दास धर्म संत समागम, विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई : संत त्रिलोचन दास।

तीन दिवसीय 46वाँ दास धर्म संत समागम हुआ शुरू
समागम में विश्व शांति के लिए प्रार्थना।
नई दिल्ली:सचखंड नानक धाम के संरक्षक एवं प्रमुख संत श्री त्रिलोचन दास जी महाराज के पावन सान्निध्य में तीन दिवसीय 46वाँ दास धर्म संत समागम का आयोजन 14, 15 एवं 16 फ़रवरी 2026 को इन्द्रापुरी, लोनी, गाज़ियाबाद में भव्य रूप से 14 फरवरी को आरंभ हुआ। समागम में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आध्यात्मिक वातावरण को गौरवपूर्ण बनाया। समागम के प्रथम दिवस 14 फ़रवरी को मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख भारत भूषण जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में राष्ट्र निर्माण, संस्कार और आध्यात्मिक जागरण के महत्व पर प्रकाश डाला।


द्वितीय दिवस 15 फ़रवरी को देशभर से आई सुहागिनों द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों मातृशक्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर दिल्ली के चाँदनी चौक से सांसद श्री प्रवीण खंडेलवाल जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने संस्था द्वारा संचालित धार्मिक, सामाजिक एवं सेवा कार्यों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।


इस शुभ अवसर पर अतिथियों ने संस्था द्वारा संचालित विभिन्न धार्मिक, शैक्षिक एवं जनकल्याणकारी कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की तथा भविष्य में भी ऐसे सेवा कार्य निरंतर चलते रहने की कामना की। निःशुल्क चिकित्सा सेवा एवं सामाजिक सहयोग रहा। इस अवसर पर नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें जरूरतमंद रोगियों के निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन किए गए तथा श्रवण यंत्र वितरित किए गए। साथ ही सचखंड के अंतर्गत दास यूनिवर्सल एकेडमी में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को निःशुल्क पुस्तकें एवं आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर भेंट की गईं।
महाशिवरात्रि के पावन पर्व के अवसर पर विशेष पूजन, रुद्राभिषेक एवं भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की। समागम स्थल हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
संत श्री त्रिलोचन दास जी महाराज ने अपने संदेश में कहा जहाँ स्वार्थ नहीं, वहीं परमार्थ होता है और जहाँ परमार्थ है, वहीं प्रेम है। प्रेम और निःस्वार्थ त्याग से बढ़कर न कोई दान है और न कोई धर्म होता है। श्रद्धालुओं के लिए विशेष ध्यान शिविर का आयोजन किया गया। उनकी सुविधा के लिए 24 घंटे लंगर सेवा निरंतर संचालित रही। संस्था की कार्यकारिणी समिति ने बताया कि समागम स्थल पर स्वच्छता, सुरक्षा एवं सुव्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे सभी श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। तीन दिवसीय 46वाँ दास धर्म संत समागम आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक सेवा एवं मानव कल्याण की भावना का भव्य प्रतीक बनकर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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