कैब ड्राइवर के जीवन का अतीत हैं फ़िल्म ‘अनिता’,,,, फ़िल्मी समीक्षा.

दिल्ली में केब ड्राइवर वो भी महिला होना, कितना चुनौती भरा हैं यह दिखाती हैं 80मिनट की फीचर्स फ़िल्म ‘अनीता” कितना समझौता करना पड़ता हैं हर तरफ,निदेशक,लेखक, संकलन सदाशिव राव ने दिखाने की ईमानदार कोशिश की हैं, ‘अनीता’ ऐसी महिला हैं जो अपने परिवार के साथ रहते हुए उनके विषय में सोचना, पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी सभी फ़िल्म का हिस्सा हैं,फिल्म का शुरुआती अंश महिला केब ड्राइवर के जीवन में आने वाले उतार चढ़ाव, मिलने वाले पेसेंजर,की कुछ हकीकत भी बया करतीं नजर आती हैं ,वहीं अचानक ईमानदारी, मर्डर और ब्लेकमेल, कानून और पुलिस की हकीकत सभी एक से नहीं होते,एक्टर दीपाली जैन मॉडल,सोशल,योगा और मोटिवेशनल स्पीकर ने कैब ड्राइवर ‘अनीता’ के रोल में पूरी तरह ढालने की कोशिश, शांत और कम बोल कर केवल चेहरे के हावभाव से ही फ़िल्म में बहुत कुछ नजर आता हैं.

,एक पेसेंजर का घर बुलाकर गलत सोच, आज सबसे ज्यादा चर्चा रहने वाली घटना युवाओं में पनपता एक दूसरे के प्रति आकर्षण, सभी बाखुबी दिखाने की एक शानदार कोशिश हैं, सहायक कलाकारों में रोहित तन्नान, लावण्या राव,शील कलिया, हरजीन्दर कौर, दिनेश शर्मा, डॉ लिल्ली सिंह, दिनकर राव, सविता गुप्ता, गगन भसीन, आई.पी. शवानी , मनीषा बहुगुणा , अमित लूणीया, अनुराधा शर्मा, दक्ष शर्मा, शैली अग्रवाल, और गौरव शर्मा ने अपने अपने अभिनय में समर्पित रहें,

दिल्ली के विभिन्न इलाकों में शूटिंग करनाऔर लगातार लाईव कैमरे का सामना करना, सुबह, शाम और रात की रंगिनिया भी फ़िल्म के प्रति सोचने पर मजबूर कर देगी

.क्योंकि केब ड्राइवर का पेसेंजर से व्यवहार और पेसेंजर का ड्राइवर के साथ,दर्शक केवल कोई न कोई होने वाली घटना को लेकर चिंतित नजर आते हैं. संगीत की जितनी जरूरत थी उतनी ही रही, अंत में दर्शकों की सोच थी की क्या दूसरा पार्ट भी?
बाकी फ़िल्म अब फ़िल्म फेस्टिवल का हिसा बनेगी, उसके बाद लगेगा की किस प्लेटफार्म पर रिलीज की जाय , अभी yutub और इस्टाग्राम पर कुछ हिस्सा देख सकते हैं.
फ़िल्म में रेटिंग की देने की जरूरत नहीं दर्शक खुद फैसला करेंगे.

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