
भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले एमएसएमई और छोटे उद्योगों को आज भी अपने दैनिक संचालन और विकास में कई गंभीर और जटिल बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें सबसे बड़ी समस्या समय पर भुगतान न मिलने की है जिसके कारण उनका नकदी प्रवाह बुरी तरह प्रभावित होता है। इसके साथ ही, महंगे कर्ज के बोझ तले दबे उद्यमियों के लिए अपने व्यवसाय का विस्तार करना बेहद कठिन हो जाता है, जबकि जटिल नियम-कानूनों की औपचारिकताएं और स्थानीय बाजारों तक ही सीमित पहुंच जैसी अन्य समस्याएं इस सैक्टर की रफ्तार को लगातार धीमा कर रही हैं। इन तमाम चुनौतियों से पार पाने और देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एपेक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रैसिडेंट डॉ. कपिल चोपड़ा ने कुछ व्यावहारिक और प्रभावी समाधान सुझाए हैं, उनका मानना है कि यदि एसएमई सैक्टर को गति देनी है, तो उद्योगों को कम ब्याज दरों पर आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इकाइयों को उनके उत्पादों और सेवाओं का भुगतान समयबद्ध तरीके से मिले, इसके लिए सख्त व्यवस्था होनी चाहिए। व्यापार को आसान बनाने के लिए जटिल नियमों को सरल किया जाना चाहिए और छोटे उद्यमियों के उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंच प्रदान करने के लिए बेहतर मंच तैयार किए जाने चाहिए। श्री चोपड़ा ने कहा कि जब तक देश का एसएमई और लघु उद्योग पूरी तरह से मजबूत और आत्मनिर्भर नहीं बनता, तब तक राष्ट्र की समग्र आर्थिक प्रगति को गति मिलना संभव नहीं है, इसलिए इस सैक्टर की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

