
इन्कलाब जिन्दाबाद उद्घोषक के नायक शहीद भगतसिंह का जयंती दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग और भीम ब्रिगेड ट्रस्ट के सौजन्य से आयोग के सभागार अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष निर्मल जैन जी की अध्यक्षता में मनायीं गई.
भीम ब्रिगेड ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव जोली खोसला संचालन कर रहे थे जिसमें सैकड़ो राष्ट्र भक्तों ने हिस्सा लिया आयोग के सदस्य सरदार कुलदीप सिंह जी ने कहा क्रान्तिवीर भगतसिंह का जन्म 28 सितम्बर, 1907 को ग्राम बंगा, (जिला लायलपुर, पंजाब) में हुआ था। उसके जन्म के कुछ समय पूर्व ही उसके पिता किशनसिंह और चाचा अजीत सिंह जेल से छूटे थे। उन्होंने ने कहा,उसे भागों वाला अर्थात भाग्यवान माना गया। घर में हर समय स्वाधीनता आन्दोलन की चर्चा होती रहती थी। इसका प्रभाव भगतसिंह के मन पर गहराई से पड़ा।

13 अपै्रल 1919 को जलियाँवाला बाग, अमृतसर में क्रूर पुलिस अधिकारी जरनल डायर ने गोली चलाकर हजारों नागरिकों को मार डाला। यह सुनकर बालक भगतसिंह वहाँ गया और खून में सनी मिट्टी को एक बोतल में भर लाया। वह प्रतिदिन उसकी पूजा कर उसे माथे से लगाता था। भगतसिंह का विचार था कि धूर्त अंग्रेज अहिंसक आन्दोलन से नहीं भागेंगे। अतः उन्होंने आयरलैण्ड, इटली, रूस आदि के क्रान्तिकारी आन्दोलनों का गहन अध्ययन किया। वे भारत में भी ऐसा ही संगठन खड़ा करना चाहते थे। विवाह का दबाव पड़ने पर उन्होंने घर छोड़ दिया और कानपुर में स्वतन्त्रता सेनानी गणेशशंकर विद्यार्थी के समाचार पत्र ‘प्रताप’ में काम करने लगे। कुछ समय बाद वे लाहौर पहुँच गये और ‘नौजवान भारत सभा’ बनायी।

भगतसिंह ने कई स्थानों का प्रवास भी किया। निर्मल जैन ने बताया कि वहीं उनकी भेंट चन्द्रशेखर आजाद जैसे साथियों से हुई। उन्होंने कोलकाता जाकर बम बनाना भी सीखा। 1928 में ब्रिटेन से लार्ड साइमन के नेतृत्व में एक दल स्वतन्त्रता की स्थिति के अध्ययन के लिए भारत आया। लाहौर में लाला लाजपतराय के नेतृत्व में इसके विरुद्ध बड़ा प्रदर्शन हुआ। इससे बौखलाकर पुलिस अधिकारी स्काॅट तथा सांडर्स ने लाठीचार्ज करा दिया। वयोवृद्ध लाला जी के सिर पर इससे भारी चोट आयी और वे कुछ दिन बाद चल बसे।इस घटना से क्रान्तिवीरों का खून खौल उठा। उन्होंने कुछ दिन बाद सांडर्स को पुलिस कार्यालय के सामने ही गोलियों से भून दिया। पुलिस ने बहुत प्रयास किया; पर सब क्रान्तिकारी वेश बदलकर लाहौर से बाहर निकल गये। कुछ समय बाद दिल्ली में केन्द्रीय धारासभा का अधिवेशन होने वाला था। क्रान्तिवीरों ने वहाँ धमाका करने का निश्चय किया। इसके लिए भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त चुने गये। निर्धारित दिन ये दोनों बम और पर्चे लेकर दर्शक दीर्घा में जा पहुँचे। भारत विरोधी प्रस्तावों पर चर्चा शुरू होते ही दोनों ने खड़े होकर सदन मे बम फेंक दिया। उन्होंने ‘इन्कलाब जिन्दाबाद’ के नारे लगाते हुए पर्चे फेकें , जिन पर क्रान्तिकारी आन्दोलन का उद्देश्य लिखा था।
पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया। बताया जाता है कि न्यायालय में भगतसिंह ने जो बयान दिये, उससे सारे विश्व में उनकी प्रशंसा हुई। भगतसिंह पर सांडर्स की हत्या का भी आरोप था। उस काण्ड में कई अन्य क्रान्तिकारी भी शामिल थे; जिनमें से सुखदेव और राजगुरु को पुलिस पकड़ चुकी थी। इन तीनों को 24 मार्च, 1931 को फाँसी देने का आदेश जारी कर दिया गया।
भगतसिंह की फाँसी का देश भर में व्यापक विरोध हो रहा था। इससे डरकर धूर्त अंग्रेजों ने एक दिन पूर्व 23 मार्च की शाम को इन्हे फांसी दे दी और इनके शवों को परिवारजनों की अनुपस्थिति में जला दिया; पर इस बलिदान ने देश में क्रान्ति की ज्वाला को और धका दिया। उनका नारा ‘इन्कलाब जिन्दाबाद’ आज भी सभा-सम्मेलनों में ऊर्जा का संचार कर देता है। आयोग के सदस्य मोहम्मद हारुन भाई ने भी कहा कि किस प्रकार अशफाक उल्ला खान और राम प्रसाद बिस्मिल की जोड़ी ने मिलकर भारत माता को आजाद कराया मो फैज खान ने भी आश्वासन दिया कि दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में आजादी से पहले क्रांतिकारी मिलकर योजना बनाते थे उनके लिए कार्यक्रम वहां रखा जाएगा जो राजीव जोली खोसला की देखरेख में होगा।
भीम ब्रिगेड ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव जोली खोसला ने कहा कि आज हम *एक शपथ लेकर जाएं कि *तुझे क्या और मुझे क्या इस भावना को खत्म करें यह बात अभिव्यक्त मधुसूदन बयान जी ने कही थी पंजाबी में तुझे क्या मुझे क्या इसे हमें खत्म करना पड़ेगा राष्ट्र उत्थान के लिए नशा रोकने के लिए अत्याचार रोकने के लिए और भ्रष्टाचार रोकने के लिए भी उपस्थित भूषण कुमार जैन जी ने भी आए हुए सभी राष्ट्र भक्तों को सम्मानित किया 1857 क्रांति के वंश के सदस्य भी मौजूद थे हितेश शर्मा ने भगत सिंह पर सोलो एक्ट किया आदेश चेनपुरिया जी ने मधुर आवाज में भगत सिंह जी को याद किया सुरेंद्र पुशकरना जी और मंजू जी ने भी क्रांतिकारी पर कविता बोली भीम ब्रिगेड दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष इरशाद कुरैशी भी मौजूद थे महिला अध्यक्ष परमजीत कौर, ऐजै राजन, उषा शर्मा ,भाई रिजवान जी, भाई असगर खान, रीमा जी, विश्व के पहले सरदार जादूगर जितेंद्र सिंह बब्बर ने भी अपना क्रांतिकारी शो दिखाए भाई अनीस दुर्रानी, पूर्व न्यायाधीश ओपी सपरा ,भाई अनीस दुर्रानी, भाई बिलाल जी, कश्मीरी पंडित बहन नैंसी कॉल, योगाचार्य पूनम जी, सुभाष जी ,गोपाल जी व अन्य गणमान्य लोगो उपस्थित रहे।

