सरदार पटेल विश्वविद्यालय में ‘सिनेमा और साहित्य’ पर व्याख्यान
भारत की जगह विदेशी साहित्य पर ही फिल्म बनना चिंता का विषय –प्रदीप सरदानासाहित्य समाज का मन है तो सिनेमा समाज का चेहरा। साहित्य शब्दों की विधा है तो सिनेमा दृश्य और ध्वनि की। हमारी बहुत सी साहित्यिक कृतियों पर बेहद खूबसूरत, सफल और कालजयी फिल्में बनी हैं। लेकिन यह अत्यंत दुखद है कि अब […]
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