डा श्रॉफ्स चैरिटी आई हॉस्पिटल ने पूरे किए अपने 100 साल, अगले 100 सालों के लिए एक नई दृष्टि का संकल्प

नई दिल्ली, 23 फरवरी 2026: Dr. Shroff’s Charity Eye Hospital (SCEH) देश की सेवा के 100 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। इसकी नींव 1924 में रखी गई थी, जबकि इसका चैरिटेबल ट्रस्ट 1922 में स्थापित हुआ था — यानी एक सदी की प्रेरणादायक यात्रा पूरी हो चुकी है। मिशनरी नेत्र विशेषज्ञ डॉ. एस. पी. श्रॉफ ने ओल्ड दिल्ली के दरियागंज में एक छोटे से कमरे से इसकी शुरुआत की थी। आज यह एक मल्टिडाइमेन्शनल आई केयर संस्थान बन चुका है, जो इस सिद्धांत पर आधारित है कि अच्छी और गुणवत्तापूर्ण आंखों की देखभाल हर व्यक्ति को मिलनी चाहिए — चाहे उसकी आर्थिक या सामाजिक पृष्ठभूमि कैसी भी हो। अस्पताल का नियम है कि कम से कम 50% सर्जरी सेवाएं उन लोगों को मुफ्त दी जाएं जो इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। SCEH समान और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल के जरिए रोकी जा सकने वाली अंधता को खत्म करने के अपने मिशन पर लगातार काम कर रहा है। इसने राष्ट्रीय नेताओं से लेकर दिहाड़ी मजदूरों तक — सभी को समान सम्मान और गरिमा के साथ सेवा दी है।

इस ऐतिहासिक मौके पर अस्पताल ने एक स्मारक कॉफी टेबल बुक लॉन्च की, जिसमें उसकी सेवा, क्लिनिकल उत्कृष्टता और नवाचार की पूरी यात्रा को दर्शाया गया है। साथ ही आने वाले दशकों के लिए उसकी रणनीति भी साझा की गई है — जिसमें सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, ट्रेनिंग को मजबूत करना, रिसर्च को आगे बढ़ाना और डिजिटल हेल्थ का बेहतर उपयोग करना शामिल है। अब प्रिवेंटिव और कम्युनिटी-बेस्ड आई केयर पर और ज्यादा जोर दिया जाएगा।

विरासत पर बात करते हुए Dr. Shroff’s Charity Eye Hospital के CEO, डॉ. उमंग माथुर ने कहा: “100 सालों से SCEH जागरूक सेवा का प्रतीक बना हुआ है, जहां उत्कृष्टता और संवेदनशीलता साथ-साथ चलती हैं। ऐसे देश में जहां रोकी जा सकने वाली अंधता अभी भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, समय पर और अच्छी गुणवत्ता वाली आंखों की देखभाल को विशेष सुविधा नहीं बल्कि एक मौलिक अधिकार माना जाना चाहिए। एक छोटे से क्लिनिक से शुरू होकर आज SCEH 7 सेकेंडरी सेंटर्स और 114 विजन सेंटर्स के बड़े नेटवर्क में बदल चुका है। हर साल 80,000 सर्जरी करता है, 2 लाख से अधिक बच्चों की जांच करता है और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक जैसे साझेदारों के सहयोग से कम्युनिटी आउटरीच प्रोग्राम्स के जरिए 20 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंचता है। सालों के दौरान SCEH ने कॉर्निया, ग्लूकोमा, विट्रियो-रेटिना, ऑक्यूलोप्लास्टी, ऑक्यूलर ऑन्कोलॉजी, पीडियाट्रिक ऑप्थैल्मोलॉजी और न्यूरो-ऑप्थैल्मोलॉजी जैसी कई विशेष सेवाएं विकसित की हैं। यह सब 31 से अधिक मापनीय क्लिनिकल मानकों वाले मजबूत क्वालिटी फ्रेमवर्क के तहत किया जाता है। जैसे-जैसे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी और बचपन में अंधता के मामले बढ़ रहे हैं, हम नवाचार, विस्तार और सर्वोच्च देखभाल मानकों के प्रति प्रतिबद्ध हैं — ताकि पैसों की कमी के कारण किसी की रोशनी न छिने।”

संस्थान ने हमेशा नए आयाम स्थापित किए हैं — शुरुआती केराटोप्लास्टी प्रक्रियाओं से लेकर उत्तर भारत के सबसे बड़े आई बैंकों में से एक की स्थापना तक, जिसने हजारों लोगों की रोशनी वापस दिलाई। Orbis International के साथ मिलकर भारत का पहला चिल्ड्रन आई केयर सेंटर शुरू किया गया, साथ ही उन्नत स्टेम सेल रिसर्च और वैश्विक ट्रेनिंग सहयोग भी किए गए। इसके चिल्ड्रन आई हेल्थ प्रोग्राम के तहत रेटिनोब्लास्टोमा और रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी का मुफ्त इलाज किया जाता है। शिक्षा और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के जरिए खासकर वंचित युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाया जाता है। बोत्सवाना में चलाए गए अंतरराष्ट्रीय मोतियाबिंद उन्मूलन कार्यक्रम इसके वैश्विक स्तर पर रोकी जा सकने वाली अंधता को कम करने के संकल्प को दर्शाते हैं।

भविष्य की योजना के बारे में आगे बात करते हुए उन्होंने कहा: “मजबूत लीडरशिप काउंसिल और बेहतर गवर्नेंस के साथ SCEH 2.0 सिर्फ आकार में बढ़ने का लक्ष्य नहीं रखता, बल्कि अपने प्रभाव को और गहरा करना चाहता है। जैसे-जैसे अस्पताल अपनी दूसरी सदी में कदम रख रहा है, गुणवत्ता, करुणा और नवाचार उसके केंद्र में बने रहेंगे। आने वाला समय सिर्फ विस्तार नहीं बल्कि स्मार्ट और टेक्नोलॉजी-आधारित देखभाल की मांग करेगा। 2030 तक हमारा लक्ष्य 10 सेंटर्स और 150 विजन सेंटर्स तक विस्तार करना है और सालाना सर्जरी की संख्या 1.5 लाख तक पहुंचाना है। हम स्टेम सेल थेरेपी, ट्रांसलेशनल रिसर्च, एडवांस ट्रेनिंग और डिजिटल स्क्रीनिंग में निवेश बढ़ाएंगे, ताकि डायबिटिक रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा और बचपन में अंधता जैसी चुनौतियों का बेहतर समाधान किया जा सके। हमारा स्पष्ट लक्ष्य है — सार्वभौमिक, पूर्वानुमानित और निवारक आई केयर, ताकि भारत में रोकी जा सकने वाली अंधता बहुत कम हो जाए और सेवाएं अस्पताल तक सीमित न रहकर समुदायों के करीब पहुंचें।”

जैसे ही संस्थान अपनी दूसरी सदी में प्रवेश कर रहा है, यह शताब्दी सिर्फ एक उपलब्धि नहीं बल्कि उस उद्देश्य की निरंतरता है जिसे दशकों से लोगों ने मिलकर बनाया और आगे बढ़ाया है। पीढ़ियों से जुड़े डॉक्टरों, नर्सों, सामुदायिक कार्यकर्ताओं और साझेदारों ने इस जीवंत विरासत को संभाला है — जहां क्लिनिकल उत्कृष्टता और करुणा का सुंदर मेल है। आज मनाया जा रहा हर पड़ाव उसी मूल वादे पर आधारित है — सम्मान, पहुंच और भरोसा — जहां मुफ्त और भुगतान करने वाले मरीजों को एक जैसा उच्च स्तर का उपचार मिलता है।

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