
नई दिल्ली, 24 सितंबर 2026: भारत का बिजली क्षेत्र विकास के एक नए और महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहा है। इसके लिए बिजली उत्पादन, पारेषण, भंडारण और वितरण की एकीकृत योजना के साथ-साथ तकनीक और विनिर्माण के क्षेत्र में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है। यह बात श्री पंकज अग्रवाल, सचिव, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार ने कही।
एफआईसीसीआई द्वारा आयोजित दूसरे इंडियन पावर सेक्टर कॉन्फ्रेंस में “विश्वसनीय, लचीली और बाजार के लिए तैयार विद्युत व्यवस्था का निर्माण” विषय पर संबोधित करते हुए श्री अग्रवाल ने भारत के बिजली क्षेत्र के विकास के अगले चरण की प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “नई राष्ट्रीय विद्युत नीति को विकसित भारत 2047 की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। पिछली नीति वर्ष 2005 में जारी की गई थी और उस समय हमारे सामने चुनौतियां बिल्कुल अलग थीं। आज ग्रिड प्रबंधन, पर्याप्त पारेषण प्रणाली तथा वित्तीय रूप से टिकाऊ, चुस्त और तकनीक-सक्षम वितरण कंपनियां प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।”

श्री अग्रवाल ने कहा कि अब बिजली व्यवस्था को अलग-अलग घटकों के बजाय एक एकीकृत प्रणाली के रूप में देखने की आवश्यकता है। विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और बुनियादी ढांचे के प्रभावी उपयोग के लिए उत्पादन, पारेषण, भंडारण और वितरण की एक साथ योजना बनाई जानी चाहिए।
श्री अग्रवाल ने कहा, “हमें खंडित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर बिजली क्षेत्र को एक संपूर्ण प्रणाली के रूप में देखना होगा। सवाल केवल यह नहीं है कि हमारे पास संसाधन हैं या नहीं, बल्कि यह है कि भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हमारे पास सही संसाधन, तकनीक और प्रणालियां मौजूद हैं या नहीं।”उन्होंने बिजली क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में घरेलू तकनीकी एवं विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के अवसर पर भी जोर दिया। उन्होंने भारत में बिजली क्षेत्र से जुड़ी तकनीकों और उपकरणों के डिजाइन, विकास और विनिर्माण पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता बताई तथा वैश्विक बाजारों के लिए क्षमताएं विकसित करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि मौजूदा निवेश के दौर का लाभ उठाते हुए भारत को डिजिटलाइजेशन, ऑटोमेशन, एडवांस्ड कंट्रोल सिस्टम, SCADA, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों में घरेलू क्षमताओं का निर्माण करना चाहिए। श्री अग्रवाल ने कहा, “हमारे सामने सबसे बड़ा अवसर है—भारत में डिजाइन करें, भारत में विकसित करें और भारत में विनिर्माण करें। हम वैश्विक अनुभव से सीख सकते हैं और सिद्ध तकनीकों को अपना सकते हैं, लेकिन साथ ही उस अनुभव का उपयोग अपनी क्षमताओं के निर्माण के लिए भी करना चाहिए।”
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री घनश्याम प्रसाद ने कहा कि बिजली व्यवस्था को विश्वसनीयता बनाए रखते हुए ऊर्जा संक्रमण को आगे बढ़ाना होगा। बिजली की मांग और उत्पादन के बदलते स्वरूप के कारण बिजली प्रणाली की योजना और संचालन में नवाचार तथा अधिक व्यवस्थित दृष्टिकोण की आवश्यकता है।उन्होंने कहा, “बिजली व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है। पहले उत्पादन और मांग अपेक्षाकृत अनुमानित थे। आज मांग में अधिक उतार-चढ़ाव और उत्पादन में अधिक अनिश्चितता देखने को मिल रही है। इसलिए हमें इन बदलावों को प्रबंधित करने के लिए नवोन्मेषी समाधान विकसित करने होंगे और यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रणाली बढ़ती अक्षय एवं गैर-जीवाश्म ऊर्जा को प्रभावी ढंग से एकीकृत कर सके।”
श्री प्रसाद ने कहा कि ऊर्जा संक्रमण का उद्देश्य केवल निर्धारित संख्यात्मक लक्ष्यों को हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि बिजली व्यवस्था में ऐसा परिवर्तन लाना होना चाहिए जिससे स्वच्छ ऊर्जा की अधिक हिस्सेदारी को प्रभावी ढंग से समाहित किया जा सके। उन्होंने कहा, “हमारे पास एक रोडमैप है और हमारे सामने विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं। आंकड़े महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हम पूरी प्रणाली में किस तरह बदलाव लाते हैं और ऊर्जा मिश्रण में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी किस तरह बढ़ाते हैं।”
ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी के महानिदेशक श्री कृष्ण चंद्र पाणिग्राही ने बिजली उत्पादन और बुनियादी ढांचे में निवेश के साथ-साथ मांग-पक्ष प्रबंधन (Demand-side Management) और ऊर्जा दक्षता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा दक्षता के माध्यम से बचाई गई बिजली की प्रत्येक यूनिट अतिरिक्त उत्पादन, पारेषण और वितरण बुनियादी ढांचे की आवश्यकता को कम करती है और इससे प्रत्यक्ष आर्थिक मूल्य सृजित होता है।
श्री पाणिग्राही ने उद्योग, भवनों और परिवहन के बढ़ते विद्युतीकरण के साथ-साथ डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य डिजिटल तकनीकों से उत्पन्न हो रही बिजली की बढ़ती मांग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिमांड-साइड मैनेजमेंट, डिमांड रिस्पॉन्स, ऊर्जा-कुशल तकनीक और नवोन्मेषी वित्तीय तंत्र उद्योगों, विशेष रूप से छोटे उद्यमों को ऊर्जा दक्ष समाधान अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
एफआईसीसीआई पावर कमेटी के चेयर और जीएमआर पावर एंड अर्बन इंफ्रा के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री आशीष बसु ने भारत के बिजली क्षेत्र में हो रहे तेज बदलाव और पारेषण, भंडारण, लचीलेपन तथा बाजार तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परिवर्तनीय और इन्वर्टर-आधारित अक्षय ऊर्जा उत्पादन की बढ़ती हिस्सेदारी से ग्रिड के संचालन की प्रकृति बदल रही है और इसके अनुरूप फ्लेक्सिबिलिटी तथा सिस्टम इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश आवश्यक है।
श्री बसु ने पारेषण क्षमता और ग्रिड स्थिरता बढ़ाने के लिए एडवांस्ड कंडक्टर, रिकंडक्टरिंग, सिंक्रोनस कंडेंसर और अन्य तकनीकों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा के अगले चरण के एकीकरण के लिए आवश्यक लचीलापन तैयार करने हेतु “अनिवार्य प्रावधानों और बाजार तंत्र” दोनों को साथ लेकर चलना होगा।
एफआईसीसीआई आरई सीईओज कमेटी के चेयर और सेम्बकॉर्प इंडस्ट्रीज के चेयरमैन, साउथ एशिया एवं सीईओ, हाइड्रोजन बिजनेस, श्री विपुल तुली ने कहा कि भारत का बिजली क्षेत्र कमी के दौर से निकलकर पर्याप्त उत्पादन क्षमता और बढ़ती मांग वाले चरण में पहुंच गया है। उन्होंने कहा, “भारत के बिजली क्षेत्र में दुनिया के सबसे तेज बदलावों में से एक हुआ है। बार-बार होने वाली बिजली की कमी से लेकर इस वित्त वर्ष के अंत तक 530+ GW की स्थापित क्षमता वाले बिजली-पर्याप्त देश तक का सफर महत्वपूर्ण है। हमने बिना बिजली की कमी के रिकॉर्ड पीक बिजली मांग भी दर्ज की है। भविष्य में मांग और बढ़ सकती है, लेकिन बदलती मांग की प्रकृति के साथ अधिक विश्वसनीयता और स्थिरता सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा।”
बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अभिषेक रंजन ने अक्षय ऊर्जा की तेज वृद्धि तथा डेटा सेंटर और AI-आधारित कंप्यूटिंग जैसी बिजली-गहन मांग के उभरते क्षेत्रों पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा, “हमने समय से पहले ही अक्षय ऊर्जा (RE) क्षमता के लक्ष्यों को पार कर लिया है। 31 जुलाई 2026 तक हम 300+ GW अक्षय ऊर्जा क्षमता तक पहुंच चुके थे और स्थापित क्षमता में 54% से अधिक हिस्सा RE का है। वर्ष 2026 में आपूर्ति की गई कुल ऊर्जा में 30% से अधिक हिस्सा RE का था। हमारा अनुमान है कि केवल डेटा सेंटर के कारण बिजली की मांग 2025 के 2.2 GW से बढ़कर 2030 तक 12 GW हो सकती है। इसलिए हम बिजली की पर्याप्तता सुनिश्चित करने के लिए योजनाओं पर काम कर रहे हैं।”
सम्मेलन के दौरान एफआईसीसीआई की रिपोर्ट “ग्रिड स्टेबिलिटी इन इंडिया: फ्रॉम डायग्नोस्टिक असेसमेंट टू अ रिफॉर्म एंड इम्प्लीमेंटेशन रोडमैप”भी जारी की गई। रिपोर्ट में अक्षय ऊर्जा के बढ़ते एकीकरण के बीच भारत के पावर ग्रिड की स्थिरता के सामने उभरती चुनौतियों का अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट में तकनीक, नवाचार और सिस्टम-स्तरीय समाधानों के माध्यम से भारत के पावर ग्रिड की विश्वसनीयता, मजबूती और लचीलेपन को बढ़ाने के उपायों पर भी प्रकाश डाला गया है।

