भारत ने स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्रों में उल्लेखनीय क्षमताएं विकसित की हैं: जे पी नड्डा।

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स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने WCOG 2026 का उद्घाटन किया, पाचन स्वास्थ्य पर वैश्विक ध्यान केंद्रित

नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली के यशोभूमि में विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कांग्रेस (WCOG) 2026 का उद्घाटन किया। यह पहला अवसर है जब वैश्विक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कांग्रेस भारत में आयोजित की जा रही है। चार दिवसीय इस कांग्रेस में 61 देशों के लगभग 3,000 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिसमें चिकित्सक और शोधकर्ता जठरांत्र (जीआई) एवं यकृत रोगों के बढ़ते और बदलते बोझ से निपटने के लिए एक साथ आए हैं।

उद्घाटन दिवस पर “जीआई स्वास्थ्य के 10 सूत्र” (10 Commandments for GI Health) जारी किए गए। यह भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई साक्ष्य-आधारित सिफारिशों का एक समूह है। ये सिफारिशें रोकथाम, जोखिम कारकों और लक्षणों की पहचान तथा समय पर चिकित्सकीय जांच पर केंद्रित हैं। विशेषज्ञों ने आह्वान किया कि ये संदेश सभी देशों और समुदायों के लोगों तक पहुंचें, ताकि जठरांत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता मजबूत हो और समय पर उपचार को प्रोत्साहन मिले।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा: “जठरांत्र स्वास्थ्य पोषण, चयापचय (मेटाबॉलिक) स्वास्थ्य, संक्रमण और कैंसर से निकटता से जुड़ा है, इसलिए यह व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंडे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत ने स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्रों में उल्लेखनीय क्षमताएं विकसित की हैं। WCOG 2026 की मेजबानी हमें यह अनुभव वैश्विक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी समुदाय के साथ साझा करने और अनुसंधान, नैदानिक अभ्यास तथा स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने का अवसर देती है।”

जठरांत्र रोग संक्रामक, चयापचयी, सूजन संबंधी और घातक (कैंसर) स्थितियों तक फैले हुए हैं, और ये जीवन के विभिन्न चरणों में तथा स्वास्थ्य सेवा के विभिन्न परिवेशों में लोगों को प्रभावित करते हैं। जहां एच. पाइलोरी जैसे संक्रमण और परजीवी रोग रोग के महत्वपूर्ण कारण बने हुए हैं, वहीं चयापचयी यकृत रोग, सूजन आंत्र रोग (IBD) और जठरांत्र कैंसर नैदानिक तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से चिंता के तेजी से महत्वपूर्ण क्षेत्र बनते जा रहे हैं। इनके प्रभाव को कम करने के लिए शीघ्र पहचान, उचित जांच (स्क्रीनिंग) और प्रभावी उपचार तक पहुंच केंद्रीय महत्व रखते हैं।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा: “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, निदान प्रौद्योगिकियों, जैव-चिकित्सा अनुसंधान और डेटा विज्ञान में हो रही प्रगति स्वास्थ्य सेवा के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रही है। अब प्राथमिकता इन प्रगतियों को नैदानिक रूप से प्रमाणित समाधानों में बदलने की है, जिन्हें जनसंख्या के स्तर पर लागू किया जा सके। इसे हासिल करने में चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी समुदायों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण होगा।”

निदान और उपचार में हो रही प्रगति जठरांत्र एवं यकृत रोगों के प्रबंधन को नया रूप दे रही है-अग्याशय (पैंक्रियास) और जठरांत्र कैंसर की पहले पहचान से लेकर अग्नाशयशोथ, MASLD, IBD,
सीलिएक रोग और यकृत विफलता के लिए नए उपायों तक। एच. पाइलोरी उन्मूलन, सटीक जोखिम मूल्यांकन, उन्नत एंडोस्कोपी और आंत के माइक्रोबायोम की बढ़ती समझ भी नैदानिक अभ्यास को बदल रही है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंडोस्कोपी, EUS, अग्नाशय रोग, IBD और जठरांत्र गतिशीलता (मोटिलिटी) में नई संभावनाएं खोल रहा है, साथ ही नैदानिक सत्यापन, सुरक्षा और विनियमन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठा रहा है। IBD, कोलोरेक्टल कैंसर, MASLD, दीर्घकालिक (क्रोनिक) अग्नाशयशोथ और मानव माइक्रोबायोम पर भारत से हो रहे शोध वैश्विक साक्ष्य आधार में योगदान दे रहे हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन और अति-प्रसंस्कृत (अल्ट्रा-प्रोसेस्ड) खाद्य पदार्थों जैसे पर्यावरणीय कारकों के जठरांत्र स्वास्थ्य पर प्रभाव की समझ भी बढ़ रही है।

डॉ. प्रमोद कुमार गर्ग, सह-अध्यक्ष, संचालन समिति (स्टीयरिंग कमेटी), WCOG 2026 एवं अध्यक्ष, इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, तथा डॉ. गोविंद मखारिया, अध्यक्ष, स्थानीय आयोजन समिति, WCOG 2026 ने कहा: “जठरांत्र स्वास्थ्य एक वैश्विक चिंता का विषय है, जिसमें संक्रमण, चयापचयी और सूजन संबंधी रोग, कैंसर तथा दीर्घकालिक पाचन संबंधी स्थितियां शामिल हैं। भारत इस वैश्विक चर्चा में एक बड़ी और विविध रोगी आबादी, महत्वपूर्ण नैदानिक अनुभव और निरंतर बढ़ता शोध-आधार लेकर आता है। WCOG 2026 इस अनुभव को साझा करने के साथ-साथ विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियों की प्रगति से सीखने का अवसर देती है, जिसका साझा उद्देश्य रोकथाम, शीघ्र निदान और रोगियों के लिए बेहतर परिणाम है।”

WCOG 2026 का आयोजन 3 अक्टूबर तक चलेगा। इसका विषय है “जठरांत्र स्वास्थ्य में परिवर्तन, प्रकृति का संरक्षण” (Transforming Gastrointestinal Health, Preserving Nature)। इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और वर्ल्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ऑर्गनाइजेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित तथा भारत के प्रमुख गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी संघों के सहयोग से हो रही यह कांग्रेस जठरांत्र एवं यकृत रोगों की रोकथाम, निदान और प्रबंधन पर वैश्विक तथा भारतीय दृष्टिकोण एक मंच पर ला रही है।

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