भारत के बढ़ते जीएलपी-1 बाजार में उत्तर भारत बना विकास का प्रमुख केंद्र

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गुरुग्राम: मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बीच संबंध को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। इसके साथ ही, अधिक से अधिक लोग अपने मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को समझने के लिए डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं। यह बदलाव खासतौर पर उत्तर भारत में देखने को मिल रहा है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल 74% से अधिक महिलाओं में मोटापा या अधिक वजन पाया गया, जबकि लगभग हर पांच में से एक महिला में आंतरिक वसा (विसरल फैट) का स्तर अधिक था। यह स्थिति इस बात पर जोर देती है कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने और लंबे समय तक स्वास्थ्य प्रबंधन की आवश्यकता है।

इसी पृष्ठभूमि में, सिप्ला का टिरजेपाटाइड ब्रांड Yurpeak® जुलाई 2026 में दिल्ली और हरियाणा में देशभर में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला बाजार रहा। इस क्षेत्र ने ₹1.54 करोड़ का अतिरिक्त मूल्य दर्ज किया और 30.1% की वृद्धि हासिल की, जो ब्रांड की कुल अतिरिक्त वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान रहा। आसपास के बाजारों में भी वृद्धि का यही रुझान देखने को मिला। पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में 12.9% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि यूपी नॉर्थ-वेस्ट और उत्तराखंड में 9.3% की वृद्धि हुई।

यह प्रदर्शन भारत में मोटापा प्रबंधन के क्षेत्र में उभर रहे व्यापक रुझान को दर्शाता है। जहां बाजार में कई सेमाग्लूटाइड ब्रांड्स की शुरुआत और विस्तार देखने को मिला है, वहीं टिरजेपाटाइड आधारित उपचारों को डॉक्टरों और मरीजों की ओर से लगातार मजबूत प्राथमिकता मिल रही है। इसका कारण इन उपचारों की अलग और प्रभावी क्लिनिकल प्रोफाइल के साथ-साथ वास्तविक जीवन में इनके उपयोग से बढ़ता अनुभव है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार, टिरजेपाटाइड भारत के मोटापा-रोधी बाजार में लगातार अग्रणी बना हुआ है। इससे पता चलता है कि विकल्पों की बढ़ती उपलब्धता के बावजूद उपचार का प्रभाव और मरीजों के स्वास्थ्य परिणाम इसके इस्तेमाल को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।

उत्तर भारत में देखी गई मजबूत वृद्धि ऐसे प्रमाण-आधारित उपचारों की बढ़ती पसंद को दर्शाती है, जो स्वास्थ्य में सार्थक और लंबे समय तक बने रहने वाले परिणामों में मदद करते हैं। जैसे-जैसे मोटापे को एक दीर्घकालिक बीमारी के रूप में लेकर जागरूकता बढ़ रही है, वैसे-वैसे अधिक लोग ऐसे उपचारों की तलाश कर रहे हैं जो केवल वजन को नियंत्रित करने तक सीमित न हों, बल्कि मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जुड़े व्यापक लक्ष्यों को भी पूरा करने में मदद करें।

इस बारे में बात करते हुए, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के अपोलो सेंटर फॉर ओबेसिटी, डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजी (ACODE) में सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. एस. के. वांगनू ने कहा, ‘मोटापा केवल वजन से जुड़ी समस्या नहीं है। यह एक जटिल और दीर्घकालिक बीमारी है, जो मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है और कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती है। आज यह उत्साहजनक है कि लोगों में जागरूकता बढ़ रही है और वे जटिलताएं होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते इलाज और विशेषज्ञ की सलाह लेने के महत्व को समझ रहे हैं। पूरे उत्तर भारत में हम वजन प्रबंधन, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और प्रमाण-आधारित उपचार के तरीकों को लेकर अधिक गंभीर और सार्थक चर्चा देख रहे हैं। यह सक्रिय और रोकथाम पर आधारित स्वास्थ्य देखभाल की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।’

उत्तर भारत में Yurpeak का मजबूत प्रदर्शन भारत में मोटापा प्रबंधन के क्षेत्र में टिरजेपाटाइड के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाता है। यह ऐसे अलग और प्रभावी उपचारों के प्रति बढ़ते भरोसे और स्वीकार्यता को भी दिखाता है, जो लंबे समय तक मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में मदद करते हैं।

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