संतोष सिंह भुल्लर रिपोर्ट :-

भू माफियाओ का गिरोह डिजिटल और भौतिक माध्यमों से लगातार माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है भड़काऊ पोस्टर, पर्चे, फर्जी यूट्यूब वीडियो और हिंसा के खुले आह्वान जैसे “मारो-पीटो”,
“स्कूल पर बुलडोज़र चलाओ” जैसे नारे सामाजिक शांति के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं – इतना ही नहीं, विदेशी मीडिया संस्था के नाम का दुरुपयोग कर झूठी अफवाहें फैलाकर आम लोगों को भ्रमित कर रहा हैं।
लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और संस्थान की सुरक्षा को एवं आगजनी जैसे खतरे को देखते हुए सरकार से हमारी अपील हैं कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांचकर सभी दोषियों के खिलाफ़ सख़्त से सख़्त कानूनी कार्यवाही की जाएं।
नई दिल्ली/अल्मोड़ा। उत्तराखंड के जनपद अल्मोड़ा स्थित एक प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था दि प्लेजेंट वैली फाउंडेशन ने अपने चैरिटेबल स्कूल और अनाथालय को निशाना बनाकर रचे गए कथित संगठित आपराधिक षड्यंत्र का सनसनीखेज खुलासा किया है। फाउंडेशन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI-SIT गठित करने की मांग की हैं।
आगजनी, साइबर अपराध और भूमि कब्जाने की साजिश के गंभीर आरोप; दोषसिद्ध व्यापारी समेत कई नामजद, कई एफआईआर दर्ज
सामाजिक संस्था दि प्लेजेंट वैली फाउंडेशन के अनुसार, करीब दो दशकों से ग़रीब,वंचित बच्चों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा यह संस्थान वर्तमान में गंभीर आपराधिक गतिविधियों के केंद्र में आ गया है। नोएडा के कपड़ा व्यापारी और पहले से दोषसिद्ध अपराधी अपूर्वा जोशी उर्फ भैयाजी जोशी, उसकी पत्नी, भाई और अन्य सहयोगियों के खिलाफ 6 अप्रैल 2026 को थाना गोविंदपुर में आईटी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
फाउंडेशन का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संस्था की संपत्ति पर अवैध कब्जा करना है। इससे पहले 1 फरवरी 2026 को भी विद्यालय की भूमि और भवनों को अवैध रूप से बेचने की साजिश के आरोप में एक अन्य एफआईआर दर्ज की गई थी।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब 17 फरवरी 2026 की रात विद्यालय परिसर में आगजनी की घटना सामने आई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पेट्रोल छिड़ककर आग लगाई गई थी, जिससे संस्था के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। इस घटना के संबंध में भी अलग से प्राथमिकी दर्ज की गई है।
फाउंडेशन ने यह भी आरोप लगाया है कि भू माफियाओ का गिरोह डिजिटल और भौतिक माध्यमों से लगातार माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है भड़काऊ पोस्टर, पर्चे, फर्जी यूट्यूब वीडियो और हिंसा के खुले आह्वान जैसे “मारो-पीटो”, “स्कूल पर बुलडोज़र चलाओ” जैसे नारे सामाजिक शांति के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं – इतना ही नहीं, विदेशी मीडिया संस्था के नाम का दुरुपयोग कर झूठी अफवाहें फैलाकर आम लोगों को भ्रमित कर रहा हैं।
गौरतलब है कि मुख्य आरोपी अपूर्वा जोशी को वर्ष 2022 में एक अन्य मामले में दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसे 2025 में अपील के दौरान भी बरकरार रखा गया। हालांकि, उच्च न्यायालय से उसे केवल अंतरिम राहत मिली है, सजा पर कोई रोक नहीं है।
फाउंडेशन का कहना है कि लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और संस्थान की सुरक्षा को एवं आगजनी जैसे खतरे को देखते हुए सरकार से हमारी अपील हैं कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांचकर सभी दोषियों के खिलाफ़ सख़्त से सख़्त कानूनी कार्यवाही की जाएं।

