
चतुर्थ सी ई एस विद्या उत्सव कक्षाओं से इतर भविष्य निर्माण : संजय कुमार
- शिक्षा का एक अनूठा उत्सव, भारत के कर्णधार – विद्यार्थियों और शिक्षकों का है उत्सव : निखिल चानना
नई दिल्ली ।
देश के विभिन्न राज्यों में विद्यार्थियों का भविष्य और वर्तमान सँवार रहे, शिक्षारत बाल भारती पब्लिक स्कूलों (बीबीपीएस ) की शीर्षस्थ संस्था चाइल्ड एजुकेशन सोसायटी द्वारा चौथा विद्या उत्सव – 2026 को धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन संबोधन में संस्था के अध्यक्ष तथा बाल भारती स्कूलों के चेयरमैन निखिल चानना ने बताया कि इस संस्था की छत्रछाया में पूरे भारतवर्ष में सैंतीस हज़ार विद्यार्थियों को, 2500 निष्ठावान अध्यापक, 26 बाल भारती पब्लिक स्कूलों में, पूरी निष्ठा और समर्पण से शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
चाइल्ड एजुकेशन सोसायटी द्वारा विद्या उत्सव कार्यक्रम का आरंभ वर्ष 2023 में फरवरी माह में संस्था के स्थापना दिवस समारोह के उपलक्ष्य में पहली बार दिल्ली के कमानी सभागार में किया गया था। तब से प्रतिवर्ष यह उत्सव आयोजित किया जा रहा है। इसी कड़ी का यह चतुर्थ चरण रहा।
अध्यक्ष एवं चेयरमैन निखिल चानना तथा बाल भारती द्वारका प्रधानाचार्या सुरुचि गांधी के माध्यम से प्राप्त सम्मिलित जानकारी के अनुसार सम्पूर्ण कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ। प्रथम सत्र में, मुख्य वक्ता के रूप में, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय में शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी संजय कुमार ने ‘कक्षाओं से इतर भविष्य निर्माण : वास्तविक संसार के कौशलों के दृष्टिकोण से अनुभवात्मक शिक्षा’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। श्री संजय कुमार प्रकांड शिक्षाविद् हैं। उन्होंने नवीनतम शिक्षा नीति के प्रमुख पक्षों को उजागर करते हुए, उसके सकारात्मक रूप को अपनाने पर बल दिया। उनके अनुसार पैंसठ से सतासठ पृष्ठों की विस्तृत शिक्षा नीति को पूर्ण रूप से न पढ़ पाने के बाद भी उसके मुख्य बिंदुओं को समझकर शिक्षक विद्यार्थियों को अनुभव आधारित ज्ञान से जोड़ सकते हैं। उनके अनुसार आज की विद्यालयी शिक्षा परंपरागत ‘पढ़ना और लिखना’ सीखने तक सीमित नहीं रह गई है। आज की शिक्षा विद्यार्थियों को ‘शिक्षार्थी’ बनना सिखाती है, जो ज्ञान को अपने अनुभवों से जोड़कर सीखेंगे। अतः उन्हें शिक्षार्थी बनने की ओर उन्मुख करना है।
इसी सत्र में प्रबंधन बोर्ड के सदस्य तथा सीईएस के आईटी (सूचना एवं प्रौद्योगिकी) सलाहकार शरद अरोड़ा की मध्यस्थता में एआईसीटीई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा अनुवादिनी एआई के मुख्य समन्वय अधिकारी डॉ. बुद्ध चंद्रशेखर, सार्वजनिक नीति, व्यापार नीति, कौशल और शिक्षा की विशेषज्ञ सुश्री लक्ष्मी कौल, शिक्षाविद्, लेखिका, सार्वजनिक नीति और कौशल की विशेषज्ञ, शिक्षा उद्योग के निदेशक, माइक्रोसॉफ्ट एलिवेट डॉ. विन्नी जौहरी, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में कौशल शिक्षा और प्रशिक्षण के निदेशक डॉ. बिस्वजीत साहा सहित एक उच्च स्तरीय पैनल शिक्षा, कौशल, अनुभवात्मक शिक्षा आदि विभिन्न पक्षों पर विस्तृत चर्चा की गई।
दूसरे सत्र में सुप्रसिद्ध फिल्म, दूरदर्शन एवं रंगमंच अभिनेता आशुतोष राणा मुख्य वक्ता रहे। उनके द्वारा प्रस्तुत वक्तव्य – विद्या, विवेक, विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा। उनके अनुसार हमें शिक्षा से भाव भी ग्रहण करने चाहिए। आज अधिकांश बच्चे निजी विद्यालयों में पढ़ने जाते हैं, जहाँ पूर्व-निर्धारित पाठ्यक्रमों में पूर्व-निर्धारित पाठ होते हैं और परीक्षाओं में पूर्व-निर्धारित प्रश्न होते हैं, जिनके उत्तर रट कर विद्यार्थी उत्तीर्ण होकर अगली कक्षाओं में पहुँचते जाते हैं। उनके व्यावसायिक कार्यक्षेत्र भी लगभग पहले से ही तय होते हैं। ऐसे में उन्हें अपनी रुचियों को व्यवसाय बनाने का अवसर ही नहीं प्राप्त होता। विद्यार्थी जगत को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी अपनी रुचि का ही कार्य व्यवसाय के रूप में करना चाहता है, तो उसे अपनी रुचि को प्रबल बनाना होगा तथा मात्र परीक्षा पाठ्यक्रम तक सीमित न रह कर विशद ज्ञान प्राप्त करना होगा। मुक्त कंठ से निखिल चानना की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके मार्गदर्शन में सीईएस तथा बाल भारती विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, तथा भारतीय परंपराओं का भी ज्ञान दिया जा रहा है, जिससे हमारे विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे। उन्होंने बाल भारती समूह के शिक्षक वृंद की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की। बाल भारती स्कूलों की राजधानी दिल्ली एवं निकटवर्ती शाखाओं के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, प्रशासनिक कर्मचारियों तथा सीईएस प्रबंधन समिति के विभिन्न उच्चस्तरीय अधिकारियों सहित लगभग आठ सौ पचास गणमान्य व्यक्ति सभागार में तथा शेष सभी स्कूल शाखाओं के प्रधानाचार्य, शिक्षक, प्रशासनिक कर्मचारियों सहित 37 हजार विद्यार्थी, उनके अभिभावक, अन्य परिवार जनों सहित सहस्रों व्यक्ति ऑनलाइन दर्शकों के रूप में सम्पूर्ण समारोह के प्रत्यक्ष दर्शी बने।
कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन तथा विद्यार्थियों के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा किया गया तथा
कार्यक्रम का समापन चाइल्ड एजुकेशन सोसायटी के संयुक्त सचिव श्री लक्षवीर सहगल द्वारा धन्यवाद संबोधन तथा राष्ट्र गान द्वारा किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम अत्यंत प्रभावशाली व शिक्षाप्रद रहा।

