूपरेखा संबंधी विकास में सहयोग कर रहा है।

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