Lodhi Art Festival 2026: 10 साल का जश्न, रंगों से सजा भारत का पहला पब्लिक आर्ट डिस्ट्रिक्ट

Lodhi Art Festival 2026: पर्यावरण सरक्षण और जल संचय पर विशेष,,,

नई दिल्ली, फरवरी 2026। राजधानी की लोधी कॉलोनी एक बार फिर रंगों और रचनात्मकता के उत्सव में डूबने जा रही है। St+art India Foundation और Asian Paints के सहयोग से आयोजित लोधी कला महोत्सव 2026, भारत के पहले पब्लिक आर्ट डिस्ट्रिक्ट की 10वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा है। यह महोत्सव 1 से 28 फरवरी तक चलेगा, जिसमें कला स्थलों का विस्तार और कई नई गतिविधियां शामिल होंगी।

एक दशक पहले 2015 में महज़ तीन भित्तिचित्रों से शुरू हुई यह पहल आज 65 से अधिक भित्तिचित्रों के साथ एक जीवंत सार्वजनिक कला संग्रह में बदल चुकी है। खन्ना मार्केट और मेहरचंद मार्केट के बीच स्थित यह खुला आवासीय इलाका अब कला प्रेमियों, फोटोग्राफरों और छात्रों का पसंदीदा स्थल बन चुका है।

पिछले दस वर्षों में यहां 100 से अधिक भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने काम किया। कलाकारों की मौजूदगी, स्थानीय निवासियों की भागीदारी और संस्थागत सहयोग ने लोधी आर्ट डिस्ट्रिक्ट को एक अनूठी पहचान दी। #ArtForAll की भावना से प्रेरित इस मॉडल ने देश के अन्य शहरों—मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, गोवा और कोयंबटूर—में भी आर्ट डिस्ट्रिक्ट की अवधारणा को जन्म दिया।

2026 के संस्करण की थीम ‘डाइलेट ऑल आर्ट स्पेसेज’ है। इसके तहत यह सवाल उठाया जा रहा है कि कला का दायरा आखिर कितना व्यापक हो सकता है। महोत्सव में नए भित्तिचित्रों के साथ सामुदायिक संवाद, गाइडेड वॉक, आउटरीच कार्यक्रम और डिजिटल गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। उद्देश्य है कि कला केवल दीवारों तक सीमित न रहे, बल्कि रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बने।

एशियन पेंट्स के एमडी और सीईओ अमित सिंगल ने कहा कि लोधी आर्ट डिस्ट्रिक्ट इस बात का उदाहरण है कि जब कला को शहर के भीतर पनपने का अवसर मिलता है तो वह लोगों के जीवन से गहरे जुड़ जाती है। उनके मुताबिक, सार्वजनिक स्थानों पर कला महज़ सजावट नहीं, बल्कि संवाद और जुड़ाव का माध्यम है।

वहीं, St+art इंडिया फाउंडेशन के संस्थापकों का कहना है कि 2015 में शुरू हुआ यह प्रयोग आज विश्वास और निरंतर सहयोग का प्रतीक बन चुका है। स्थानीय निवासियों, कलाकारों और सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर इस इलाके ने एक जीवंत सांस्कृतिक पहचान बनाई है।

लोधी कला महोत्सव 2026 न केवल बीते दस वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करता है। आयोजकों का लक्ष्य है कि देशभर में ऐसे कला जिलों का नेटवर्क तैयार हो, जो अपने स्थानीय परिवेश से जुड़े रहें और वैश्विक संवाद का हिस्सा भी बनें।

राजधानी में कला के इस खुले उत्सव ने यह साबित कर दिया है कि जब रंग, रचनात्मकता और सामुदायिक सहभागिता एक साथ आते हैं, तो शहर की दीवारें भी बोलने लगती हैं।

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