
भीम ब्रिगेड ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नेशनल पैंथर्स पार्टी दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजीव जोली खोसला ने आज जलियाँवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि बैसाखी के रोज अंग्रेजों ने अपने पतन की भूमिका बनाई जिसे भारतीय नौजवानों ने मिलकर अपनी जानै न्योछावर कर पूरा किया!
13 अप्रैल 1919 में जनरल डायर द्वारा करके भारतीय नौजवानों का खून में उबाल दिया इसके कारण उन्हें 1947 को भारत को आजादी देकर भागना पड़ा
जालियाँवाला बाग हत्याकांड भारत के पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी के दिन) हुआ था। रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी जिसमें जनरल डायर नामक एक अँग्रेज ऑफिसर ने अकारण उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियाँ चलवा दीं जिसमें 400 से अधिक व्यक्ति मरेऔर 2000 से अधिक घायल हुए। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियांवाला बाग में कुल 388 शहीदों की सूची है। ब्रिटिश राज के अभिलेख इस घटना में 200 लोगों के घायल होने और 379 लोगों के शहीद होने की बात स्वीकार करते है जिनमें से 337 पुरुष, 41 नाबालिग लड़के और एक 6-सप्ताह का बच्चा था। अनाधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 1500 से अधिक लोग मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए।जलियाँवाला बाग की और जाने वाला एक संकीर्ण मार्ग
जालियाँवाला बाग स्मारक
घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था। माना जाता है कि यह घटना ही भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत बनी।
१९९७ में महारानी एलिज़ाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी। २०१३ में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन भी इस स्मारक पर आए थे। विजिटर्स बुक में उन्होंनें लिखा कि “ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी। खोसला ने सभी भारतीयों से निवेदन किया कुछ राजनीतिक दल आजादी के बाद से ही विदेशी ताकतों के बहकावे में आकर भारत की एकता हिंदू, मुस्लिम, सिख ,ईसाई के भाईचारे को लगातार बिगड़ने में लगे हैं मगर हम सबको एकजुट होकर उन राजनीति दलों को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए जय हिंद ,जय भारत

